पढ़ाई के बीच गिरी आकाशीय बिजली, चार छात्राएं घायल, दो के कपड़े झुलसे, अफरा-तफरी का माहौल, सरकारी स्कूलों में सुरक्षा कागजों तक सीमित?

Lightning struck while classes were in session, injuring four female students and scorching the clothes of two; chaos ensued—is safety in government schools limited merely to paperwork?

पढ़ाई के बीच गिरी आकाशीय बिजली, चार छात्राएं घायल, दो के कपड़े झुलसे, अफरा-तफरी का माहौल, सरकारी स्कूलों में सुरक्षा कागजों तक सीमित?

सूरजपुर : विकासखंड प्रतापपुर के माध्यमिक शाला माझापारा बैकोना में शुक्रवार उस समय अफरा-तफरी मच गई. जब कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे बच्चों के बीच अचानक आकाशीय बिजली का असर हुआ और चार छात्राएं इसकी चपेट में आकर घायल हो गईं. हादसे के बाद पूरे विद्यालय में चीख-पुकार मच गई और शिक्षक फौरन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गए.
मिली जानकारी के मुताबिक  प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बैकोना मझपारा स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में 25 जून, गुरुवार को दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच छात्राएं कक्षा के भीतर बैठकर पढ़ाई कर रही थीं. अचानक मौसम खराब होने और तेज गर्जना के साथ हुई. आकाशीय बिजली की घटना में कक्षा में अध्ययनरत चार छात्राएं इसकी चपेट में आ गईं. घटना के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
हादसे में मनशीला (13 साल), नेहा  (14 साल), रीना पैकरा (14 साल) और राधिका (13 साल) घायल हो गईं. इनमें नेहा और राधिका के कपड़े तक झुलस गए. जिससे हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. खबर मिलते ही डायल-112 एंबुलेंस के जरिए सभी घायल छात्राओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर पहुंचाया गया.
बीएमओ डॉ. अजीत दीवान के निर्देशन में फौरन इलाज शुरू किया गया. ड्यूटी पर मौजूद डॉ. आफताब खान, डॉ. विकास गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम ने त्वरित इलाज किया. ब्लॉक टीकाकरण नोडल अधिकारी राजेश वर्मा, विनोद रवि, प्रतिमा, अपर्णा खम्हरिया, रविशंकर, अनुमाला और नंदकिशोर भी इलाज व्यवस्था में सक्रिय रहे. चिकित्सकों के मुताबिक सभी छात्राओं की हालत अब सामान्य है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है.
इस हादसे ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बारिश और आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान विद्यालयों में सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं? क्या स्कूल परिसरों में बिजली गिरने से बचाव के लिए आवश्यक लाइटनिंग अरेस्टर जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं? अगर नहीं, तो आखिर मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
हादसे के बाद अभिभावकों में भारी चिंता और आक्रोश देखा गया. उनका कहना है कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए. अगर कक्षा के भीतर भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है.
हालांकि स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया. लेकिन यह हादसा प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए एक चेतावनी भी है. विशेषज्ञों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में आकाशीय बिजली की घटनाएं ज्यादा होती हैं. वहां स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
अब सवाल यह है कि क्या इस घटना से सबक लेकर शिक्षा विभाग और सरकार स्कूलों में आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था करेगी. या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा? फिलहाल पूरे इलाके की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और सुरक्षा संबंधी फैसलों पर टिकी हुई हैं.
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