राहुल गांधी पर बयान को लेकर बढ़ा विवाद, कांग्रेस का हल्ला बोल, थाने का पांच घंटे तक घेराव, भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Controversy escalates over Rahul Gandhi's remarks, Congress attacks, police station siege for five hours, demands action against BJP spokesperson

राहुल गांधी पर बयान को लेकर बढ़ा विवाद, कांग्रेस का हल्ला बोल, थाने का पांच घंटे तक घेराव, भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग

रायपुर : प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार को भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सिविल लाइन थाना परिसर को रणभूमि बना दिया। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सैकड़ों कांग्रेसियों ने थाने का घेराव कर जोरदार नारेबाजी की. प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गिरीश दुबे ने किया.
इस मौके पर विकास उपाध्याय ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को गोली मारने जैसी आपत्तिजनक बात कहने वाले केरल भाजपा प्रवक्ता पिंटू अमित महादेव के खिलाफ 29 सितंबर को थाने में आवेदन देने के बावजूद अब तक एफआईआर नहीं की गई है. यह खुला अन्याय और भाजपा का दोहरा चरित्र है.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब तो सिविल लाइन थाने का नाम बदलकर ‘एकात्म परिसर थाना’ रख देना चाहिए। क्योंकि पुलिस विभाग भाजपा की कठपुतली बन चुका है. उपाध्याय ने कहा कि फौरन एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो कांग्रेस अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और पुलिस विभाग के खिलाफ भी कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार से आते हैं जिनके पिताजी राजीव गांधी और दादी इंदिरा गांधी ने देश के लिए अपनी शहादत दी. फिर भी वे निडर होकर देश की आवाज उठा रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता का बयान निंदनीय और षड्यंत्रपूर्ण है. क्या राहुल गांधी की हत्या की साजिश रची जा रही है.
विकास उपाध्याय ने दी चेतावनी कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता राहुल गांधी जी की ढाल बनकर खड़ा है. अब भाजपा तय कर ले. कितनों को गोली मारना है. क्योंकि गांधी की विचारधारा को गोली से नहीं मिटाया जा सकता.
विकास उपाध्याय ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सांसद महुआ मोईत्रा द्वारा देश के गृहमंत्री अमित शाह को लेकर बयान दिया गया था और माना थाने में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा एफआईआर कराई गई है. जबकि राहुल गांधी के ऊपर ऐसे ही बयान दिये जाने को लेकर असम, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, गुजरात सहित कई प्रदेश में एफआईआर दर्ज किये गये हैं. लेकिन भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता के ऊपर मामला दर्ज नहीं किया जा रहा है. अब क्या एक प्रदेश में दो कानून चलेगा? पुलिस प्रशान भारतीय जनता पार्टी की कठपुतली बन चुकी है.
गिरीश दुबे ने कहा कि भाजपा सरकार डंडे के दम पर प्रदेश चला रही है. नेता प्रतिपक्ष पर गोली चलाने की बात करने वाले पर कार्यवाही न होना शर्मनाक है. यह प्रदेश किस दिशा में जा रहा है?
इस प्रदर्शन में गिरीश दुबे, प्रमोद दुबे, पंकज शर्मा, प्रमोद चौबे, कन्हैया अग्रवाल, श्रीकुमार मेनन, सूर्यमणि मिश्रा, दीपा बग्गा, मुन्ना मिश्रा, अन्नूराम साहू, संदीप तिवारी, विकास अग्रवाल, मुमताज खान, दिलीप चौहान, योगेश दीक्षित, प्रकाश जगत, अभय ठाकुर, बंशी कन्नौजे, अमिताभ घोष, राजू सोनी, भावेश बघेल समेत भारी तादाद में कांग्रेसजन मौजूद रहे.
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गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन पर NSUI का हमला, कुलपति हटाने की मांग, उग्र आंदोलन की चेतावनी

बिलासपुर : गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों और छात्रों के साथ कथित अन्याय को लेकर राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने मोर्चा खोल दिया. संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष लक्की मिश्रा, जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह, विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष सार्थक मिश्रा, छात्र नेता सुदीप शास्त्री और आदेश यादव ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर कुलपति आलोक चक्रवाल को फौरन पद से हटाने की मांग उठाई.
NSUI नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन भ्रष्टाचार, पक्षपात और मनमानी का गढ़ बन गया है. छात्रों की समस्याओं को सुलझाने की बजाय उनके अधिकारों को कुचला जा रहा है.
प्रेसवार्ता में लक्की मिश्रा ने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के छात्र नेता सुदीप शास्त्री का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और करेक्टर सर्टिफिकेट (CC) जारी करना प्रशासन की छात्र विरोधी मानसिकता को उजागर करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि असहमति जताने वाले छात्रों को सुनियोजित तरीके से टारगेट किया जा रहा है और बिना जांच प्रक्रिया के उनका नामांकन खत्म किया जा रहा है.
“ऐसा लगता है मानो विश्वविद्यालय में लोकतंत्र नहीं बल्कि अधिनायकवाद चल रहा हो,” मिश्रा ने कहा.
NSUI ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है. नेताओं ने कहा कि अगर सुदीप शास्त्री का TC और CC वापस नहीं लिया गया तो NSUI प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर विश्वविद्यालय गेट से लेकर सड़क तक उग्र आंदोलन करेगी.
सार्थक मिश्रा ने कहा कि यह सिर्फ एक छात्र की नहीं बल्कि विश्वविद्यालय के हर छात्र के अधिकारों की लड़ाई है. प्रशासन अगर तानाशाही रवैया नहीं छोड़ता तो NSUI प्रदेशभर में आंदोलन की लहर चलाएगी.
जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने स्पष्ट कहा कि छात्र हितों के लिए NSUI हर स्तर पर संघर्ष करेगी. इसके लिए चाहे धरना देना पड़े, रैली निकालनी पड़े या कुलपति आवास का घेराव ही क्यों न करना पड़े.
संगठन ने केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से मांग किया कि मामले की तत्काल जांच कर कुलपति आलोक चक्रवाल को पद से हटाया जाए. NSUI का कहना है कि तभी विश्वविद्यालय का वातावरण छात्रों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और शिक्षण के अनुकूल बन सकेगा.
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