राजधानी में थाने के भीतर महिला को अश्लील गालियां और चरित्र हनन, छेड़छाड़ और अभद्र टिप्पणी के मामले में पोस्टरमैन सोनू गरचा गिरफ्तार
Poster man Sonu Garcha arrested for using obscene language and defaming a woman's character, molesting her and making lewd comments inside a police station in the capital
रायपुर : राजधानी रायपुर के खम्हारडीह थाना परिसर में गुरुवार की शाम एक शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और महिला सुरक्षा के दावों की कलई खोलकर रख दी है.
मिली जानकारी के मुताबिक चोरी की एक गंभीर घटना के बारे में बयान देने थाने पहुंची पीड़िता के साथ थाना परिसर में ही खुलेआम आरोपी सोनू गरचा द्वारा अश्लील इशारे और चरित्र को लेकर अभद्र टिप्पणी की गई. मामले में नामजद आरोपी मनप्रीत सिंह उर्फ सोनू गरचा, जो कि पहले भी पीड़िता को जान से मारने की धमकियाँ दे चुका है. उसने थाने में ही पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी के बीच पीड़िता को घूरते हुए अश्लील इशारे किया. और उसके चरित्र पर अभद्र टिप्पणियाँ कीं. सोनू गरचा पर पूर्व के भी कई अपराधिक मामले अदालत में लंबित हैं.
इतना ही नहीं जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने पीड़िता का हाथ पकड़कर ज़ोर से मरोड़ दिया. यह सब घटनाक्रम थाना परिसर में पुलिस अधिकारियों की नाक के नीचे हुआ. वहां मौजूद एक युवक ने बीच-बचाव कर पीड़िता का हाथ छुड़ाया. तब जाकर आरोपी वहां से फरार हुआ. चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़िता द्वारा पूर्व में आरोपी के खिलाफ मोबाइल रिकॉर्डिंग सहित लिखित शिकायत दी जा चुकी है. जिसमें आरोपी और उसकी बहन तलविंदर चंद्राकर उर्फ चिक्की द्वारा पीड़िता को शहर छोड़ देने और हत्या कर दिए जाने की धमकी दी गई थी. इसके बावजूद बीते दो साल में पुलिस ने कोई संज्ञेय अपराध दर्ज नहीं किया. अब जब थाना परिसर में ही महिला के साथ इस तरह की घिनौनी हरकत हुई. तब जाकर प्रशासन हरकत में आया. नगर पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र चतुर्वेदी के निर्देश पर आरोपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तारी के आदेश जारी हुआ.
हालांकि आरोपी सोनू गरचा ने घटना के बाद अपना मोबाइल फोन बंद रखा. जिससे पुलिस टीम उससे संपर्क नहीं कर सकी. लेकिन जब मामला तूल पकड़ने लगा और पुलिस पर सवाल उठने लगे. तब दबाव बढ़ने पर आरोपी को गिरफ्तार कर एसडीएम अदालत में पेश किया गया.
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब थाने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर महिलाएं सुरक्षित नहीं. तो आम जगहों की सुरक्षा का क्या भरोसा?
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच कर आरोपी को सख्त सजा दिलवाएगी, या फिर यह भी पुराने मामलों की तरह किसी कोने में दफन कर दिया जाएगा?
क्या रायपुर पुलिस प्रशासन महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम है?. या फिर अपराधियों की मौन सहमति से यह व्यवस्था सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है?
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