फर्जी ‘बैगा’ बनकर सरकारी नौकरी!, जाति प्रमाण पत्र घोटाले का बड़ा विस्फोट, रडार पर 55 लोग, बैगा समाज पहुंचे कलेक्ट्रेट, कहा- हमारा हक खा गए बाहरी लोग

A fake 'Baiga' has landed a government job! A major caste certificate scam has exploded, with 55 people under the radar. The Baiga community has reached the Collectorate, claiming that outsiders have usurped their rights.

फर्जी ‘बैगा’ बनकर सरकारी नौकरी!, जाति प्रमाण पत्र घोटाले का बड़ा विस्फोट, रडार पर 55 लोग, बैगा समाज पहुंचे कलेक्ट्रेट, कहा- हमारा हक खा गए बाहरी लोग

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही : मरवाही जिले से फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. जहां फर्जी जाति प्रमाण पत्र के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है. विशेष पिछड़ी जनजाति राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र ‘बैगा’ के नाम पर फर्जी तरीके से सरकारी नौकरियां हथियाने का आरोप लगाते हुए बैगा समाज के लोग बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा.
अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक अर्चना पोर्ते और ‘नांगा बैगा जनशक्ति संगठन’ के पदाधिकारियों के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बिलासपुर जिले के ग्राम पोड़ी (सीपत) के लगभग 55 लोगों ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए ‘बैगा’ जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया है.
समाज के प्रतिनिधियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने 150 से ज्यादा फर्जी नियुक्तियों का अंदेशा जताते हुए बताया कि वर्तमान में लिस्टेड 55 लोग फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं. इनमें शिक्षक, हाईकोर्ट कर्मचारी, आर्मी, BSF, कृषि विभाग और स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लोग शामिल हैं. अगर इनके परिवारों की जांच हो तो यह तादाद 150 से 200 के पार जा सकती है.
समाज ने कहा – असली बैगा युवाओं का हक मारा जा रहा
बैगा समाज का कहना है कि सरकार ने इस विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर बिना परीक्षा सीधी भर्ती का प्रावधान किया है. ताकि इनका आर्थिक उत्थान हो सके. लेकिन बाहरी लोग (मस्तूरी और अन्य क्षेत्रों के) फर्जी दस्तावेज बनवाकर इस विशेष सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. जिससे असली बैगा युवाओं का हक मारा जा रहा है.
कलेक्टर ने मामले की जांच कराने का दिया आश्वासन
बैगा समाज ने कहा कि जिन लोगों ने ये प्रमाण पत्र बनवाए हैं. उनका बैगा समाज से न तो कोई रोटी-बेटी का संबंध है और न ही वे कभी इनके गांवों में रहे हैं. उन्होंने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीएम की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं कि बिना वंशावली और मिसल की जांच किए ये प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिए गए. बैगा समाज ने मांग किया कि इस पूरे ‘रैकेट’ की जांच राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से कराई जाए और दोषी अफसरों पर कार्रवाई की जाए। कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आश्वासन दिया है.
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