जमीन के नाम पर कर्ज का जाल और किसानों की मौत का मामला, गिरवी जमीन बेचने के आरोपों से मचा हड़कंप, कई परिवारों पर टूटा संकट, सदमे में गई जान
A crisis involving a debt trap linked to land and the deaths of farmers; an uproar over allegations of selling mortgaged land; multiple families plunged into distress; lives lost due to shock.
कांकेर : सस्ते ब्याज पर कर्ज और हाफ रजिस्ट्री के नाम किसानों की जमीनें हड़पने वाले सिंडिकेट का शिकार होकर एक और अन्नदाता की जान चली गई. ग्राम मरकाटोला (चारामा) निवासी किसान रामचरण पटेल उम्र 55 साल ने बीमारी के इलाज और बैंक का कर्ज चुकाने जिस जमीन को गिरवी रखा दलालों ने उसे बेच दिया.
आजीविका का एकमात्र सहारा छिनने के मानसिक आघात से किसान लगातार बीमार रहने लगा और 30 सितंबर को दम तोड़ दिया. रामचरण पटेल को पैसों की दरकार थी. भनक लगते ही बालोद से जुड़े संगठित गिरोह के सदस्य टेमन साहू, कृष्णा साहू, गैंदसिंह किसान के पास पहुंचे. 2% मासिक ब्याज पर कर्ज देने प्रस्ताव रखा. गारंटी में 4 साल के लिए 1 एकड़ 10 डिसमिल जमीन गिरवी रखने एग्रीमेंट कराया. झांसे में लेकर गिरोह ने किसान को 3 लाख का चेक थमाया. कुछ देर में दबाव बनाकर पहले 1.5 लाख और फिर पूरी रकम वापस ले ली.
गिरोह ने उक्त जमीन ओमप्रकाश साहू को बेच दी. किसान को पता चला तो वह स्तब्ध रह गया. परिवार चलाने मजदूरी करने लगा. आर्थिक तंगी से इलाज नहीं करा सका. इसी तरह ग्राम एनहूर (दुर्गूकोंदल) निवासी लच्छूराम यादव की 18 लाख मूल्य की जमीन बेच दी गई. खाते में आए 7.75 लाख भी दलालों ने आहरण करा लिए. जमीन वापस पाने दफ्तरों के चक्कर काटते लच्छूराम भी गंभीर रूप से बीमार हो चुका है.
मृतक किसान के बेटे अमोष कुमार पटेल ने बताया कि पिताजी को पता चला कि गिरवी रखी जमीन बेच दी गई है. उन्हें गहरा सदमा लगा. दलालों से मिन्नतें कीं. अफसरों के चक्कर काटे. कोई सुनवाई नहीं हुई. खेत बिकने के बाद घर खर्च चलाने मजदूरी करने लगे. मेरी कॉलेज पढ़ाई प्रभावित होने लगी. जमीन वापस पाने तनाव वे झेल नहीं पाए. धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ दिया. इतने पैसे नहीं थे कि उन्हें बड़े अस्पताल ले जाते. स्थानीय डॉक्टरों से दिखाते रहे. दवा के पैसे भी खत्म हो गए. 30 सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया.
केस- 1
जमीन हड़पने वाले इसी गिरोह के चंगुल में फंस पूर्व सरपंच बड़ेगौरी रघुवीर तेता की संदिग्ध स्थिति में मौत हो चुकी है. जमीन के सौदे, रकम के लेनदेन, गवाहों की भूमिका, लॉज में ठहराने, पार्टी करने से लेकर अस्पताल पहुंचाने तक घटनाक्रम संदिग्ध है. मृतक की पत्नी ईश्वरी तेता ने आरोप लगाया जमीन की रकम हड़पने उनके पति की हत्या की गई है.
केस- 2
ग्राम रानीडोंगरी निवासी उग्रसेन के कैंसर के इलाज के लिए संयुक्त खाते की 29 एकड़ में से 9 एकड़ जमीन गिरवी रखने बात तय हुई थी. दलालों ने पूरी 29 एकड़ जमीन बेच दी. उग्रसेन के खाते में आए पैसे भी निकाल लिए. सह-खातेदार बुआ बिमला ठाकुर को दिया चेक बाउंस हो गया। रजिस्ट्री के एक सप्ताह बाद उग्रसेन की मौत हो गई.
जिले में जमीन फर्जीवाड़े से संबंधित जितनी भी शिकायतें आई हैं. सभी की जांच जारी है. पीड़ितों और संबंधित पक्षों से रजिस्ट्री व बैंक दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं. जांच में जो भी तथ्य आएंगे. उसके आधार वैधानिक कार्रवाई करेंगे. -हरीश पाटिल, एसडीओपी, कांकेर
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