टिकट बंटवारे से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा, पैराशूट प्रत्याशी के विरोध में PCC चीफ दीपक बैज के खिलाफ नारेबाजी कर फूंका पुतला

Congress workers angry with ticket distribution created ruckus, raised slogans against PCC chief Deepak Baij and burnt his effigy in protest against the parachute candidate

टिकट बंटवारे से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा, पैराशूट प्रत्याशी के विरोध में PCC चीफ दीपक बैज के खिलाफ नारेबाजी कर फूंका पुतला

गरियाबंद : कांग्रेस ने नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर सोमवार को गरियाबंद नगर पालिका के 15 वार्डों में अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया. जिसके बाद अब कांग्रेस में विरोध शुरु हो गया है. टिकट काटने से नाराज कुछ कार्यकर्ताओं की नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि उन्होंने टिकट प्रभारी मनोज कंदोई और पीसीसी चीफ दीपक बैज के खिलाफ जमकर नारे लगाए और कार्यालय के बाहर उनका पुतला फूंककर विरोध दर्ज कराया.
मिली जानकारी के मुताबिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि टिकट के ऐलान से पहले कई दौर की बैठक के बाद सभी वार्डों में प्रत्याशियों के नामों पर सहमति बनी थी. संतोषी मंदिर वार्ड 2 से घनश्याम यादव, नया तालाब वार्ड 4 से गीता जगत और गोवर्धन वार्ड 12 से पुनाराम यादव का नाम तय किया गया था. लेकिन जब लिस्ट जारी की गई तो उसमें इन तीनों का नाम गायब था.
पार्टी कार्यकर्ताओं और दावेदारों ने “पैराशूट प्रत्याशी नहीं चलेगा” के नारों के साथ विरोध प्रदर्शन किया. नाराज कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन में जमकर हंगामा किया और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए.
विरोध कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे स्थानीय नेताओं को दरकिनार कर बाहरी लोगों को टिकट दिया गया है. नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर ऐसे प्रत्याशियों को चुना है. जिनका जनता से कोई सीधा जुड़ाव नहीं है.
टिकट वितरण के विरोध में कांग्रेस भवन में गहमागहमी का माहौल बन गया. आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और टिकट के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई.
गौरतलब है कि कांग्रेस में विवाद और हंगामे की घटनाएं नई नहीं हैं. सत्ता में रहते हुए भी पार्टी के भीतर इस तरह के विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं. हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनावों के दौरान भी ऐसी ही हालत बनी थी. जब कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था. फिलहाल पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाराज कार्यकर्ताओं को शांत करना और एकजुटता बनाए रखना है. आगामी चुनावों में पार्टी की छवि को इस तरह के घटनाक्रमों से नुकसान हो सकता है. अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को कैसे संभालता है और क्या नाराज कार्यकर्ताओं की मांगों पर कोई पुनर्विचार किया जाएगा या नहीं.
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