डायरिया का प्रकोप, 20 से ज्यादा पीड़ित, हफ्ते भर में 4 लोगों की मौत, नालियों से आ रहा पीने का गन्दा पानी, मचा हड़कंप, जिम्मेदार कौन?
Diarrhea outbreak, more than 20 victims, 4 people died in a week, dirty drinking water coming from drains, panic created, who is responsible?
जांजगीर : अकलतरा विकासखंड के अकलतरी गांव में डायरिया का प्रकोप फैला हुआ है. यहां 20 से ज्यादा लोग पीड़ित हैं. वहीं हफ्ते भर में चार पीड़ितों की मौत हुई है. गांव में डायरिया फैलने की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाकर मरीजों का प्राथमिक उपचार शुरु कर दिया है.
गांव में डायरिया फैलने का कारण अज्ञात है. स्वास्थ्य विभाग की टीम और पीएचईके अधिकारी डायरिया फैलने की वजह जानने में जुटे हैं. गांव के पानी की जांच करने सैंपल भेजा गया है. स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्रामीणों के इलाज में जुटी है. वहीं गंभीर मरीजों को अकलतरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया.
ग्रामीणों के मुताबिक पीने की टंकी का पानी टेप नल से घरों मे पहुंचता है. पाइपलाइन कई स्थानों से कटा हुआ है. अकलतरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीज के परिजन के मुताबिक सप्ताहभर में चार लोगों की मौत भी हो गई है.
जांच के लिए भेजा पानी का सैंपल
इस मामले में प्रशासन ने दूषित पानी से डायरिया फैलने की आशंका जताई है. पानी की जांच के लिए सैंपल भेजा गया है. घरों में ओआरएस घोल के पैकेट और दवाइयां बांटी गई है. पीड़ितों का इलाज गांव में ही कैंप लगाकर किया जा रहा है. एक गंभीर मरीज को अकलतरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है.
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और दवा की व्यवस्था की जा रही है. ग्रामीणों से आग्रह किया गया है कि वे उबला पानी पिएं और सफाई का विशेष ध्यान रखें.
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नालियों से आ रहा पीने का गन्दा पानी…वार्ड में मचा हड़कंप, जिम्मेदार कौन?
दुर्ग/भिलाई : इस्पात नगरी भिलाई के वार्ड 32 के कुम्हारपारा में एक बार फिर डायरिया फैलने लगा है. इलाके में पीने के पानी की पाइपलाइन नालियों के अंदर से गुजर रही है और कई जगहों पर अवैध कनेक्शन के लिए पाइपलाइन को पंचर कर दिया गया है. इस वजह से नालियों का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है. जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं.
अब तक डायरिया के 4 मरीज सामने आए हैं. जिसके बाद नगर निगम आयुक्त राजीव पांडेय ने इलाके का दौरा किया. इलाके की गंदगी और बजबजाती नालियों को देखकर वे नाराज हुए. इसके बाद शुक्रवार सुबह से नालियों की सफाई शुरु की गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार डायरिया फैलने पर निगम के अधिकारी आते हैं. बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. लेकिन धरातल पर कोई ठोस सुधार नहीं होता है. आईबीसी-24 की टीम जब वार्ड 32 के कुम्हारपारा पहुंची तो हालात और भी चिंताजनक नजर आए.
पुरानी पाइपलाइन के साथ-साथ नई संपवेल की पाइपलाइन भी नालियों के भीतर से गुजर रही है. नीली पाइपलाइन को कई जगह पंचर किया गया है. जिससे जोंक, केंचुए और गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है. स्थानीयों के मुताबिक अमृत मिशन योजना के तहत नई पाइपलाइन बिछाने के बजाय निगम ने सालों पुरानी पाइपलाइन में ही कनेक्शन जोड़ दिया. इस वार्ड में अधिकांश पाइपलाइनें नाली के अंदर से गुजरती हैं. दो साल पहले भी इसी वार्ड में डायरिया फैला था. जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे. उस समय तत्कालीन कलेक्टर पुष्पेन्द्र मीणा और आयुक्त रोहित व्यास ने 94 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर पुरानी टंकी की जगह नई टंकी से कनेक्शन जोड़ने की बात कही थी. लेकिन आज तक उसके लिए बजट स्वीकृत नहीं हो पाया. इस समस्या के लिए मोहल्ले के कुछ लोग भी जिम्मेदार हैं. लोगों ने निगम से वैध कनेक्शन लेने की बजाय पाइपलाइन को पंचर कर अवैध रूप से कनेक्शन ले लिया है. इसका खामियाजा अब पूरे मोहल्ले को भुगतना पड़ रहा है.
आयुक्त राजीव पांडेय के निरीक्षण के बाद इंजीनियरों की टीम ने सर्वे किया. जिससे पता चला कि करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी पाइपलाइन नाली में डूबी हुई है. और इसी पाइपलाइन से 500 से ज्यादा घरों में जलापूर्ति हो रही है. अब आयुक्त का कहना है कि इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा. वार्ड पार्षद की अनुपस्थिति में उनके पति धर्मेन्द्र दीवाकर ने बताया कि दो साल पहले डायरिया से दो मौतों के बाद उन्होंने लगातार निगम से नालियों की सफाई और पाइपलाइन हटाने की मांग की. लेकिन किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया.
फिलहाल तीन मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. लेकिन एक गर्भवती महिला अब भी अस्पताल में भर्ती है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि वे वर्षों से इसी गंदे पानी के सहारे जीने को मजबूर हैं. तंग गलियों के कारण यहां टैंकर भी नहीं पहुंच पाता और जो बोरिंग है. वह भी 15-20 मिनट में बंद हो जाती है. ऐसे में पाइपलाइन को पंचर कर पानी लेना उनकी मजबूरी बन गई है.
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