करंट से घायल महावीर के कट गए दोनों हाथ, पैसे कटने की तैयारी, इलाज कराने बेची जमीन, नहीं मिली सरकारी सहायता और आयुष्मान योजना का लाभ
Mahavir, who was electrocuted, had both his hands amputated. He was preparing to have his money cut off, sold his land to pay for treatment, and was denied government assistance or the benefits of the Ayushman Yojana.
बिलासपुर : 27 खोली स्थित कार्यालय में जनदर्शन चल रहा था. लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे. लेकिन तभी एक परिवार सामने आया और पूरा माहौल थम गया. मां की आंखों में आंसू थे, आवाज कांप रही थी और सामने था 23 साल के महावीर उजागर का दर्द, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया.
भरारी थाना कोटा क्षेत्र के रहने वाले महावीर उजागर ने 29 मार्च को पहली बार मजदूरी के लिए घर छोड़ा था. शायद उसे अंदाजा भी नहीं था कि काम पर जाने का यह पहला दिन उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा. भरारी स्थित एक फार्म हाउस में काम के दौरान वह 33 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया. हादसा इतना भयावह था कि उसका पूरा शरीर बुरी तरह झुलस गया.
डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए दोनों हाथ काट दिए. 3 अप्रैल को उसके दोनों हाथों का ऑपरेशन हुआ. अब संक्रमण बढ़ने की वजह से एक पैर काटने की नौबत आ गई है. महावीर को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है. जहां वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है.
जनदर्शन में जब यह मामला केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के सामने पहुंचा. तो उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को तलब किया और इलाज और मुआवजे में हुई देरी पर कड़ी नाराजगी जताई. मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग से बात कर महावीर को तत्काल रायपुर रेफर कराने के निर्देश दिए और कहा कि इलाज में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी. उन्होंने स्वेच्छानुदान सहित हर संभव सरकारी सहायता देने का भरोसा भी दिलाया.
इस पूरे मामले को जनदर्शन तक पहुंचाने में जिला पंचायत सदस्य भारती माली की भूमिका अहम रही. उन्होंने बताया कि परिवार पहले कलेक्टर और कमिश्नर तक गुहार लगा चुका था. आवेदन भी दिए गए थे. लेकिन कहीं से कोई ठोस मदद नहीं मिली. इसके बाद वह खुद परिवार को लेकर जनदर्शन पहुंचीं और मजबूती से मामला उठाया.
महावीर के परिवार की हालत बेहद खराब है. इलाज में अब तक 8 से 10 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं. परिवार ने जमीन तक बेच दी. लेकिन फिर भी उन्हें आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पाया. पिता पहले ही गुजर चुके हैं और घर में बुजुर्ग मां ही सहारा हैं. अब वही मां अपने बेटे को हर दिन जिंदगी से लड़ते देख रही है.
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने बिजली विभाग से मदद मांगी. तो उनसे पहले विकलांगता प्रमाण पत्र लाने को कहा गया. उस समय महावीर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा था. इस रवैये ने सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया.
वहीं, फार्म हाउस संचालक सौमित्र दीवान का बयान भी सवालों के घेरे में है. उनका कहना है कि परिवार ने उनसे स्पष्ट रूप से मदद नहीं मांगी, इसलिए उन्होंने मदद नहीं की. इस बयान पर भारती माली ने कड़ा आक्रोश जताते हुए कहा कि ऐसी हालात में मदद मांगी नहीं जाती. बल्कि इंसानियत के नाते समझी जाती है.
2 अप्रैल को इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है. ठेकेदार और फार्म हाउस संचालक का नाम भी शामिल है. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. न कानूनी दबाव बना, न आर्थिक जिम्मेदारी तय हुई. यही वजह है कि अब यह मामला सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का सवाल बन गया है.
आज महावीर उजागर सिर्फ एक मरीज नहीं, बल्कि अपनी मां की आखिरी उम्मीद है. पिता का साया पहले ही उठ चुका है और अब बेटा जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है. अब सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है कि क्या महावीर बच पाएगा..? उसकी मां की आंखों में आज भी सिर्फ एक ही सवाल है और यह सवाल अब सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के सामने खड़ा है.
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