मूसलाधार बारिश का कहर, वन विभाग परिसर में बोलेरो पर गिरा विशाल पेड़, गांव में घुसा पानी, 9 करोड़ का निर्माणाधीन पुल भरभराकर गिरा, 20 घंटे बाद खुला हाइवे

Havoc caused by torrential rain: a massive tree fell on a Bolero within the Forest Department complex, floodwaters entered the village, an under-construction bridge worth ₹9 crore collapsed, and the highway reopened after 20 hours.

मूसलाधार बारिश का कहर, वन विभाग परिसर में बोलेरो पर गिरा विशाल पेड़, गांव में घुसा पानी, 9 करोड़ का निर्माणाधीन पुल भरभराकर गिरा, 20 घंटे बाद खुला हाइवे

नवापारा राजिम में आई बाढ़, भगवान कुलेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंचा पानी
नवापारा : छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहलाने वाले त्रिवेणी संगम में स्थित नवापारा राजिम में तेज बारिश का कहर सामने आया है. नवापारा के नेहरू घाट पर महानदी, पैरी और सोढूरं नदी के बढ़ते जल स्तर से त्रिवेणी संगम पर जल भराव का विहंगम दृश्य दिखाई दे रहा है.
त्रिवेणी संगम पर स्थित भगवान कुलेश्वर महादेव का मंदिर भी लगभग डूब सा गया है. ऐतिहातन बाढ़ की स्थिति को देखते हुए रायपुर एवं गरियाबंद दोनों जिलों के प्रशासन अपने नदी के तटों पर बसे गांवों को अलर्ट जारी कर नदी तट निकट मकानों और खेतों से दूर रहने की हिदायत भी है.
गरियाबंद में भी बाढ़
जिला मुख्यालय के नेशनल हाईवे पर 3 फीट का पानी भराव लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त, वाहन चालकों के लिए लिए आफतें... प्रशासन व पुलिस प्रशासन मौके पर सतर्क है. सीकाशेर बांध से 44000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. सिकाशेर के 21 में 16 गेट खोले जिसके चलते पैरी नदी अपने पूरे उफान पर है.
इसी तरह अब सब की निगाहें धमतरी के शेड्ल बांध पर टिकी है जब वहां से पानी छोड़ा जाएगा तब निचली बस्तियों में ये बाढ़ का पानी कहर ढा सकता है. पन्टोरा कन्या आश्रम में जल भराव बढा जिसके चलते 50 से अधिक बच्चों को बारूका में शिफ्ट किया गया. शोभा गरीबा मार्ग में बना तेज बहाव में रपटा बह गया. वहीं बहाकोचबाय मालगांव कसनाला में पानी सड़क पर आ जाने से मार्ग अवरुद्ध हो गया है. गरियाबंद, नगरी, धमतरी मार्ग के सभी नदी नाले उफान पर हैं.
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9 करोड़ का निर्माणाधीन पुल भरभराकर गिरा
गरियाबंद : लगातार 48 घंटे से ज्यादा समय से हो रही मूसलाधार बारिश ने गरियाबंद जिले में भारी तबाही मचानी शुरू कर दी है. इस बीच सबसे बड़ी खबर उदंती नदी से सामने आई है, जहां करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा निर्माणाधीन पुल अचानक भरभराकर गिर गया. पुल गिरने की घटना से इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों की उम्मीदों पर भी बड़ा झटका लगा.
उदंती नदी पर बन रहा था रणनीतिक पुल
यह पुल गरियाबंद जिले के अमलीगांव को ओडिशा के चार गांवों से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा था. पुल बनने के बाद दोनों राज्यों के ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने वाली थी. लेकिन भारी बारिश और तेज बहाव के बीच निर्माणाधीन संरचना ढह गई.
ओडिशा सरकार करा रही थी निर्माण
मिली जानकारी के मुताबिक पुल का निर्माण ओडिशा सरकार की ओर से कराया जा रहा था. शुरुआती जानकारी में माना जा रहा है कि लगातार हो रही बारिश और उदंती नदी के तेज बहाव के कारण निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक ढह गया. हालांकि घटना के तकनीकी कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.
ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें
पुल गिरने से अमलीगांव सहित आसपास के ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ गई हैं. यह पुल छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम बनने वाला था. अब निर्माण कार्य पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है और परियोजना पूरी होने में देरी की आशंका.
बढ़ गई है।प्रशासन की नजर, जांच का इंतजार
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की नजर पूरे मामले पर है. पुल गिरने के वजह की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा सिर्फ प्राकृतिक आपदा का परिणाम है या निर्माण गुणवत्ता में भी कोई कमी रही.
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गरियाबंद में मूसलाधार बारिश का कहर वन विभाग परिसर में बोलेरो पर गिरा विशाल पेड़
गरियाबंद :
गरियाबंद जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब जनजीवन के साथ-साथ जान-माल के लिए भी खतरा बनती जा रही है. बुधवार देर रात गरियाबंद वन विभाग परिसर में खड़ी एक बोलेरो वाहन पर अचानक विशाल पेड़ गिर गया. जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. राहत की बात यह रही कि घटना के समय वाहन में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया.
मिली जानकारी के मुताबिक लगातार बारिश से जमीन कमजोर होने की वजह से पेड़ों की जड़ें अपनी पकड़ खो बैठीं. देर रात एक के बाद एक दो बड़े पेड़ धराशायी हो गए. इनमें से एक पेड़ सीधे बोलेरो वाहन पर गिरा. जबकि दूसरा पास में गिरने से आसपास का क्षेत्र भी प्रभावित हुआ.
घटना के बाद प्रशासन और वन विभाग ने एहतियात के तौर पर खतरा बने नीलगिरी के पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है. ताकि भविष्य में किसी तरह की जनहानि या दुर्घटना से बचा जा सके. प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है.
इधर, जिले में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है और सड़कें पानी में डूब गई हैं. जिले से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग पिछले करीब 18 घंटे से बंद है. जिससे यात्री और मालवाहक वाहन जगह-जगह फंसे हुए हैं. कई ग्रामीण क्षेत्रों का मुख्यालय से संपर्क भी बाधित हो गया है.
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें तथा बड़े पेड़ों, जर्जर भवनों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें. मौसम विभाग ने जिले में आगामी समय तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है.
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20 घंटे बाद खुला NH-130C, 8 से 10 फीट पानी में डूबा रहा हाईवे, राजधानी से कटा गरियाबंद का संपर्क, 5 साल बाद फिर दोहराया इतिहास
गरियाबंद :
गरियाबंद लगातार 48 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने गरियाबंद जिले की रफ्तार पूरी तरह रोक दी. नेशनल हाईवे 130C पर पंटोरा और बारूका के पास 5 से 7 फीट तक पानी भर जाने के कारण हाईवे को पूरी तरह बंद करना पड़ा. हालात ऐसे थे कि कोई भी छोटा या बड़ा वाहन इस मार्ग से गुजर नहीं पा रहा था और करीब 20 घंटे तक जिला मुख्यालय का राजधानी रायपुर से सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया.
पहले सुरक्षा जांच, फिर खुला हाईवे
बारिश थमने और जलस्तर घटने के बाद पुलिस एवं जिला प्रशासन की टीम ने सड़क की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया. सड़क सुरक्षित पाए जाने के बाद प्रशासन ने सावधानी के साथ वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी. फिलहाल पंटोरा और बारूका दोनों स्थानों पर पानी का स्तर काफी कम हो चुका है. जिससे यातायात सामान्य होने लगा है.
5 साल बाद फिर दोहराया 2021 जैसा मंजर
स्थानीय लोगों के मुताबिक गरियाबंद में 2021 के बाद पहली बार इतनी भीषण बारिश देखने को मिली है. उस समय भी नेशनल हाईवे 130C बाढ़ के पानी में डूब गया था और कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा. अब 2026 की बारिश ने एक बार फिर वही भयावह तस्वीर सामने ला दी. जिससे लोगों को पांच साल पुरानी बाढ़ की याद ताजा हो गई.
लंबी कतारों में फंसे रहे वाहन, लोगों ने झेली परेशानी
हाईवे बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं. जरूरी काम से यात्रा कर रहे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा. राजधानी रायपुर और गरियाबंद के बीच आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा. हालांकि अब मार्ग खुलने के बाद राहत की स्थिति है और वाहन धीरे-धीरे अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं.
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश का दौर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. ऐसे में नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों से गुजरते समय पूरी सावधानी बरतें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें
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बेलाट नाला फिर बना 36 गांवों की मुसीबत, देवभोग मुख्यालय से संपर्क टूटा; हर बारिश में दोहराता है संकट
गरियाबंद/देवभोग :
लगातार हो रही बारिश के चलते बेलाट नाला एक बार फिर उफान पर आ गया है. नाले में जलस्तर बढ़ने से देवभोग मुख्यालय का करीब 36 गांवों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है. हर साल बारिश के मौसम में यही हालात बनते हैं. जिससे हजारों ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
बेलाट नाला पर पानी चढ़ने से सबसे अधिक असर शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार पर पड़ा है. देवभोग मुख्यालय पर निर्भर 36 गांवों के लोग जरूरी कार्यों के लिए भी मुख्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं. मरीजों, विद्यार्थियों और व्यापारियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. 
मौके पर प्रशासन, लोगों को दी जा रही समझाइश
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद है अधिकारियों द्वारा लोगों से उफनते नाले को पार नहीं करने और जोखिम से बचने की अपील की जा रही है. ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो.
पुल का इंतजार अब भी खत्म नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से बेलाट नाला पर पुल निर्माण की मांग की जा रही है. 15 साल भाजपा सरकार, 5 वर्ष कांग्रेस सरकार और अब फिर भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी यह समस्या जस की तस बनी हुई है. वर्तमान कार्यकाल में पुल निर्माण का टेंडर होने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है.
हर बारिश में वही सवाल-कब मिलेगी स्थायी राहत?
हर मानसून में बेलाट नाला 36 गांवों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी इंतजामों से समस्या का समाधान नहीं होगा. अब वे पुल निर्माण कार्य जल्द शुरू कर स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. ताकि हर साल संपर्क टूटने की समस्या से हमेशा के लिए राहत मिल सके.
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महानदी का रौद्र रूप: गांव में घुसा बाढ़ का पानी, SDRF ने एक ही परिवार के 6 लोगों का किया रेस्क्यू
आरंग : महानदी के ऊपरी कैचमेंट इलाकों में हो रही लगातार भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं. महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आरंग क्षेत्र के तटीय गांव निसदा में बाढ़ का पानी घुस गया है. हालात उस समय चिंताजनक हो गए जब गांव के बीचों-बीच जलभराव बढ़ने से एक ही परिवार के 06 सदस्य अपने ही घर में चारों तरफ से पानी से घिर गए. आनन-फानन में मौके पर पहुंची SDRF की टीम ने किसी तरह सभी का रेस्क्यू किया.
घटना की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे और थाना प्रभारी हरीश साहू दल-बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे. फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन द्वारा SDRF (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की टीम को बुलाया गया.
जलभराव की चपेट में आने वाला परिवार निसदा गांव निवासी सियाराम साहू का है. आज सुबह जब महानदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ. तो ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सियाराम साहू और उनके परिवार को समय रहते घर खाली कर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी थी. हालांकि हालात की गंभीरता को न भांप पाने की वजह से परिवार ने शुरुआत में घर छोड़ने से इंकार कर दिया. कुछ ही घंटों में जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि उनका पूरा मकान चारों तरफ से जलमग्न हो गया और वे बाहर निकलने का रास्ता खो बैठे.
जहां एक तरफ एक परिवार जलभराव में फंसा हुआ है. वहीं स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया. महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गांव के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक ने समय रहते मोर्चा संभाला.
पंचायत टीम ने खतरे की जद में आए निचले इलाकों के 12 घरों से 42 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकालकर बनाए गए राहत शिविरों और ऊंचे स्थानों पर पहुंचा दिया है. अगर पंचायत द्वारा यह त्वरित कदम नहीं उठाया जाता, तो फंसे हुए लोगों की संख्या और अधिक हो सकती थी.
निसदा गांव में पानी घुसने और परिवार के फंसने की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया. एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.
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