धर्मांतरण को लेकर विवाद के बीच हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी आवास में प्रार्थना सभा के लिए अनुमति की जरूरत नहीं, पुलिस को प्रार्थना सभा रोकने का हक नहीं

Amid the controversy over religious conversions, the High Court issued a significant ruling: No permission is required for prayer meetings in private residences; the police have no right to stop them.

 धर्मांतरण को लेकर विवाद के बीच हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी आवास में प्रार्थना सभा के लिए अनुमति की जरूरत नहीं, पुलिस को प्रार्थना सभा रोकने का हक नहीं

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर विवाद के बीच अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए साफ किया है कि कोई भी व्यक्ति अपने निजी मकान में शांतिपूर्ण तरीके से प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए पुलिस या किसी भी प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेने के लिए मजबूर नहीं है. अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ प्रार्थना सभा होने मात्र से पुलिस हस्तक्षेप उचित नहीं है. हाईकोर्ट ने साफ किया कि प्रार्थना सभा के लिए पहले से परमिशन लेना जरूरी नहीं है.
सिंगल बेंच ने इस आदेश में पुलिस की ओर से जारी नोटिस को रद्द कर दिया, जिसमें थाना प्रभारी याचिकाकर्ताओं को प्रार्थना सभा रोकने के लिए बार-बार नोटिस दे रहे थे. हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाए. यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम गोधना से जुड़ा है.
दरअसल, ग्राम गोधना में याचिकाकर्ताओं ने अपने आवास की पहली मंजिल पर हॉल बनाया है. इसके बाद से 2016 से यहां ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है. इन सभाओं में किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या शांति भंग नहीं होती है.
आरोप था कि किसी भी अवैध गतिविधि या शांति भंग की स्थिति न होने के बावजूद थाना प्रभारी नवागढ़ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर इन सभाओं पर रोक लगाने की कोशिश की और ग्राम पंचायत गोधन द्वारा पहले दिया गया ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ भी दबाव में वापस करा लिया गया.
राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ताओं पर आपराधिक मामला दर्ज हैं, वे जेल जा चुके हैं और उन्होंने प्रार्थना सभा के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति नहीं ली. इसलिए पुलिस ने नोटिस जारी किए. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कहा कि निजी आवास में 2016 से चल रही प्रार्थना सभा पर कोई वैधानिक प्रतिबंध नहीं है. और सिर्फ धार्मिक सभा के आयोजन के आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती है.
हाईकोर्ट ने साफ किया कि यदि भविष्य में प्रार्थना सभा के दौरान शोर-शराबा, कानून-व्यवस्था भंग होने या किसी अन्य कानूनी उल्लंघन की स्थिति बनती है. तो संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं. लेकिन सिर्फ शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा के कारण नागरिक अधिकारों में दखल देना सही नहीं है. अदालत ने थाना नवागढ़ पुलिस को निर्देश दिया कि वे जांच या अन्य किसी भी बहाने से याचिकाकर्ताओं को परेशान न करें और 18 अक्टूबर 2025, 22 नवंबर 2025 और 1 फरवरी 2026 को जारी सभी नोटिसों को निरस्त कर दिया.
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