महिला आरक्षण बिल नहीं परिसीमन बिल पास कराना चाह रही भाजपा, गरियाबंद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने खुलेआम बीजेपी की खोल दी पोल

The BJP is trying to pass the delimitation bill, not the women's reservation bill. Gariaband Congress district president Sukhchand Besra openly exposed the BJP.

महिला आरक्षण बिल नहीं परिसीमन बिल पास कराना चाह रही भाजपा, गरियाबंद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने खुलेआम बीजेपी की खोल दी पोल

गरियाबंद : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर आज जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने जिला स्तरीय पत्रकारवार्ता को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश की महिलाओं के साथ भ्रम फैलाने और अन्याय करने का आरोप लगाया.
कांग्रेस कमेटी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कांग्रेस पहले भी महिला आरक्षण के समर्थन में थी और आज भी पूरी मजबूती से इसके पक्ष में खड़ी है. पार्टी ने साफ किया कि महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून भी बन चुका है.
16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत 131वां संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण से जुड़ा नहीं था. पार्टी के अनुसार, यह विधेयक परिसीमन और सीटों के पुनर्गठन से संबंधित था. जिसे महिला आरक्षण के नाम पर पेश कर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया.
भाजपा का असली मकसद महिला आरक्षण नहीं परिसीमन
जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने कहा कि भाजपा द्वारा यह झूठ फैलाया जा रहा है कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया. जबकि सच तो यह है कि भाजपा कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव में इसका फायदा उठाना चाहती है. उन्होंने प्रेस वार्ता में निम्नलिखित प्रमुख बातें रखीं. भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल पास करवाना चाहती थी.
महिला आरक्षण बिल के बहाने परिसीमन करना चाहती है भाजपा
संसद में जो विधेयक गिरा उसमें लोकसभा परिसीमन की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था. भाजपा 2011 की पुरानी जनगणना को आधार मानकर परिसीमन करना चाहती है. जबकि 2026 27 की जनगणना शुरु हो चुकी है. सरकार महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के बजाय परिसीमन का इंतजार क्यों कर रही है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है वह वास्तव में 2036 से प्रभावी होगा जबकि संशोधन से इसे तुरंत लागू किया जा सकता था.
कांग्रेस ही महिला आरक्षण की सच्ची समर्थक
सुखचंद बेसरा ने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को मिल रहा आरक्षण कांग्रेस की ही देन है. राजीव गांधी ने 1989 में पहली बार पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का विधेयक पेश किया था. अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के प्रयासों से यह कानून बना. जिससे आज देशभर में 15 लाख से ज्यादा निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं. डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने भी 2010 में राज्यसभा से महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया था. जिला अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा का साजिश नाकाम होने के बाद अब वह पूरे देश में भ्रम फैला रही है. जिसे कांग्रेस जनता के बीच उजागर करेगी. इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर बहस तेज हो गई है.
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