गंदे पानी पर फूटा महिलाओं का गुस्सा, महिलाएं पहुंचीं नगर पंचायत, ज्ञापन देने पर CMO ने किया इंकार, उपाध्यक्ष को सौंपा आवेदन, 4 साल में 15 से ज्यादा मौतें
Women outraged over contaminated water; they visited the Nagar Panchayat office. When the CMO refused to accept their memorandum, they submitted the application to the Vice-President. More than 15 deaths have occurred in the last four years.
गरियाबंद/देवभोग : गरियाबंद जिला में नगर पंचायत देवभोग में शुद्ध पेयजल और जलस्रोतों की सफाई का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. जलस्रोतों में कथित तौर पर मानक से अधिक टीडीएस और दूषित पानी की शिकायतों के बावजूद समय पर जांच और सफाई नहीं होने से नाराज नगर की 40 से ज्यादा महिलाएं बुधवार को नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं. महिलाओं ने जलस्रोतों की तत्काल जांच, सफाई और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया. हालांकि महिलाओं का आरोप है कि प्रभारी सीएमओ दुष्यंत साहू ने उनका ज्ञापन लेने से इंकार कर दिया. इसके बाद महिलाओं ने नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील यादव को ज्ञापन सौंपा और नगर पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर जमकर नाराजगी जताई.
चार वार्डों में पेयजल को लेकर चिंता
नगरवासियों के मुताबिक वार्ड नम्बर 3, 4, 5 और 6 के कई पेयजल स्रोतों में टीडीएस की मात्रा तय मानक से दो से ढाई गुना ज्यादा होने की शिकायत है. ऐसे में इन स्रोतों से पानी पीने वाले लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है. वार्ड निवासी दीनदयाल सोनी ने बताया कि चारों वार्डों के कई लोग वार्ड नम्बर 3 में स्थित सोलर सिस्टम आधारित जलस्रोत पर निर्भर हैं. लेकिन अब इस जलस्रोत से भी दूषित पानी निकलने की शिकायत सामने आ रही है. वहीं सोलर सिस्टम भी बंद पड़ा है, जिसके कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. कई परिवारों को मजबूरी में एक से दो किलोमीटर दूर स्थित जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है. जबकि कुछ परिवार आज भी असुरक्षित पानी का इस्तेमाल करने को मजबूर बताए जा रहे हैं.
किडनी की बीमारी से मौतों का दावा, फिर भी जांच का इंतजार
पेयजल का मुद्दा इसलिए भी गंभीर बताया जा रहा है. क्योंकि स्थानीय लोगों के मुताबिक वार्ड नम्बर 3 में पिछले चार साल में किडनी की खराबी से 8 लोगों की मौत हुई है. वहीं पूरे नगर में यह संख्या 15 से ज्यादा होने का दावा किया जा रहा है.
इसी चिंता को देखते हुए पार्षद सूर्यकांत सिंदूर ने समाधान शिविर के दौरान भी जलस्रोतों की जांच और समस्या के निराकरण की मांग उठाई थी. नगरवासियों का आरोप है कि शिकायत का पोर्टल पर निराकरण दर्ज कर दिया गया. लेकिन वास्तविकता में जलस्रोतों की जांच और सफाई का काम नहीं हो पाया. स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच को लेकर पीएचई और नगर पंचायत के बीच समन्वय की कमी की वजह से मामला आगे नहीं बढ़ सका.
समाधान शिविर में मांग, फिर भी नहीं हुआ समाधान
नगरवासियों का कहना है कि जब समाधान शिविर में ही जलस्रोतों की जांच और सफाई की मांग जिम्मेदारों के सामने रखी गई थी, तो उम्मीद थी कि समस्या का जल्द निराकरण होगा. लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी जब ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो महिलाओं का गुस्सा सामने आया. बड़ी तादाद में महिलाएं नगर पंचायत कार्यालय पहुंचीं और जिम्मेदार अधिकारियों से जलस्रोतों की जांच तथा सफाई कराने की मांग की.
CMO पर ज्ञापन लेने से इनकार का आरोप
महिलाओं का आरोप है कि वे अपनी समस्या को लेकर प्रभारी सीएमओ दुष्यंत साहू को ज्ञापन सौंपना चाहती थीं. लेकिन उन्होंने आवेदन लेने से इंकार कर दिया. महिलाओं के मुताबिक जब इस बारे में पूछा गया तो सीएमओ ने कहा कि ज्ञापन देने का तरीका ठीक नहीं था. इसलिए उन्होंने आवेदन नहीं लिया. इसके बाद महिलाओं ने नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील यादव को ज्ञापन सौंप दिया.
इस दौरान महिलाओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवारों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की मांग लेकर नगर पंचायत पहुंची थीं. एक महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “अगर समय रहते जलस्रोतों की जांच और सफाई करा दी जाती तो हमें इतनी तादाद में नगर पंचायत कार्यालय आने की जरूरत ही नहीं पड़ती.”
दफ्तर आना साहब को बुरा लगा, इसलिए ज्ञापन तक नहीं लिया
नगर की महिलाओं ने नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी समस्या को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. उनका कहना है कि जलस्रोतों की गुणवत्ता की जांच और नियमित सफाई नगर पंचायत की जिम्मेदारी है. महिलाओं ने कहा कि दूषित पानी की वह से अगर लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है तो इसकी जांच जल्द होनी चाहिए. ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें.
प्रभारी CMO बोले-सैंपल लिए जा चुके हैं
पूरे मामले में नगर पंचायत देवभोग के प्रभारी सीएमओ दुष्यंत साहू ने कहा कि जलस्रोतों की जांच और संधारण को लेकर पीएचई इंजीनियर से बातचीत हुई है. उन्होंने बताया कि जलस्रोतों से पानी के सैंपल लिए जा चुके हैं. रिपोर्ट आने के बाद जलस्रोतों की सफाई और अन्य आवश्यक कार्य कराए जाएंगे. अब देखना होगा कि पानी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर पंचायत और संबंधित विभाग कितनी तेजी से जलस्रोतों की सफाई एवं आवश्यक सुधार कार्य कराते हैं. फिलहाल शुद्ध पेयजल की मांग को लेकर नगरवासियों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है और प्रशासन के सामने इस समस्या के जल्द समाधान की चुनौती है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI?



