इंसानियत हुई तार-तार, हैवानियत की सारी हदें पार, 3 वर्षीय मासूम नातिन को नाना ने बनाया हवस का शिकार, आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल
Humanity was torn apart, all limits of brutality were crossed, 3-year-old innocent granddaughter was made a victim of lust by grandfather, police arrested the accused and sent him to jail.
सूरजपुर : छत्तीसगढ़ में मासूम बच्चियों के साथ बढ़ते अपराध ने सोचने पर मजबूर कर दिया है. दुर्ग के बाद अब सूरजपुर जिले में रिश्तों का शर्मसार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. जहां रिश्तों पारिवारिक सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां 3 साल की मासूम बच्ची के साथ उसी के अधेड़ नाना के हैवानियत करते हुए दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया. घटना की जानकारी के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. ये मामला भटगांव थाना क्षेत्र का है.
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को मासूम अपनी नानी और मां की गैरमौजूदगी में घर पर अपने 50 साल के नाना के साथ थी. नशे में धुत नाना ने अपनी ही नातिन के साथ दरिंदगी करते हुए हवस का शिकार बनाया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच गुस्सा व्याप्त है.
बच्ची की मां के घर लौटने पर परिजनों को इस घटना की जानकारी हुई. जिसके बाद पीड़िता के परिजनों ने मामले की रिपोर्ट भटगांव थाने में दर्ज कराई गई. पुलिस ने आरोपी नाना को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी इलाके में चौकीदारी का काम करता था. वहीं इस घटना के बाद डरी-सहमी पीड़ित मासूम को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया है, जहां उसकी देखभाल और काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ती नशाखोरी और पारिवारिक निगरानी की कमी का खतरनाक संकेत हैं. बच्चों के साथ होने वाले अधिकांश यौन अपराध परिचितों या रिश्तेदारों द्वारा ही किए जाते हैं, जो इस मामले को और गंभीर बनाता है.
बाल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है. खासकर तब जब वे किसी भी परिस्थिति में बच्चे को अकेला छोड़ते हैं. साथ ही, गांव-समाज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर ऐसे अपराधों के खिलाफ सामूहिक निगरानी और त्वरित सूचना तंत्र विकसित करना जरूरी है.
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी पर खत्म नहीं होगा. कोर्ट में सुनवाई होगी. सबूत पेश होंगे. और सबसे अहम पीड़िता को इंसाफ दिलाने की प्रक्रिया शुरू होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में तेजी से ट्रायल और मनोवैज्ञानिक सहायता दोनों जरुरी हैं. अगर सिस्टम तेज चला तो यह केस एक मिसाल बन सकता है. अगर धीमा पड़ा तो सवाल और गहरे होंगे.
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