सरकार और प्रशासन से सवाल पूछने वाली आकांक्षा टोप्पो गिरफ्तार, CPI-ML ने उठाए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल- आलोचना करने की मिली सजा!

Akanksha Toppo, who questioned the government and administration, has been arrested; CPI-ML questions the police action—punished for being critical!

सरकार और प्रशासन से सवाल पूछने वाली आकांक्षा टोप्पो गिरफ्तार, CPI-ML ने उठाए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल- आलोचना करने की मिली सजा!

अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा में जल-जंगल-जमीन और सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाने वाली सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर आकांक्षा टोप्पो की गिरफ्तारी के बाद विवाद बढ़ गया है. पुलिस ने उन्हें दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने और सोशल मीडिया पर अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. वहीं, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है.
सरकार और प्रशासन से सवाल करती रही हैं आकांक्षा
आकांक्षा टोप्पो सोशल मीडिया पर स्थानीय मुद्दों को लेकर मुखर रही हैं. उनके वीडियो में आदिवासियों की जमीन, सरकारी योजनाओं में कथित गड़बड़ियां, भ्रष्टाचार, प्रशासन की कार्यशैली और राजनीतिक नेताओं की जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाते रहे हैं. खासकर सरगुजा क्षेत्र में आदिवासियों के साथ होने वाले कथित अन्याय और जल-जंगल-जमीन से जुड़े सवालों को लेकर वे सरकार और प्रशासन की आलोचना करती रही हैं.
आकांक्षा की बोलने की शैली भी कई बार विवादों में रही है. वे अपने वीडियो में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं और सीधे मुख्यमंत्री, मंत्रियों, अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से सवाल पूछती हैं. उनके समर्थक इसे बेबाक पत्रकारिता और आम लोगों की आवाज बताते हैं. जबकि विरोधी उनकी भाषा और सामग्री पर आपत्ति जताते रहे हैं.
किस मामले में हुई गिरफ्तारी?
कोतवाली पुलिस ने बुधवार को आकांक्षा टोप्पो को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई गंगापुर निवासी शैलेंद्र शर्मा की शिकायत पर दर्ज मामले में की गई. शिकायतकर्ता का आरोप है कि आकांक्षा, होली क्रॉस कॉलेज के व्याख्याता अकील अहमद अंसारी और कुछ सोशल मीडिया चैनलों के संचालकों ने एक दुष्कर्म पीड़िता का साक्षात्कार लेते समय उससे आपत्तिजनक सवाल पूछे और उसकी पहचान से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक कर दीं.
इस मामले में 4 अक्टूबर की रात भारतीय न्याय संहिता के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. गिरफ्तारी के बाद आकांक्षा का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और उन्हें अदालत में पेश किया गया. हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अभी न्यायिक फैसला नहीं आया है.
CPI-ML ने कहा—सरकार की आलोचना करने की मिली सजा
आकांक्षा की गिरफ्तारी पर CPI-ML रेड स्टार के राज्य सचिव कॉमरेड सौरा ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने आरोप लगाया कि आकांक्षा लगातार भाजपा नेताओं, कथित भूमाफिया और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रही थीं. इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
सौरा ने कहा कि आकांक्षा आदिवासी समाज के मुद्दों को सामने लाने का काम करती रही हैं. उनका आरोप है कि भाजपा से जुड़े स्थानीय नेताओं ने साजिश के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज करवाया. पार्टी ने इसे मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि सरकार की आलोचना करना किसी नागरिक का जुर्म नहीं है.
धीरज सिंह के मामले में पुलिस पर दोहरे रवैये का आरोप
CPI-ML ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेता धीरज सिंह का मामला भी सामने रखा है. आकांक्षा ने 4 अक्टूबर को धीरज सिंह के खिलाफ गाली-गलौज, दुर्व्यवहार और दुष्कर्म की धमकी देने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी.
पार्टी का दावा है कि इस मामले में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं. लेकिन आरोपी को थाने से छोड़ दिया गया. दूसरी तरफ आकांक्षा को गिरफ्तार कर लिया गया. CPI-ML ने इसे पुलिस का दोहरा रवैया बताया है. हालांकि इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है.
गिरफ्तारी के साथ उठे अभिव्यक्ति की आजादी के सवाल
CPI-ML ने आकांक्षा की तत्काल रिहाई और उन्हें धमकाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. पार्टी ने स्वतंत्र पत्रकारों और सोशल मीडिया पर जनहित के मुद्दे उठाने वालों की सुरक्षा का सवाल भी उठाया है.
इस पूरे मामले में दो अलग-अलग सवाल सामने हैं. पहला, दुष्कर्म पीड़िता की पहचान और निजता की रक्षा करना कानूनन जरूरी है और इसके उल्लंघन के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. दूसरा, सरकार और प्रशासन की आलोचना करने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई भी कानून के मुताबिक और बिना भेदभाव के होनी चाहिए.
फिलहाल आकांक्षा टोप्पो के खिलाफ दर्ज आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है. वहीं, CPI-ML ने उनकी गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक दबाव होने का आरोप लगाया है. अब यह देखना होगा कि पुलिस इन आरोपों और अपनी कार्रवाई को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती है.
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