अब दो और विधायकों ने CM को पत्र लिख कहा- नकटी में नहीं चाहिए आवास, कांग्रेस बोली- क्या बीजेपी के MLA भी दिखायेंगे इतना नैतिक साहस?
Now, another MLA has written to the CM stating they do not want a residence in Nakti; the Congress asks—will BJP MLAs also show such moral courage?
रायपुर : बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 55 के विधायक जनकराम ध्रुव ने विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए ग्राम पंचायत नकटी में आबंटित भूमि को बदलकर नवा रायपुर में किसी उपयुक्त और केंद्रीय स्थान पर भूमि आबंटित किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था. जिसके बाद सरायपाली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक चातुरीनंद डिग्रीलाल नंद और विधायक ओंकार साहू द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है.
दोनों विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि वे सैकड़ों ग्रामीणों का आशियाना उजाड़कर बनाई जाने वाली कॉलोनी में रहना सहीं नहीं समझते. मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में विधायक ने उल्लेख किया कि शासन द्वारा नव निर्वाचित एवं पूर्व विधायकों के लिए प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत नकटी में भूमि आबंटित की गई है. लेकिन इस प्रस्तावित स्थल का स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के विरोध के बावजूद प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को भरोसे में लिए बिना उनकी जमीन खाली कराई जा रही है. जिससे वे व्यक्तिगत रूप से काफी आहत हैं.
विधायक ने पत्र में कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वे जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं और किसी भी कीमत पर ग्रामीणों के आशियाने उजाड़कर बनने वाली कॉलोनी में निवास करना उनके सिद्धांतों के खिलाफ है.
उन्होंने स्पष्ट किया: “मुझे गरीबों के आशियाने की कीमत पर कोई सरकारी बंगला या आवास नहीं चाहिए. नकटी गांव में जिन गरीबों के घर उजाड़े जा रहे हैं. वह सरासर गलत है. मैं ऐसे किसी भी फैसले के खिलाफ हूं जो आम जनता और गरीबों को बेघर करे.”
विधायक ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री इस जनहित एवं व्यावहारिक समस्या पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र सकारात्मक फैसला लेंगे. इस संवेदनशील कदम के बाद कांग्रेस ने अब सत्ताधारी दल भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है
विधायक के इस कदम को ग्रामीणों के पक्ष में खड़े होने और जनभावनाओं को प्राथमिकता देने के रूप में देखा जा रहा है. विधायक कॉलोनी के लिए प्रस्तावित जमीन को लेकर अब प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज होने की संभावना है.
बता दें कि कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा था कि नकटी की जमीन विधायकों के लिए ही अलॉट की गई है. उन्होंने कांग्रेस पर दिखावे और भ्रम फैलाने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए खुली चुनौती दी. जायसवाल ने कहा, “अगर कांग्रेस इस आवंटन के विरोध में है. तो उनके विधायक लिखित में पत्र दें कि उन्हें यह जमीन नहीं चाहिए.
कांग्रेस का कहना है कि जहां एक तरफ भाजपा सरकार में गरीबों पर बुलडोजर चलने और उन्हें बेघर करने की खबरें आती हैं. वहीं कांग्रेस की महिला विधायक ने जनहित में अपने विशेषाधिकार को छोड़ दिया. कांग्रेस ने चुनौती देते हुए कहा, “क्या भारतीय जनता पार्टी का कोई भी विधायक या मंत्री ऐसा नैतिक साहस दिखा पाएगा? क्या वे गरीबों के हक में अपनी सुख-सुविधाओं को लात मारने का दम रखते हैं?”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून के इस सीजन में छत्तीसगढ़ में ‘आवास और विस्थापन’ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है,.और कांग्रेस इस मामले को लेकर सड़क से सदन तक सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा खेमे से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है.
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रायपुर कलेक्ट्रेट को नकटी के लोगों ने घेरा, रायपुर जिला कांग्रेस के नेता भी मौजूद
रायपुर : राजधानी रायपुर के नकटी गांव में सोमवार को 80 घरों पर बुलडोजर चला दिया गया. अब इसके विरोध में बुधवार को प्रभावितों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया. उनका कहना है कि प्रशासन ने घर दिए हैं. जिनमें किसी तरह की सुविधाएं नहीं हैं. घर इतने छोटे हैं कि उसमें परिवार का रह पाना संभव नहीं है.
ग्रामीणों के इस प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस फोर्स लगाई गई थी. पुलिस ने कलेक्ट्रेट में बैरिकेडिंग कर ग्रामीणों को रोकने की कोशिश की और उन्हें समझाइश दी. इस प्रदर्शन में रायपुर जिला कांग्रेस के नेता भी मौजूद रहे.
बता दें कि कार्रवाई से 2 दिन पहले ही ग्रामीण सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात करने पहुंचे थे. सांसद ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि बरसात तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी. उन्होंने कहा था कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है. इसी बीच 29 जून को 80 घर तोड़ दिए गए.
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