आज भी अंधेरे में 5 पंचायतें-48 गांव, अब PM मोदी को खून से लेटर लिखेंगे आदिवासी, डस्टबीन में अर्जी फेंक देते हैं अधिकारी, हम लालटेन के सहारे कब तक रहेंगे?
Even today, 5 Panchayats and 48 villages are in darkness. Now, tribals will write letters to PM Modi in blood. Officials throw applications in the dustbin. How long will we depend on lanterns?
गरियाबंद : आजादी के 79 साल बाद भी छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुदूर वनांचल राजापड़ाव क्षेत्र की हजारों आदिवासी आबादी बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. सालों से चली आ रही समस्याओं के समाधान नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है.
रविवार को ग्राम गोना में किसान संघर्ष समिति एवं जय अंबेडकरवादी युवा संगठन राजापड़ाव क्षेत्र की विशाल बैठक आयोजित की गई. बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि 10 जून को ग्राम अड़गडी में हजारों ग्रामीण अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर क्षेत्र में बिजली की व्यवस्था कराने की मांग करेंगे.
79 साल बाद भी अंधेरे में जीवन
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित राजापड़ाव क्षेत्र में कुल 8 ग्राम पंचायत और 48 गांव, पारा एवं टोले शामिल हैं. क्षेत्रवासियों का कहना है कि आजादी के इतने सालों बाद भी यहां विकास की रोशनी नहीं पहुंच पाई है.
मिली जानकारी के मुताबिक सिर्फ 3 पंचायतों के मुख्य गांवों में आंशिक रूप से बिजली पहुंची है. जबकि ज्यादातर पारा-टोले अब भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं. 5 पंचायतों में आज तक बिजली नहीं पहुंच सकी है.
NOC बना सबसे बड़ा रोड़ा
ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी बिजली विस्तार की मांग की जाती है. तब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है.
क्षेत्रवासियों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा उन्हें बताया गया कि इस समस्या का समाधान सिर्फ केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री स्तर पर ही संभव है. इसी वजह से अब उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपनी आवाज पहुंचाने का फैसला लिया है.
10 जून को होगा ऐतिहासिक प्रदर्शन
ग्रामीणों के मुताबिक 10 जून को ग्राम अड़गडी में आयोजित महा ग्रामसभा में हजारों लोग शामिल होंगे. इसी दौरान प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर बिजली उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी.
आयोजकों का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक मकसद से नहीं बल्कि अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई के लिए उठाया जा रहा है.
ग्राम सभा शिलालेख भी होगा स्थापित
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि ग्राम सभा के अधिकारों और पेसा कानून के महत्व को दर्शाने के लिए राजापड़ाव क्षेत्र में ग्राम सभा शिलालेख स्थापित किया जाएगा. इसके लिए हर गांव से 20 रुपये का सहयोग इकठ्ठा किया जा रहा है.
SDM को सौंपा जाएगा 17 सूत्रीय मांगपत्र
क्षेत्रवासियों ने बताया कि 29 मई को आयोजित सुशासन तिहार में उन्होंने सरकार के सामने 17 बुनियादी मांगें रखी थीं. इन मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग को लेकर 8 जून को एसडीएम मैनपुर को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
बैठक के दौरान नारों से गूंज उठा गोना गांव
“जल-जंगल-जमीन हमारा है”, “बिजली-पानी अधिकार हमारा है” और “79 साल का अंधेरा अब नहीं सहेंगे. लड़ेंगे-जीतेंगे” जैसे नारों से पूरा गांव गूंज उठा.
आयोजकों ने क्या कहा?
जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से आवेदन, धरना, प्रदर्शन, पदयात्रा और जनसंवाद के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है.
उन्होंने कहा, “जब अधिकारी कहते हैं कि यह काम केवल प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं. तो अब हम सीधे प्रधानमंत्री से ही गुहार लगाएंगे. 10 जून को पूरा देश आदिवासियों का दर्द देखेगा.”
राजापड़ाव क्षेत्र का दर्द एक नजर में
कुल पंचायतें – 8
कुल गांव, पारा और टोले – 48
बिजली वाले पंचायत – 3 (आंशिक)
अंधेरे में पंचायत – 5
मुख्य समस्या – NTCA की NOC
अगला कदम – 10 जून को खून से PM को चिट्ठी
आयोजन स्थल – ग्राम अड़गडी
8 जून – SDM मैनपुर को 17 सूत्रीय ज्ञापन
राजापड़ाव क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का अधिकार चाहते हैं. 10 जून को होने वाला यह अनोखा विरोध प्रदर्शन अब पूरे प्रदेश की निगाहों का केंद्र बन गया है.
यह पहली बार नहीं, सालों से उपेक्षित है राजापड़ाव क्षेत्र
राजापड़ाव क्षेत्र की जनता आज जिस बिजली संकट को लेकर खून से प्रधानमंत्री को पत्र लिखने की तैयारी कर रही है. उसके पीछे वर्षों की नाराजगी और उपेक्षा की कहानी छिपी हुई है.
कुछ महीने पहले क्षेत्र में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए मंच पर रखी गई कुर्सियां खाली रह गई थीं। इसके बाद ग्रामीणों ने जमीन पर बैठकर अपनी समस्याओं पर चर्चा की और समाधान तलाशने का प्रयास किया। उस बैठक में भी सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं और वन अधिकारों के मुद्दे प्रमुखता से उठे थे.
मोबाइल टावर बना लेकिन नेटवर्क नहीं
क्षेत्र के लोगों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के लिए लगाए गए मोबाइल टावर को लेकर भी ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है. ग्रामीणों के मुताबिक टावर स्थापित होने के बावजूद महीनों तक उसे चालू नहीं किया गया. इससे ऑनलाइन शिक्षा, सरकारी योजनाओं की जानकारी, बैंकिंग सेवाएं और आपातकालीन संपर्क जैसी सुविधाएं प्रभावित होती रहीं. लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर केवल घोषणाएं हुईं, लेकिन जमीन पर स्थिति नहीं बदली.
पुल निर्माण रुका तो हजारों ग्रामीण उतरे सड़क पर
राजापड़ाव क्षेत्र में अधोसंरचना की बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुल निर्माण कार्य बंद होने के विरोध में करीब एक हजार ग्रामीणों को राष्ट्रीय राजमार्ग 130C पर चक्का जाम करना पड़ा था. ग्रामीणों ने पूरे दिन प्रदर्शन कर प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की थी। उस समय भी लोगों ने चेतावनी दी थी कि अगर बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन और तेज होगा.
अब बिजली के लिए खून से चिट्ठी
ग्रामीणों का कहना है कि जनसंवाद, धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन, चक्का जाम और प्रशासनिक बैठकों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ. यही वजह है कि अब हजारों आदिवासी 10 जून को खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा सीधे देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं.
क्षेत्रवासियों का मानना है कि अगर 79 साल बाद भी बिजली, सड़क, मोबाइल नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी मूलभूत आवश्यकताएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं. तो यह सिर्फ विकास का नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता का भी सवाल है.
उदंती सीतानदी, टाइगर रिज़र्व क्षेत्र बना मुख्य कारणों की वजह :उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व (Udanti-Sitanadi Tiger Reserve) छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित एक प्रमुख बाघ अभयारण्य है. 1842.54 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह रिज़र्व अपने अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र, लुप्तप्राय वन्य भैंसों (Wild Buffalo) के संरक्षण और समृद्ध जैव विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है.
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