छत्तीसगढ़ के हॉस्टल में मोबाइल विवाद, 5 छात्राओं ने एक साथ पी लिया फिनाइल, छात्रावास में मचा हड़कंप, इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती

A mobile phone dispute erupted in a Chhattisgarh hostel, where five female students drank phenol together, causing a commotion in the hostel and were hospitalized for treatment.

छत्तीसगढ़ के हॉस्टल में मोबाइल विवाद, 5 छात्राओं ने एक साथ पी लिया फिनाइल, छात्रावास में मचा हड़कंप, इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती

कोरबा : छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाक के सरकारी छात्रावास की पांच छात्राओं ने आपसी विवाद के चलते फिनाइल पीकर जान देने की कोशिश की. सभी छात्राओं को फौरन नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया. इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. अस्पताल से परिजन उन्हें अपने साथ ले गए.
छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के ग्राम छुरी स्थित प्री मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में छात्र पर हुए हमला का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि जिले के सीमांत पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाक से एक और चिंताजनक घटना सामने आई है. यहां एक सरकारी छात्रावास की पांच छात्राओं ने आपसी विवाद के बाद फिनाइल पी लिया.
पोड़ी बीईओ कार्यालय के सामने एकलव्य छात्रावास का संचालन किया जा रहा है. घटना 25 मार्च 2026 की बताई जा रही है. एक ही कक्षा में पढ़ने वाली पांच छात्राओं के बीच मोबाइल चलाने को लेकर विवाद हुआ. एक छात्रा को मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़कर फटकारा गया तो उसने अन्य छात्राओं का हवाला दिया. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और छात्राएं आपस में लड़ पड़ीं.
कुछ देर बाद आपस में नाराजगी इतनी बढ़ गई, गुस्साई छात्राओं ने आत्मघाती कदम उठाते हुए फिनाइल पी लिया. घटना के बाद छात्रावास में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. मौजूद स्टाफ ने तत्काल छात्राओं को उल्टी कराने का प्रयास किया. इनमें से दो छात्राओं की स्थिति जल्द सामान्य हो गई. जबकि तीन छात्राओं को शाम करीब सात बजे अस्पताल ले जाया गया.
छात्राओं को रात भर भर्ती रखकर इलाज किया गया. अगले दिन हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई. घटना की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए थे. डिस्चार्ज के बाद छात्राओं को अपने साथ ले गए.
छत्तीसगढ़ कोरबा जिले में छात्रावासों से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. कभी मारपीट तो कभी आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश जैसी घटनाएंबढ़ती जा रही है.
विशेषज्ञों की माने तो किशोरावस्था में छोटे विवाद भी गंभीर रूप ले लेते हैं. ऐसे में छात्रावासों में परामर्श की व्यवस्था, शिक्षकों की सक्रिय भूमिका और सकारात्मक माहौल बेहद जरूरी है. समय पर समझाइश और मार्गदर्शन से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है.
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