UGC पर अब मोदी सरकार का यू-टर्न!, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार, BJP नेताओं से PCS तक के इस्तीफे, सड़कों पर स्टूडेंट, संत समाज में गुस्सा
Modi government's U-turn on UGC! Supreme Court ready to hear hearing, resignations from BJP leaders to PCS, students on the streets, anger among saints
13 जनवरी 2026 को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में नए नियमों को लागू किया था. ये नियम यूजीसी द्वारा 2012 में जारी समानता नियमों का संशोधन है. जो विवादों में घिर गए हैं. इसका विरोध करने वालों का दावा है कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों का उत्पीड़न हो सकता है. इस नियम के विरोध में यूपी में बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा तक दे दिया. साथ ही बरेली नगर मजिस्ट्रेट ने भी इनके विरोध में इस्तीफा दे दिया. हालांकि सरकार ने इस्तीफे के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया. बढ़ते विरोध को देखते हुए, सरकार भी इन नियमों पर गहन मंथन कर रही है.
यूपी-बिहार में भी जमकर हंगामा हुआ. स्टूडेंट्स और सवर्ण जातियों के लोग सड़कों पर उतरे. यूपी के पीलीभीत में सवर्ण समाज के युवकों ने मुंडन कराया. बिहार में PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर पर कालिख पोती गई.
सोशल मीडिया पर नए नियमों का खुलकर विरोध हो रहा है। X पर #UGCRollBack हैशटैग ट्रेंड कर रहा है. दिल्ली, पटना लखनऊ और इलाहाबाद में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले. यूजीसी के दिल्ली स्थित हेडक्वाटर के बाहर मंगलवार सुबह से सामान्य वर्ग के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. यहां तक कि बीजेपी के नई नेताओं और विधायकों ने भी इसका विरोध किया है. इनमें पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण भी शामिल हैं.
विरोध करने वालों का कहना है कि नियम सिर्फ एससी/एसटी/ओबीसी पर केंद्रित, सामान्य वर्ग के छात्रों का पक्ष नहीं. सामान्य वर्ग को आरोपियों की तरह देखा जा रहा, भेदभाव बढ़ने की संभावना है. Equity कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं. जिससे पक्षपातपूर्ण फैसले का डर भी सता रहा है. साथ ही झूठी शिकायत करने वाले पर एक्शन का प्रावधान नहीं है. ऐसे में उनपर फेक केस की भी संभावना ज्यादा है. इसके उलट जिसके खिलाफ झूठी शिकायत की गई. उसका करियर खराब हो सकता है.
यूजीसी के नियमो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक और याचिका लगाई गई. इसमें नियमों को सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण बताते हुए लागू करने पर रोक लगाने की मांग की गई है. वकील विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि नए नियम मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं.
इससे पहले मृत्युंजय तिवारी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. उन्होंने इस याचिका में यूजीसी के नए रेगुलेशन को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है कि इस रेगुलेशन के प्रावधान मनमाना, भेदभावपूर्ण, संविधान के खिलाफ हैं. यह रेगुलेशन जाति आधारित भेदभाव को, केवल अनुसूचित जाति, जनजाति और OBC के खिलाफ हुए भेदभाव तक सीमित करता है.
अब यूजीसी को लेकर संत-समाज में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है. अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रनंद सरस्वती ने पीएम मोदी से नई गाइडलाइंस बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रनंद सरस्वती ने नई गाइडलाइंस को लेकर कहा, "ये नई नियमावली भेदभाव वाली है और हिन्दू समाज को कई वर्गों में बांटने वाला फैसला है. हमारी समिति को यह नियमावली स्वीकार्य नहीं है. और हम इसका विरोध करते हैं. संविधान ने सभी को समानता का अधिकार दिया है. लेकिन क्या यूजीसी की नई नियमावली इसे पूरा करती है?"
उन्होंने कहा, "ऐसे में राष्ट्र के युवा के मन में भेदभाव की भावना को इस कदर भरा जा रहा है कि आने वाले समय में झूठी शिकायतों को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. ऊंची जाति में जन्म लेना अपराध है. उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने भेदभाव करने वाली नियमावली बनाई है. चाहे वे यूजीसी के अध्यक्ष हों या शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारी, सभी से इस्तीफा लेना चाहिए और हिंदुओं को बांटने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. हमारा देश एक राष्ट्र, एक मन और एक जीवन के नियमों पर चलता है."
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