इलाज में लापरवाही शव के साथ दुर्व्यवहार, अधूरी एंबुलेंस और बिना डॉक्टर रेफर का आरोप, डॉक्टर व प्रबंधन पर FIR दर्ज, हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त

Negligence in treatment, mistreatment of dead body, incomplete ambulance and referral without a doctor, FIR registered against doctor and management, hospital license cancelled

इलाज में लापरवाही शव के साथ दुर्व्यवहार, अधूरी एंबुलेंस और बिना डॉक्टर रेफर का आरोप, डॉक्टर व प्रबंधन पर FIR दर्ज, हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त

 दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित श्रेया अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. परिजनों का आरोप है कि महिला का ऑपरेशन होने के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही. लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं दिया गया। जब स्थिति बेहद नाजुक हो गई, तब उसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया. धमधा स्थित श्रेया अस्पताल पर महिला के इलाज में लापरवाही और शव से दुर्व्यवहार के मामले में अस्पताल के डॉक्टर डॉ. अभिषेक पांडे और अस्पताल प्रबंधक मनीष राजपूत के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद अब नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता चिरंज वर्मा आ.बिसाहू वर्मा, ग्राम अछोली, तहसील-धमधा, जिला दुर्ग द्वारा श्रेया हॉस्पिटल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर, धमथा जिला-दुर्ग के खिलाफउनकी माता पद्मा देवी की मौत होने के बावजूद बिना सहमति के मना करने के बाद भी एम्बुलेंस से शंकराचार्य हॉस्पिटल, जुनवानी भिलाई ले जाकर व्यावसायिक कदाचरण और अमानवीयता की शिकायत की गई थी.
धमधा स्थित श्रेया अस्पताल के डॉक्टर और प्रबंधक पर लगाये गये गंभीर आरोप सही पाए गए. महिला मरीज पदमा देवी के इलाज में लापरवाही और शव से दुर्व्यवहार के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का लाइसेंस DURG0473/HOS निरस्त कर दिया है.
जिलाधीश एवं नर्सिंग होम एक्ट के पर्यवेक्षी अधिकारी ने तीन दिन के भीतर अस्पताल बंद करने और लाइसेंस की मूल प्रति सीएमएचओ कार्यालय में जमा करने का आदेश जारी किया है. आरोप है कि अस्पताल कर्मी, महिला मरीज को उनके परिजनों को बताये बिना शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज ले गए. जहां उसे मृत घोषित किये जाने के बाद शव को लावारिश छोड़ दिया गया.
एसडीएम धमधा की अध्यक्षता में हुई जांच में ड्यूटी डॉक्टर डॉ.अभिषेक पांडेय और प्रबंधक मनीष राजपूत को दोषी पाया गया. जांच रिपोर्ट के 43 दिन बाद एफआईआर दर्ज हुई और उसके दो दिन बाद अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया. आपको बता दें कि श्रेया अस्पताल पर इलाज में लापरवाही के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं.
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