ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई : कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला गिरफ्तार, इंदिरा आवास योजना में 79 लाख रुपए गबन का बड़ा खुलासा, जांच जारी

Major action by ACB-EOW: Kiosk operator Gaurav Shukla arrested, major revelation of embezzlement of Rs 79 lakh in Indira Awas Yojana, investigation continues.

ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई : कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला गिरफ्तार, इंदिरा आवास योजना में 79 लाख रुपए गबन का बड़ा खुलासा, जांच जारी

कोरबा : छत्तीसगढ़ में गरीबों के आवास के लिए जारी राशि में बड़े गबन का मामला सामने आया है. एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने इंदिरा आवास योजना के तहत 79 लाख रुपये के गबन के आरोपी कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला उम्र 47 साल निवासी नंदबाग रुमगरा जिला कोरबा को गिरफ्तार किया है. आरोपी को 16 अप्रैल को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया. जहां विशेष न्यायाधीश न्यायालय कोरबा ने उसे 21 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. एसीबी-ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक 20/2018 में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 421, 409, 120 (बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 (सी) और 13 (1) (ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी गौरव शुक्ला, उम्र 47 साल कोरबा जिले के नंदबाग रूमगरा क्षेत्र का निवासी है और बैंक ऑफ इंडिया की कोरबा शाखा में कियोस्क संचालक के रूप में कार्यरत था. उसने इंदिरा आवास योजना के तहत वर्ष 2010-11 में कई ग्रामीण हितग्राहियों के खातों में आई रकम को वर्ष 2017 में अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया. आरोपी ने ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले लोगों के खातों का दुरुपयोग किया. जिन खातों में रकम आई थी, उनमें से ज्यादातर खाते निष्क्रिय (डॉर्मेंट) थे. आरोपी ने बैंक कर्मचारियों की स्टाफ आईडी का गलत इस्तेमाल कर इन खातों को सक्रिय किया और फिर हितग्राहियों के आधार नंबर हटाकर अपने और अपने परिवार के सदस्यों के आधार नंबर लिंक कर दिया.
इसके बाद आरोपी ने आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AEPS) के जरिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कर रकम को सीधे अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया. इस प्रक्रिया में उसने अपने पिता, माता, पत्नी और बेटे के आधार नंबरों का भी इस्तेमाल किया. जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी ने बैंकिंग सॉफ्टवेयर ‘फिनेकल’ की तकनीकी खामियों का फायदा उठाया. इसमें बिना आधार सत्यापन के ट्रांजेक्शन संभव होना और ऑटो लॉगआउट सिस्टम का अभाव शामिल था. आरोपी ने इन कमजोरियों का उपयोग करते हुए लंबे समय तक बंद पड़े खातों को सक्रिय कर उनमें से रकम निकाल ली.
एसीबी-ईओडब्ल्यू के मुताबिक आरोपी ने 10 अलग-अलग स्टाफ यूजर आईडी का उपयोग करते हुए कुल 620 प्रविष्टियां कीं. इनमें से ज्यादातर प्रविष्टियां बिना किसी भौतिक आधार दस्तावेज के सत्यापन के दर्ज की गई थीं. कुछ एंट्री कियोस्क ऑपरेटर आईडी के जरिए भी की गईं. इस पूरे मामले में आरोपी ने सरकारी योजना के तहत गरीबों के लिए आवंटित राशि में हेरफेर कर विश्वासघात किया है. जांच एजेंसी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गबन में अन्य लोगों की भी संलिप्तता है. एसीबी-ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं.
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