छत्तीसगढ़ में महिला पंचों की जगह सात पंच पतियों को दिला दी गई शपथ, कड़ी आलोचना के शिकार हो रहे पंचायत सचिव, होगी कार्यवाही?

In Chhattisgarh, instead of women panchs, seven panch patis were sworn in, panchayat secretaries are facing severe criticism, will any action be taken?

छत्तीसगढ़ में महिला पंचों की जगह सात पंच पतियों को दिला दी गई शपथ, कड़ी आलोचना के शिकार हो रहे पंचायत सचिव, होगी कार्यवाही?

कबीरधाम : कबीरधाम जिले में पंडरिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत परसवारा में सचिव का अजब मामला सामने आया है. जहां नवनिर्वाचित सरपंच और पंच के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में 6 महिला पंचों के स्थान पर उनके पतियों को शपथ दिलाई गई. यह घटना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी चूक को दर्शाती है. क्योंकि जिन महिला पंचों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चयनित किया गया था. वे अपने अधिकारों से वंचित रह गईं और उनके स्थान पर उनके पति शपथ ग्रहण करने के लिए मौजूद थे.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत परसवारा में रविवार को शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में नवनिर्वाचित सरपंच और पंचों को शपथ दिलाई जानी थी. लेकिन सचिव ने महिला पंचों को मंच पर बुलाया ही नहीं गया. उनकी जगह उनके पतियों को शपथ दिलवा दी गई. यह घटना महिला पंचों और उनके समर्थकों के लिए बेहद निराशाजनक और शर्मनाक रही. फिलहाल मामले में सियासी पारा गरमाया हुआ दिखाई दे रहा है.  शपथ ग्रहण समारोह का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
महिला पंचों ने की घटना की कड़ी आलोचना
इस घटना से न सिर्फ महिला सशक्तिकरण की दिशा में उलटफेर हो रहा है. बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और पंचायत व्यवस्था की गंभीर अव्यवस्था को भी उजागर करता है. महिला पंचों का यह हक था कि वे खुद शपथ लें और अपने पंचायत के विकास में सक्रिय भागीदार बनें. लेकिन उन्हें यह मौका नहीं दिया गया. स्थानीय लोगों और महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है. महिला पंचों का कहना है कि यह न सिर्फ उनके अधिकारों का उल्लंघन है. बल्कि इससे समाज में महिला की भूमिका को भी कमजोर करने की कोशिश की गई है. इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र की साख को ठेस पहुंचाती है और महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़चन डालती है.
क्या महिला पंचों को उनका हक मिलेगा?
स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में जल्द ही उचित कार्रवाई की बात कही है. लेकिन अभी तक सचिव या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. अब सवाल यह उठ रहा कि इस लापरवाही को लेकर क्या कार्रवाई की जाएगी. क्या महिला पंचों को उनका हक मिलेगा? इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की जरुरत है. ताकि इस तरह की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके.
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