जब तक जिंदा था तब तक ढूंढ नहीं पाए, मौत के बाद मिल गया परमेश्वर का घर, गुमशुदा को लावारिश बताकर कर दिया कफन दफन, खाकी पर उठे गंभीर सवाल
Unable to find him while he was alive, found God's home after death, missing man declared abandoned and buried, serious questions raised on khaki
बिलासपुर/रतनपुर : कानून के रखवालों की ऐसी कार्यप्रणाली जिसने एक हंसते-खेलते गरीब परिवार को उम्र भर का आंसू दे दिया. यह मामला बिलासपुर के रतनपुर थाना क्षेत्र का है. जहां पुलिस की एक बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता सामने आई है. एक व्यक्ति 9 मई से लापता हो गया. घरवाले थाने के चक्कर काटते रहे. लेकिन पुलिस को वो नहीं मिला. हद तो तब हो गई जब उस व्यक्ति को ‘लावारिस’ घोषित कर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. और कफ़न-दफ़न होने के बाद अचानक पुलिस को उसका घर मिल गया.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत भरारी का का रहने वाला परमेश्वर धीवर बीते 9 मई की शाम से अचानक लापता हो गया. रोज़मर्रा की तरह परमेश्वर काम से लौटा और शाम को मेन रोड रतनपुर की तरफ निकला था. लेकिन उसके बाद वह दोबारा लौटकर घर नहीं आया. एक दिन बीता, दो दिन बीते, आंखों में आंसू और दिल में अनहोनी का डर लिए परमेश्वर की पत्नी और उसके दो मासूम बच्चे उसकी राह तकते रहे.
जब परमेश्वर का कहीं अता-पता नहीं चला, तब थक-हारकर परिजनों ने रतनपुर थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. परिजनों को उम्मीद थी कि बिलासपुर पुलिस, जो बड़े-बड़े शातिर अपराधियों को पाताल से भी ढूँढ निकालती है. वो उनके घर के मुखिया को जरूर खोज लेगी. लेकिन बदकिस्मत परिवार इस बात से पूरी तरह अनजान था कि खाकी की सुस्ती उनके आशियाने को उजाड़ चुकी है.
दरअसल लापता होने वाली उस मनहूस रात यानी 9 मई को ही परमेश्वर धीवर किसी अज्ञात हादसे का शिकार हो गया था. मौके पर मौजूद किसी शख्स ने एम्बुलेंस को कॉल किया. नियम और इमरजेंसी सेवा का पहला कर्तव्य तो यह कहता है कि घायल को फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया जाए, लेकिन परमेश्वर के मामले में ऐसा नहीं हुआ. उसे सीधे सिम्स (CIMS) अस्पताल पहुंचाया गया. जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इसके बाद परमेश्वर को सीधे ‘लावारिस’ घोषित कर दिया गया. सवाल यह उठता है कि क्या रतनपुर पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एक बार भी सिम्स अस्पताल या मर्चुरी का रुख करना ठीक नहीं समझा? क्या एक गरीब की जान और उसकी शिनाख्त की कीमत पुलिस की नजर में कुछ भी नहीं थी? नतीजा यह हुआ कि पुलिस की इसी घोर लापरवाही के चलते सिम्स अस्पताल में परमेश्वर धीवर को लावारिस मानकर उसका कफ़न-दफ़न कर दिया गया.
इस पूरी कहानी का सबसे कड़वा और दिलचस्प मोड़ कल 18 मई को आया. जब परमेश्वर के दफ़न होने के बाद अचानक रतनपुर पुलिस की कुंभकर्णी नींद टूटी. दोपहर के वक्त पुलिस सीधे परमेश्वर के घर पहुंच गई. हद तो तब हो गई जब पुलिस ने संवेदनशीलता की सारी हदें पार करते हुए परमेश्वर की पत्नी से कहा कि आपका पति सिम्स अस्पताल में है. जबकि दूसरी तरफ परमेश्वर के भाई को ये जानकारी दी गई कि उसका कफ़न-दफ़न हो चुका है. आप चाहो तो लाश को बाहर निकलवा सकते हो.
अब सवाल यह खड़ा होता है कि जो पुलिस परमेश्वर के जिंदा रहते या उसकी मौत के फौरन बाद उसका घर नहीं ढूँढ पाई. वही पुलिस कफ़न-दफ़न हो जाने के बाद उसके घर तक कैसे पहुँच गई?
अब मिट्टी और खप्पर से बने उस छोटे से आशियाने में मातम पसरा है. बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है और पत्नी का सुहाग उजड़ गया है. लेकिन पुलिस के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि आखिर 9 मई की रात परमेश्वर के साथ क्या हुआ था? यह महज़ एक हादसा था या कोई बड़ी साजिश?
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