छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को दोहरा झटका, लेट फीस की जगह अब रोजाना लगेगा ब्याज, दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी

A double blow for electricity consumers in Chhattisgarh: daily interest will now be charged instead of a late fee, and rates are set to rise by 30 to 50 paise per unit.

छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को दोहरा झटका, लेट फीस की जगह अब रोजाना लगेगा ब्याज, दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए जुलाई का महीना जेब पर भारी पड़ने वाला है. छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने राज्य में बिजली दरों में बढ़ोतरी के साथ-साथ बिल भुगतान के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है. नए नियमों के तहत अब तय समय सीमा (Due Date) के बाद बिल जमा करने पर मासिक सरचार्ज के बजाय प्रतिदिन के हिसाब से ब्याज वसूला जाएगा.
दोहरी मार: बिजली की प्रति यूनिट दरों में वृद्धि के साथ देर से भुगतान पर पेनाल्टी के नियम बदले.
दैनिक ब्याज व्यवस्था: तय तारीख के बाद बिल भुगतान करने पर अब 0.04% प्रतिदिन की दर से लगेगा ब्याज.
दरों में बढ़ोतरी: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे और व्यावसायिक श्रेणी में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा.
प्रभाव: घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक का अतिरिक्त असर संभव.
अब लेट फीस नहीं, देना होगा प्रतिदिन के हिसाब से ब्याज
नियामक आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, बिजली बिल भुगतान की पुरानी व्यवस्था को बदल दिया गया है. पहले नियत तिथि के बाद बिल जमा करने पर पूरे महीने के लिए एक निश्चित लेट फीस या अधिभार (Surcharge) लिया जाता था.
अब नई व्यवस्था के तहत अगर उपभोक्ता तय तारीख तक बिल का भुगतान नहीं करते हैं. तो उनसे 0.04% प्रतिदिन की दर से ब्याज लिया जाएगा. आयोग का मानना है कि इस व्यवस्था से बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तर्कसंगत और उपभोक्ता हितैषी बनेगी. क्योंकि जो उपभोक्ता नियत तिथि के कुछ ही दिन बाद भुगतान करते हैं. उन्हें पूरे महीने का जुर्माना नहीं देना होगा.
1 जुलाई से कितनी महंगी होगी बिजली?
आयोग ने राज्य में बिजली की नई टैरिफ दरों को भी मंजूरी दे दी है. जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी:

उपभोक्ता श्रेणी दरों में बढ़ोतरी (प्रति यूनिट) अनुमानित मासिक अतिरिक्त प्रभाव
घरेलू उपभोक्ता 30 से 50 पैसे ₹30 से ₹500 तक
व्यावसायिक उपभोक्ता 20 से 40 पैसे खपत के अनुसार

इसके अलावा कृषि उपभोक्ताओं को मिलने वाली कुछ रियायतों और श्रेणियों के पुनर्गठन में भी आंशिक बदलाव किए गए हैं. दरों में इस बढ़ोतरी और नए पेनाल्टी नियम के कारण घरेलू और व्यावसायिक दोनों ही वर्ग के उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित होना तय है.
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