मैनपुर शाला प्रवेशोत्सव में काले झंडे दिखाने जा रहे कांग्रेसियों को घर बैठाने पर सियासत गरम. जर्जर स्कूल भवन को लेकर विरोध, लोकतंत्र पहले ही हो गया नजरबंद!
Politics heats up after Congress workers, who were on their way to wave black flags at the Mainpur school enrollment festival, were confined to their homes. Amidst protests over the dilapidated school building, democracy itself has effectively been placed under house arrest.
गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के मंच पर शिक्षा की बात हो रही थी. लेकिन मैनपुर की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा उस “काले झंडे” की रही. जो कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले ही पुलिस की कार्रवाई की वजह से चर्चा का विषय बन गया. भाजपा सांसद को काला झंडा दिखाने की कथित तैयारी की खबर मिलते ही मैनपुर पुलिस सक्रिय हो गई और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव सहित दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया.
मैनपुर कांग्रेस नजरबंद भाजपा सांसद को काला झंडा दिखाने की थी तैयारी
गरियाबंद के राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. व्यंग्यात्मक अंदाज में लोग यह कहते नजर आए कि इस बार काला झंडा नहीं, बल्कि विरोध का अधिकार ही घर के भीतर नजरबंद हो गया. हालांकि प्रशासन की तरफ से इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से उठाया गया एहतियाती कदम माना जा रहा है.
जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव से पहले पुलिस की कार्रवाई
मिली जानकारी के मुताबिक जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में भाजपा सांसद के शामिल होने का कार्यक्रम तय था. इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर काला झंडा दिखाकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी की. खबर पुलिस को मिली. खबर मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर ही नजरबंद कर दिया. जिससे वे कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके.
कार्यक्रम में जनक ध्रुव शामिल फिर भी कांग्रेसियों के विरोध की चर्चा
इधर कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव भी शामिल हुए. ऐसे में एक तरफ सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधि एक ही आयोजन में मौजूद रहे. वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के कई स्थानीय नेता कार्यक्रम से पहले ही पुलिस की निगरानी में रहे. यही विरोधाभास पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बहस का विषय बना रहा है.
घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना संवैधानिक अधिकार है और अगर किसी तरह का विरोध होने की आशंका थी तो सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा सकती थी. दूसरी तरफ प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए यह कदम उठाया गया.
शाला प्रवेश उत्सव बना राजनीतिक अखाड़ा
मैनपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विरोध की राजनीति अब खबर मिलने भर से सीमित कर दी जाएगी. या फिर लोकतांत्रिक असहमति के लिए पर्याप्त स्थान बचा रहेगा. फिलहाल इस पूरे मामले ने शाला प्रवेश उत्सव से ज्यादा राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोर ली है.
कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में और तूल पकड़ सकता है. कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताकर सरकार को घेरने की तैयारी कर सकती है. जबकि सरकार के इशारों पर चलने।वाला प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य प्रक्रिया बताता रहेगा. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह नजरबंदी सिर्फ एक दिन की कार्रवाई साबित होती है या आने वाले समय की राजनीति में नया मुद्दा बन जाती है.
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने प्रशासन और सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में भारी लापरवाही के आरोप लगाए हैं. विरोध की असल वजह इस तरह हैं:
जर्जर और अधूरे स्कूल भवन: मैनपुर मुख्यालय के शासकीय स्कूल भवन पिछले कई साल से जर्जर हालत में हैं और उनका निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है.
छत विहीन कमरों में पढ़ाई: हालात इतने बदतर हैं कि स्कूली बच्चों को ऐसे स्थानों पर बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. जहां उनके सिर के ऊपर ठीक से छत तक नहीं है.
सुरक्षा से सीधा खिलवाड़: खस्ताहाल भवनों में पढ़ाई करने से मासूम स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर हर समय गंभीर खतरा मंडराता रहता है.
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा: स्कूल के मुद्दे के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की हो रही उपेक्षा को लेकर भी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश था.
हालाँकि पुलिस प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी आवाज़ जनप्रतिनिधि तक पहुंचे. कार्यक्रम की समाप्ति के बाद, नजरबंद किए गए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी से मुलाकात करने का समय दिया गया. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर सांसद को एक ज्ञापन सौंपा और स्कूल भवनों के जल्द मरम्मत और निर्माण की मांग की.
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मैनपुर ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक बच्चों को पूर्ण और सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध नहीं कराए जाते. तब तक वे इस मुद्दे को इसी तरह मजबूती से उठाते रहेंगे. क्योंकि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.
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