14 वर्षीय छात्र की छात्रावास में संदिग्ध मौत, आश्रम प्रबंधन पर लगे गंभीर आरोप, जांच की मांग के बाद कब्र से निकाला गया शव, पोस्टमार्टम से खुलेगा राज

Suspicious death of a 14-year-old student in a hostel; serious allegations leveled against the ashram management; body exhumed following demands for an investigation; post-mortem to reveal the truth.

14 वर्षीय छात्र की छात्रावास में संदिग्ध मौत, आश्रम प्रबंधन पर लगे गंभीर आरोप, जांच की मांग के बाद कब्र से निकाला गया शव, पोस्टमार्टम से खुलेगा राज

कांकेर : अंतागढ़ क्षेत्र के सारंडी छात्रावास में 14 साल के छात्र की संदिग्ध हालत में हुई मौत का मामला अब जांच के नए चरण में पहुंच गया है. परिजनों की आपत्ति और लगातार उठ रहे सवालों के बाद प्रशासन ने दफनाए जा चुके शव को कब्र से बाहर निकालने का फैसला लिया. एसडीएम के आदेश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शव का उत्खनन किया गया.
बताया जा रहा है कि कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्र की छात्रावास में अचानक मौत हो गई. इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराए बिना अंतिम संस्कार किए जाने की बात सामने आई. जिसे लेकर परिजनों ने गंभीर आपत्ति जताई. मृतक के पिता ने छात्र की मौत को संदिग्ध बताते हुए प्रशासन से शव को कब्र से बाहर निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की.
अधीक्षक पर लापरवाही के आरोप
परिजनों ने छात्रावास अधीक्षक पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका दावा है कि मौत के बाद पोस्टमार्टम नहीं कराने के लिए परिवार पर दबाव बनाया गया. मामले को लेकर परिजनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की.
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
शव को कब्र से बाहर निकालने के बाद अब पोस्टमार्टम कराया जाएगा. मेडिकल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही यह साफ हो सकेगा कि छात्र की मौत किन हालात में हुई थी. फिलहाल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है.
मंडल संयोजक सहदेव सोनवानी
मंडल संयोजक सहदेव सोनवानी ने कहा कि घटना के समय छात्रावास अधीक्षक रात्रि में छात्रावास में मौजूद नहीं थे. उन्होंने बताया कि अधीक्षक के रहने की व्यवस्था नहीं होने के कारण वे प्रतिदिन अप-डाउन करते हैं. उन्होंने यह भी माना कि छात्र की तबीयत पहले से खराब थी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उसे छात्रावास में ही रखा गया.
आरोप है चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संभालते हैं जिम्मेदारी
मृतक छात्र के परिजनों का आरोप है कि छात्रावास में रात के समय व्यवस्था 2 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती है. स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद होते और छात्र को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी. जिला पंचायत सदस्य के अनुसार 50 सीटर छात्रावास में लापरवाही का आलम यह है कि छात्रों की वास्तविक संख्या दर्ज करने के लिए रजिस्टर तक की समुचित व्यवस्था नहीं है, इससे छात्रावास में रहने वाले छात्रों की सही संख्या बताना भी मुश्किल होता है.
जिला पंचायत सदस्य गुप्तेश उसेंडी
जिला पंचायत सदस्य गुप्तेश उसेंडी ने कहा कि यह घटना संबंधित विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है. विभाग मामले को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास कर रहा है. परिजनों के साथ मिलकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.
छात्रावास प्रभारी अधीक्षक सतीश मरकाम का बयान
छात्रावास प्रभारी अधीक्षक सतीश मरकाम के अनुसार छात्र मलेरिया पॉजिटिव था, लेकिन स्थिति गंभीर नहीं थी. 14 तारीख को करण अपने भाई के साथ छात्रावास पहुंचा था. बैग रखकर वह स्कूल गया, लेकिन स्कूल में सिर दर्द होने पर प्राचार्य से छुट्टी लेकर छात्रावास वापस आ गया. उसके साथी उसे पास के उप स्वास्थ्य केंद्र ले गए. वहां जांच में मलेरिया निकला और इलाज किया गया. हमने उसके पालक से संपर्क किया और बताया कि बच्चे को मलेरिया है, घर ले जाना है तो ले जा सकते हैं. लेकिन पिता ने कहा वहीं रहने दो. अधीक्षक के मुताबिक उस दिन छात्र ने शाम को खाना खाया और साथियों से बातचीत भी की. स्थिति सामान्य लग रही थी. 15 तारीख को छात्र स्कूल नहीं गया और हॉस्टल में आराम कर रहा था. तबीयत खराब होने पर साथी उसे फिर अस्पताल ले गए. चेकअप के बाद वापस आकर उसने शाम को भी खाना खाया और पालक से बात कराई गई. रात को उसने दवाई खाई और सोय. सुबह जब साथियों ने उसे उठाने की कोशिश की तो कोई हलचल नहीं थी. फिर प्यून ने मुझे फोन पर सूचना दी. मैं पहुंचा तो बच्चा मृत हालत में था.
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