छत्तीसगढ़ आवारा मवेशी समस्या, 13 किमी 110 मवेशियों को हांककर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, बोले- अब कलेक्टर साहब ही संभालें, नगर निगम पर लगा बड़ा आरोप
Stray cattle menace in Chhattisgarh: Villagers herded 110 cattle over a distance of 13 km to reach the Collectorate, stating that the Collector himself should now handle the situation; serious allegations leveled against the Municipal Corporation.
सरगुजा : छत्तीसगढ़ के सरगुजा में आवारा मवेशियों से किसान बेहद परेशान हैं. अंबिकापुर कलेक्टोरेट परिसर में बुधवार को एक अजीब नजारा देखने को मिला. वहां करीब 40 किसान 110 आवारा मवेशियों को खदेड़ते हुए सीधे दफ्तर के अंदर ले आए. किसान अपनी खेतों में बर्बाद हो रही फसल को लेकर बेहद दुखी और गुस्से में थे. उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखी.
किसान नेताओं और भकुरा के पूर्व सरपंच मनोज सिंह ने बताया कि खेतों में धान की फसल अभी ठीक से तैयार भी नहीं हुई है. इसके बावजूद मवेशी खेतों में घुसकर लगातार उत्पात मचा रहे हैं. किसान इतने सक्षम नहीं हैं कि अपने पूरे खेतों का घेराव करा सकें. खेती ही उनके जीवन का एकमात्र जरिया है. अगर मवेशी पूरी फसल खा जाएंगे तो वे क्या खाएंगे.
नगर निगम पर लगा बड़ा आरोप
ये ग्रामीण जिला मुख्यालय से लगे गांव परसा और भकुरा सहित आस-पास के गांव से आए थे. इन ग्रामीणों की नाराज़गी का सबब यह है कि नगर निगम जब मवेशी पकड़ता है तो अक्सर शहर से दूर इन गाँवों में छोड़ देता है. ग्रामीणों के साथ आए परसा के पूर्व सरपंच मनोज पोया और भकुरा के फुलचंद मानिकपुरी ने कहा -“निगम इन मवेशियों को दिन में पकड़ता है और रात में गांव में छोड़कर चले जाता है. अब ये मवेशी फसल को नुकसान करते हैं। सड़क पर हादसे की वजह बनते हैं.
” ग्रामीणों ने शिकायती लहजे में कहा-“ कई बार बोल चुके कि, गौ माता को यहां मत छोड़ा करें. गौठान,गौशाला है वहां रखें. लेकिन हालत नहीं सुधर रहे हैं. अब क्या करते कि सरकार हमारी सुने तो मवेशी ही हाँक कर कलेक्टर साहब के पास ले आए हैं. शायद अब सुन ले.”
बाहर से आने वाले मवेशी खेतों में भारी तबाही मचा रहे हैं. इससे गांव में फसल सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. हालांकि नगर निगम के पशु विभाग ने किसानों के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. इधर, सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा है कि किसानों की समस्या सुन ली गई है और इसके समाधान के लिए अफसरों को ठोस प्लानिंग करने के निर्देश दिए गए हैं.
धमतरी में तेज रफ्तार का कहर
दूसरी तरफ धमतरी जिले में आवारा पशुओं से जुड़ा एक दर्दनाक हादसा सामने आया है. नेशनल हाईवे-30 पर बुधवार देर रात एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने मवेशियों को रौंद दिया। यह भीषण दुर्घटना खपरी से अर्जुनी बाइपास के पास हुई. इस हादसे में चार दुधारू मवेशियों की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई. जबकि एक मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गया.
हादसे की खबर मिलते ही हाईवे गश्ती टीम मौके पर पहुंची. टीम ने मवेशियों के शवों को उठाकर डिवाइडर पर रखवाया. अगले दिन गुरुवार सुबह प्रशासनिक अमले ने जेसीबी बुलवाकर शवों को दफनाया. इस हादसे में स्थानीय ग्रामीण छबिकांत सिन्हा, जेठूराम सिन्हा और अन्य किसानों के दुधारू पशु मारे गए हैं.
आदेशों के बाद भी बने हाईवे डेंजर जोन
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद संबलपुर-श्यामतराई बाइपास पर मवेशियों का डेरा जमा रहता है. इस 11 किलोमीटर लंबे बाइपास पर दिन-रात मवेशी बैठे रहते हैं. जिससे तेज रफ्तार वाहनों की वजह से जानलेवा हादसों का खतरा लगातार बना रहता है. नेशनल हाईवे के अधिकारी आकाश अग्रवाल का कहना है कि हाईवे की निगरानी के लिए गश्ती टीम चौबीसों घंटे काम करती है.
सड़कों और राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की भी स्पष्ट गाइडलाइन है. गाइडलाइन के मुताबिक नेशनल हाईवे, एक्सप्रेस-वे और शहर की मुख्य सड़कों से पशुओं को फौरन हटाना अनिवार्य है. प्रशासन को संयुक्त अभियान चलाकर सभी पशुओं को सुरक्षित गौशालाओं और कैटल पाउंड में भेजना चाहिए.
इसके साथ ही 24 घंटे मॉनिटरिंग के लिए हाईवे पेट्रोलिंग टीम तैनात करने और हर हाईवे पर स्थायी हेल्पलाइन नंबर लगाने का नियम है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारी खुद जिम्मेदार होंगे. राज्य सरकारों को हर 8 हफ्ते में इसकी रिपोर्ट अदालत में देनी होती है. लेकिन इसके बाद भी जमीनी स्तर पर स्थितियां सुधरती नहीं दिख रही हैं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI?



