विधायकों के लिए उजड़ गई 77 परिवारों की दुनिया, बुलडोजर कार्रवाई से 1600 लोग बेघर, ग्रामीणों ने पुलिस पर किया पथराव, गांव में एंट्री पर लगी रोक

Lives of 77 families shattered for the sake of MLAs; 1,600 people rendered homeless by bulldozer action; villagers pelted stones at the police; entry into the village has been barred.

विधायकों के लिए उजड़ गई 77 परिवारों की दुनिया, बुलडोजर कार्रवाई से 1600 लोग बेघर, ग्रामीणों ने पुलिस पर किया पथराव, गांव में एंट्री पर लगी रोक

रायपुर : रायपुर एयरपोर्ट के पास स्थित नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. गांव खाली करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था. समय पूरा होने के बाद प्रशासन भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ मौके पर पहुंचा. सुबह से ही गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. ग्रामीण विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी. जिस गांव में करीब 1600 लोगों की आबादी रहती है. वहां अब 85 मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
14 बुलडोजर, 4000 जवान
प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए तगड़े इंतजाम किए. मौके पर करीब 4000 पुलिस जवान तैनात किए गए. इनके अलावा 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और करीब 300 टीम प्रहरी भी कार्रवाई में लगाए गए. गांव के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया गया. बड़ी तादाद में राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग की.
विधायक निवास बनाने खाली हो रही जमीन
प्रशासन का कहना है कि नकटी गांव की जिस जमीन पर कार्रवाई हो रही है. वहां प्रस्तावित विधायक निवास परियोजना को शासन की मंजूरी मिल चुकी है. इसी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है. 
पुश्तैनी जमीन पर चला बुलडोजर?
ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वजों के समय से उनके कब्जे में है और वे सालों से यहां रह रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी बात सुने बिना प्रशासन जबरन कब्जा कर रहा है. कई परिवारों ने कार्रवाई रोकने की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. महिलाओं और बुजुर्गों ने भी मौके पर विरोध दर्ज कराया.
पीएम आवास देकर चला रहे बुलडोजर!
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मकानों को आज तोड़ा जा रहा है. उनमें से कई घर कुछ साल पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे. कई लोगों ने बैंक से लोन लेकर अपने घर तैयार किए थे और अब उन्हीं घरों को तोड़ा जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार ने उन्हें पक्का घर बनाने के लिए सहायता दी. वहीं दूसरी तरफ अब उन्हीं घरों को उजाड़ा जा रहा है. इस विरोधाभास को लेकर गांव में भारी नाराजगी है.
बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात
इधर 3 दिन पहले नकटी के प्रभावितों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की थी. सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि बारिश के मौसम में किसी के मकान नहीं तोड़े जाएंगे. बृजमोहन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना आवासों को नहीं तोड़ा जाएगा और जरूरत पड़ी तो वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी चर्चा करेंगे.
विकास बनाम विस्थापन... आगे क्या होगा?
नकटी गांव की कार्रवाई ने विकास परियोजनाओं और विस्थापन के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है. एक तरफ सरकार विधायक निवास बनाना  चाहती है. तो दूसरी तरफ सैकड़ों परिवार अपने आशियाने बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई जारी है और पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
कार्रवाई के दौरान मौके से ऐसी तस्वीरें सामने आईं जहां लोग घरों के सामने सामान निकाल कर बैठे दिखे. तो टूटे मकानों के मलबे पर एक बुजुर्ग मासूम को गोद में लेकर बेबस नजर आए. गांव में लोगों की एंट्री बैन कर दी गई है. किसी को अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है. लोगों के सामानों को मवेशी ले जाने वाले वाहनों में ठूंसकर बाहर लाया जा रहा है. 2 दिन अभी ये कार्रवाई चलेगी.
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