अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन राशि में रिश्वतखोरी: दंपति से 70 हजार रुपये मांगने का आरोप, मीडिया को देखकर बाबू बैंक से फरार, रास्ते में फेंका पासबुक
Bribery involving inter-caste marriage incentive funds: Allegation of demanding ₹70,000 from a couple; clerk fled the bank upon seeing the media and discarded the passbook along the way.
बेमेतरा : प्रदेश में अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार पात्र दंपतियों को 2.5 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है. वहीं इस योजना से जुड़े एक गंभीर मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बेमेतरा अपर कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ बाबू विनय कुर्रे पर अंतर्जातीय विवाह करने वाले हितग्राही से प्रोत्साहन राशि दिलाने के एवज में 70 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा है. जबकि बाद में 40 हजार रुपये में सौदा तय हुआ. मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
हितग्राही दंपति ने पैसे मांगने का लगाया आरोप
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम सिंघानपुरी निवासी निलेश बंजारे और उनकी पत्नी अंजलि यादव ने आपसी सहमति से अंतर्जातीय विवाह किया था. दोनों को 2 जनवरी 2026 को शासन की तरफ से विवाह प्रमाण पत्र जारी किया गया. हाल ही में मुख्यमंत्री के बेमेतरा प्रवास के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि का 2.5 लाख रुपये का चेक भी प्रदान किया गया था.
पासबुक अपने पास रखने का भी आरोप
पीड़ित दंपति का आरोप है कि योजना की राशि जारी करने और प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर कार्यालय में पदस्थ बाबू विनय कुर्रे लगातार उनसे पैसे की मांग कर रहा था. पहले 70 हजार रुपये की मांग की गई, बाद में 40 हजार रुपये में मामला तय किया गया. आरोप यह भी है कि बाबू ने दस्तावेजी प्रक्रिया का हवाला देते हुए हितग्राही का बैंक पासबुक अपने पास रख लिया था.
मीडिया को देखते ही पासबुक फेंककर भागा बाबू
वहीं डील के बाद जब तय रकम लेने के लिए संबंधित कर्मचारी बैंक ऑफ बड़ौदा पहुंचा था. इसी दौरान मीडिया की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही वह मौके से भाग निकला. इस दौरान भागते समय उसने रास्ते में पासबुक भी फेंक दिया. पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब तक उनकी तरफ से पैसे देने की सहमति नहीं दी गई. तब तक उन्हें लगातार कार्यालय के चक्कर कटवाए जाते रहे.
इस मामले के सामने आने के बाद अपर कलेक्टर और एसडीएम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया. लेकिन उनकी तरफ से मीडिया के समक्ष कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई. प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी ने मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और रिश्वत मांगने वाले बाबू के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं. वहीं यह मामला बेमेतरा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं.
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