किसानों के लिए बड़ी जानकारी, धान खरीदी की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, एक से ज्यादा खातेदार हैं तो सभी का एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य, तभी मुखिया बेच पाएंगे धान
Important information for farmers: A major change in the paddy procurement process—if there are multiple account holders, AgriStack registration for all of them is mandatory; only then can the head of the household sell the paddy.
रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब राज्य के किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने से पहले केंद्र सरकार के एग्री-स्टैक (Agri Stack) पोर्टल पर पंजीयन कराना जरुरी होगा. नई व्यवस्था के तहत किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. जिससे धान खरीदी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सके.
पिछले वर्षों में किसानों को राज्य के एकीकृत किसान पोर्टल पर अलग से पंजीयन कराना पड़ता था. लेकिन इस बार इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है. अब एग्री-स्टैक पंजीयन को ही धान खरीदी की प्रक्रिया से जोड़ा गया है. राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने इस बारे में सभी कलेक्टरों, खाद्य विभाग के अधिकारियों और अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक को दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
31 अक्टूबर तक कराना होगा एग्री-स्टैक पंजीयन
सरकार ने किसानों को एग्री-स्टैक पोर्टल www.cgfr.agristack.gov.in पर पंजीयन कराने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है. यह पंजीयन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के जरिए पूरा कराया जाएगा. इसका मकसद राज्य के किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और उनकी कृषि भूमि से जुड़ी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना है. जिन किसानों को इस खरीफ सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचना है. उनके लिए समय सीमा के भीतर पंजीयन कराना जरूरी होगा. किसानों को सलाह है कि आख़री तारीख का इंतजार न करें और समय रहते अपना पंजीयन पूरा करा लें.
सोसाइटी में भी मिलेगी पंजीयन की सुविधा
नई व्यवस्था में किसानों को राहत देते हुए सहकारी समितियों (सोसाइटी) के जरिए भी एग्री-स्टैक पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. प्रत्येक समिति के ऑपरेटर को लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा. इससे किसान अपनी समिति में जाकर पंजीयन से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे. इस व्यवस्था से उन किसानों को सुविधा मिलने की उम्मीद है. जिन्हें ऑनलाइन पंजीयन करने में परेशानी होती है. किसान अपनी नजदीकी सहकारी समिति से पंजीयन प्रक्रिया की जानकारी भी ले सकते हैं.
डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज रकबा ही होगा मान्य
सरकार ने इस बार धान खरीदी के लिए रकबे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है. धान बेचने वाले किसानों के लिए एग्री-स्टैक पोर्टल पर दर्ज डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey) में दर्ज रकबा ही मान्य होगा. इसका मतलब है कि किसान जितने रकबे में धान की खेती कर रहा है. उसकी पात्रता और खरीदी इसी दर्ज रकबे के आधार पर तय की जाएगी. इसलिए किसानों को अपने खेत और फसल से जुड़ी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में सही दर्ज होने की जांच कर लेनी चाहिए.
इन किसानों को पहले कराना होगा पंजीयन
जिन किसानों ने पिछले सीजन में धान बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था या जिनके पास एग्री-स्टैक फार्मर आईडी (Farmer ID) और किसान कोड उपलब्ध नहीं है. उन्हें सबसे पहले एग्री-स्टैक में पंजीयन कराना होगा. पंजीयन के बाद संबंधित सहकारी समिति या उपार्जन केंद्र पर जाकर जमीन के खसरा विवरण, बैंक खाते की जानकारी और नॉमिनी का विवरण दर्ज कराना होगा. इसलिए किसानों को अपने जमीन और बैंक खाते से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की जानकारी तैयार रखनी चाहिए, ताकि पंजीयन के समय परेशानी न हो.
डिजिटल व्यवस्था से धान खरीदी होगी पारदर्शी
सरकार का मानना है कि एग्री-स्टैक आधारित नई व्यवस्था से धान खरीदी में पारदर्शिता बढ़ेगी. किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से फर्जी पंजीयन और एक ही किसान के दोहराव वाले रिकॉर्ड को रोकने में मदद मिलेगी. साथ ही किसान की भूमि, फसल और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी एक डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध होने से खरीदी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा. एग्री-स्टैक के माध्यम से किसानों की डिजिटल पहचान को कृषि से जुड़ी सरकारी सेवाओं के साथ जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को इससे जोड़ना डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
किसानों के लिए जरूरी सलाह
समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसान 31 अक्टूबर 2026 से पहले एग्री-स्टैक पंजीयन जरूर करा लें. साथ ही यह भी जांच लें कि डिजिटल क्रॉप सर्वे में उनकी धान फसल का रकबा सही दर्ज है. इससे खरीदी के समय अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकेगा.
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पंजीयन के लिए बी-1/खतौनी, ऋण पुस्तिका, आधार कार्ड और आधार लिंक मोबाइल नंबर जरुरी है. पंजीयन में किसी तरह की परेशानी या मदद के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी अथवा CSC केंद्र से संपर्क कर सकते हैं.



