नकटी गांव बुलडोजर कार्यवाही, ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय के बाद मंत्री ओपी चौधरी के बंगले के बाहर दिया धरना, कांग्रेसी कार्यकर्ता रहे शामिल घिरी सरकार
Following bulldozer action in Nakti village, villagers staged a protest outside Minister OP Choudhary's bungalow after first demonstrating at the Collector's office; Congress workers joined the protest, putting the government under fire.
रायपुर : नकटी गांव के विस्थापन और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. सोमवार को हुई तोड़फोड़ के बाद प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हुआ है और देर शाम तक भी बड़ी तादाद में लोग मंत्री ओपी चौधरी के शंकर नगर स्थित बंगले के बाहर धरना प्रदर्शन पर बैठे रहे.
प्रदर्शनकारियों में बेघर हुए परिवार, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं. जो आवास की मांग को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं. हालात को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए.
पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि कई विस्थापित परिवारों ने शिकायत किया कि 12 से 14 सदस्यों वाले परिवार को सिर्फ एक कमरे का आवास दिया गया. वहां न पर्याप्त बिजली की व्यवस्था है, न पीने के पानी की सुविधा और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं. अगर सरकार पुनर्वास कर रही है, तो प्रभावित लोगों को सम्मानजनक आवास के साथ सभी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए.
उन्होंने सवाल किया कि जब प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं, तब जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने क्यों नहीं पहुंचे. जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ विकास कार्यों का उद्घाटन करना नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों के साथ खड़े होना भी है.
बता दें कि नकटी गांव की महिला ने बताया कि हमको जब्राब धमकी देकर कहा गया कि कैमरे के सामने कहो कि हमको मकान दिया गया यहां लाइट पानी की भी व्यवस्था है. खाना भी दिया जा रहा है. धमकी की वजह से महिला ने कह दिया. लेकिन बाद में उसी महिला ने मिडिया और कैमरे के सामने बताया कि हमको धमकी दी गई. डर की वजह से हमको कहना पड़ा कि लाईट पानी की और खाने पीने का इन्तेजाम है.
ग्रामीणों ने सड़क पर बैठकर सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ. प्रशासन ने हालात पर नजर बनाए रखी और भीड़ को कंट्रोल करने के प्रयास किए जा रहे थे.. यह पूरा मामला नकटी गांव में कथित तौर पर किए गए विस्थापन और तोड़फोड़ से जुड़ा है. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बिना पर्याप्त पुनर्वास सुविधा दिए उनके घरों से हटाया गया. जिससे वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं.
इसी बीच सोशल मीडिया पर विधानसभा की एक बैठक से जुड़ा वीडियो भी वायरल हुआ है. जिसमें कथित रूप से नकटी गांव हटाने से जुड़ी चर्चा दिखाई दे रही है. इसके बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर उन्हें हटाया गया है तो सरकार को उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था करनी चाहिए। कई प्रभावित लोगों ने आरोप लगाया कि वे वर्षों से वहां रह रहे थे. लेकिन अचानक कार्रवाई के कारण उनका जीवन प्रभावित हो गया है.
प्रदर्शनकारी लोगों ने यह भी मांग रखी है कि उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए. वहीं प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात है. इस पूरे मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है और स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति बनी हुई है.
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