देश में पेट्रोल का खेल खत्म!, अब 100% इथेनॉल ईंधन से चलेगी गाड़ियां, सरकार ने दी मंजूरी, नितिन गडकरी ने किया एलान, E-100 फ्यूल वरदान या फिर श्राप?
The era of petrol is ending in the country! Vehicles will now run on 100% ethanol fuel; the government has granted approval, and Nitin Gadkari has made the announcement. Is E-100 fuel a boon or a curse?
नई दिल्ली : केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन के व्यावसायिक उपयोग को आधिकारिक और कानूनी रूप से मंजूरी दे दी है. नागपुर में एनडीए सरकार के कार्यकाल से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान इस ऐतिहासिक फैसले की घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि बीते दिन ही उन्होंने इस नीतिगत फाइल पर हस्ताक्षर कर नियमों को अंतिम रूप दे दिया है.
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस सफर के शुरुआती संघर्षों को साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार देश में पेट्रोल के विकल्प के रूप में इथेनॉल को अपनाने का विचार रखा था. तब उद्योग जगत और कई करीबियों ने उनके इस विजन का मजाक उड़ाया था. लोग इस योजना की व्यवहारिकता पर संशय जताते हुए हंसते थे. लेकिन आज यह सपना एक जमीनी हकीकत बन चुका है. यह नीति न केवल प्रदूषण को कम करेगी. बल्कि देश के भारी-भरकम तेल आयात बिल में भी बड़ी कटौती करने में मददगार साबित होगी.
E100 एक ऐसा फ्यूल है. जिसमें लगभग 100% इथेनॉल होता है और इसमें पेट्रोल की मात्रा नहीं होती. इथेनॉल एक बायोफ्यूल है. जिसे गन्ना, मक्का, खराब खाद्यान्न और कृषि अपशिष्ट (Agricultural Waste) जैसी चीजों से बनाया जाता है. अभी भारत में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल शुरू हो चुका है. जिसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है. वहीं E100 फ्यूल पूरी तरह इथेनॉल आधारित ईंधन है.
कौन सी गाड़ियां E100 पर चल सकते हैं?
E100 फ्यूल के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की जरूरत होती है. इथेनॉल की प्रकृति पेट्रोल से अलग होती है. इसलिए इंजन, फ्यूल लाइन, इंजेक्टर और फ्यूल पंप में बदलाव करने पड़ते हैं. Maruti Suzuki ने अपनी WagonR Flex Fuel का प्रोटोटाइप पेश किया है. जो E100 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंड पर चल सकती है. इसके अलावा Toyota, MG, Hyundai और Suzuki भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं. वहीं टू-व्हीलर सेगमेंट में Hero MotoCorp ने Splendor और HF Deluxe के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए हैं.
E100 फ्यूल के फायदे
अगर E100 का इस्तेमाल बढ़ता है, तो भारत को कम कच्चा तेल आयात करना पड़ेगा.
इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय बढ़ सकती है.
इथेनॉल पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा साफ तरीके से जलता है. जिससे कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है.
E100 फ्यूल के नुकसान
इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले में कम ऊर्जा होती है. इसलिए E100 पर चलने वाली गाड़ियां समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा फ्यूल खपत कर सकती हैं.
मौजूदा पेट्रोल गाड़ियों में सीधे E100 का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक जरुरी है.
देशभर के पेट्रोल पंपों पर E100 फ्यूल की स्टोरेज और सप्लाई के लिए नई सुविधाएं विकसित करनी होंगी.
आगे क्या हैं चुनौतियां?
E100 फ्यूल को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है. लेकिन इसे बड़े स्तर पर अपनाने में अभी कुछ चुनौतियां हैं. सबसे बड़ी चुनौती पूरे देश में इथेनॉल फ्यूल स्टेशनों का नेटवर्क तैयार करना है. इसके अलावा ऑटो कंपनियों को बड़ी तादाद में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च करनी होगी. साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के दौरान खाद्य सुरक्षा और कृषि जरूरतों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े
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