छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक के विरोध में ईसाई आदिवासी महासभा की विशाल रैली, 20 हजार से ज्यादा लोग शामिल, ज्यपाल के नाम SDM को सौंपा ज्ञापन
A massive rally by the Christian Adivasi Mahasabha against the Chhattisgarh Freedom of Religion Bill, with over 20,000 people attending, and a memorandum addressed to the Governor was submitted to the SDM.
जशपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिला जशपुर में ईसाई आदिवासी महासभा के बैनर तले कुनकुरी में "छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026" के विरोध में एक बड़ी रैली और आमसभा आयोजित की गई. इस कार्यक्रम के बाद राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन एसडीएम कुनकुरी को सौंपा गया. आयोजकों ने दावा किया कि इस विरोध प्रदर्शन में बीस हजार से अधिक लोग शामिल हुए.
सुबह करीब दस बजे से ही ईसाई समुदाय के लोग शहर में जुटने लगे. दोपहर बारह बजे तक भीड़ बीस हजार के पार पहुंच गई. खेल मैदान में जगह कम पड़ने पर करीब साढ़े दस बजे रैली निकाली गई. यह रैली शहर के कई मार्गों से होते हुए वापस मैदान पहुंची.
आयोजकों का कहना है कि कुनकुरी खेल मैदान में इतनी बड़ी भीड़ पहले कभी नहीं देखी गई थी. जिले के करीब हर ईसाई परिवार से लोग इसमें शामिल हुए. इस आंदोलन में जशपुर ईसाई धर्मप्रान्त के बिशप इमानुएल केरकेट्टा केंद्रीय कैथोलिक सभा के संरक्षक के रूप में शामिल हुए. ईसाई आदिवासी सभा के जिलाध्यक्ष वाल्टर कुजूर ने विधेयक को "काला कानून" बताया. उन्होंने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की.
रैली के दौरान शहर में यातायात भी प्रभावित हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग पर होलीक्रॉस अस्पताल तिराहे के पास करीब आधे घंटे तक जाम रहा। इसमें एक एंबुलेंस और कई परीक्षार्थी फंस गए थे. वाल्टर कुजूर ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया. वक्ताओं ने विधेयक को धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया और मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए.
आयोजकों ने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को जशपुर शहर में भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा. यह आंदोलन भी "छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026" के विरोध में होगा. रैली और सभा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा. पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी.
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026” को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. इस बारे में राज्यपाल को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस विधेयक पर अनुमति न देने का आग्रह किया गया है.
संविधान के मूल अधिकारों पर चोट
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि 19 मार्च 2026 को लाए गए इस विधेयक के कई प्रावधान भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन करते हैं. पत्र के मुताबिक:
* यह विधेयक अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 14 व 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों के खिलाफ है.
* आरोप लगाया गया है कि यह प्रस्तावित कानून सद्भावनापूर्ण तरीके से की जाने वाली धर्मार्थ, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में लाकर एक विशिष्ट अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बना रहा है.
विधेयक की मुख्य खामियां
शिकायतकर्ता ने विधेयक की विभिन्न धाराओं और कंडिकाओं पर बिंदुवार आपत्तियां दर्ज की हैं.
* एकतरफा कार्रवाई का डर: आरोप है कि विधेयक की धाराएं एक विशेष समुदाय को लक्षित करती हैं, जबकि कानून सभी धर्मों के लिए समान होना चाहिए.
* प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध: पत्र में कहा गया है कि विधेयक के कुछ अध्याय नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं.
* दुरुपयोग की आशंका: अध्याय 3 की कंडिका 5 और 6 पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि इससे राजनीतिक दबाव में अनावश्यक प्रकरण दर्ज होने और कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाएगी.
* जांच प्रक्रिया पर सवाल: यह मांग की गई है कि मामलों की जांच पुलिस प्राधिकारी के बजाय जिला मजिस्ट्रेट (DM) स्तर पर होनी चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे.
पुनर्विचार की मांग
ज्ञापन के अंत में महामहिम राज्यपाल से विनम्र प्रार्थना की गई है कि वे इस विधेयक पर पुनः विचार करने के लिए इसे विधानसभा में वापस भेजें। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि यह विधेयक वर्तमान स्वरूप में लागू होता है, तो यह संविधान की मूल प्रस्तावना और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा.
ज्ञापन सौपने वालो मे संयुक्त मसीही समाज की तरफ से ज्ञापन सौपा गया. जिसमे प्रफुल जेम्स, पास्टर सिक्का, सुनीता तिमोथी, रविंद्र लकड़ा, अभय वाल्टर,रोबिन्सन मसीह, विदेशीपास्टर, राजा जसपाल, रोहित कुजर, अमीन सिंग.सिंग, मंगल मसीह, प्रशांत डेनियल, प्राचीन अशोक समुएल, सत्यपाल, पा. पन्ना, पा श्याम डाडे, सहित बहुत से लोग शामिल रहे…
साथ ही प्राचीन प्राफुल जेम्स ने मीडिया को बताया कि हमारा देश एक धर्म निरपेक्ष
देश और इस कानून के तहत हम मसीहियो धार्मिक स्वतंत्रता न छीनी जाए. और रोबिनसन मसीह ने इसे काला कानून बताया.
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