राज्योत्सव की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार से मारपीट, धरना खत्म कराने कलेक्टर पहुंचे पत्रकारों के बीच, लाठी भांजने वाला CAF जवान रजनीकांत सस्पेंड
A journalist covering the 'Rajyotsav' (state festival) was assaulted; the District Collector arrived among the journalists to help bring an end to their protest, and the CAF jawan, Rajnikant—who had brandished a baton—was suspended.
खैरागढ़ : राज्योत्सव की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ सीएएफ के एक जवान के द्वारा मारपीट किए जाने की घटना ने खैरागढ़ में पत्रकारों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया. बंसल न्यूज के संवाददाता एवं जिला पत्रकार संघ के सदस्य किशोर सोनी के साथ हुई मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद जिले के पत्रकार एकजुट होकर विरोध में उतर आए. पत्रकारों ने राजा फतेह सिंह मैदान के मुख्य द्वार पर करीब दो घंटे तक धरना देकर दोषी पुलिसकर्मी के तत्काल निलंबन और वैधानिक कार्रवाई की मांग की. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक लक्ष्य विनोद शर्मा ने फौरन संज्ञान लिया और संबंधित आरक्षक के निलंबन की कार्रवाई कराई. वहीं कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल भी मौके पर पहुंचे और पत्रकारों से बात कर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया. इस दौरान सीईओ जिला पंचायत प्रेम कुमार पटेल, एडिशनल कलेक्टर सुरेंद्र ठाकुर, एडिशनल एसपी रूपेश कुमार डांडे, एसडीएम अविनाश ठाकुर, एसडीओपी आशा रानी, टीआई भीमसेन यादव और तहसीलदार नेहा ध्रुव सहित जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी अपनी संवेदना के साथ मौजूद रहे.
मालुम हो कि घटना जिला प्रशासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सरस मेले और राज्योत्सव कार्यक्रम की कवरेज के दौरान हुई. जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह गौर के मुताबिक वरिष्ठ पत्रकार किशोर सोनी कार्यक्रम की रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान दोपहिया वाहन को पार्किंग में व्यवस्थित करने के दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात सीएएफ के जवान से उनका विवाद हो गया. आरोप है कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज करते हुए लाठी से मारपीट की गई. घटना का वीडियो सामने आने के बाद पत्रकारों में नाराजगी फैल गई और वे एकजुट होकर मैदान के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए.
दो घंटे चला विरोध, मौके पर पहुंचे कलेक्टर और एसपी
पत्रकारों का कहना था कि समाचार संकलन करना उनका पेशेवर दायित्व है. अगर कवरेज के दौरान किसी तरह की आपत्ति थी तो पुलिसकर्मी नियमानुसार कार्रवाई कर सकते थे. लेकिन मारपीट किसी भी हालत में सही नहीं है. धरने के दौरान पत्रकारों ने संबंधित जवान के तत्काल निलंबन, पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले सभी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग रखी. विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक लक्ष्य विनोद शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की पहल की. उन्होंने पूरे घटनाक्रम के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों से समन्वय किया और पीड़ित पत्रकार के साथ हुई घटना पर संवेदना व्यक्त की. कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए धरनारत पत्रकारों से चर्चा कर उनकी बात सुनी और उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया.
आधिकारिक आदेश जारी, आरक्षक रजनीकांत उपाध्याय सस्पेंड
पत्रकारों के विरोध और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद 8वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, राजनांदगांव के सेनानी कार्यालय से 2 नवंबर 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया. आदेश के मुताबिक राज्योत्सव के दौरान राजा फतेह सिंह मैदान में कानून व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात आरक्षक क्रमांक 319 रजनीकांत उपाध्याय को पत्रकार किशोर कुमार सोनी के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट तथा पुलिस सेवा की सामान्य शर्तों के उल्लंघन के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि में आरक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा और उन्हें वाहिनी मुख्यालय राजनांदगांव में संबद्ध किया गया है.
निलंबन के साथ निष्पक्ष जांच और जवाबदेही भी जरुरी
पत्रकार के साथ हुई इस घटना ने सार्वजनिक आयोजनों में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के व्यवहार और मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर अहम सवाल खड़े किए हैं. आरक्षक का निलंबन त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई का संकेत है. लेकिन अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और मारपीट में शामिल अन्य कर्मियों की भूमिका स्पष्ट होना भी जरूरी है. पत्रकारों की मांग है कि दोषी पाए जाने वाले हर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो. ताकि भविष्य में समाचार संकलन के दौरान ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. ज्ञात हो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका अहम है. पुलिस और मीडिया दोनों का दायित्व कानून एवं जनहित के दायरे में रहकर काम करना है. ऐसे में किसी भी विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया से ही होना चाहिए. अब पत्रकारों की निगाहें जांच के निष्कर्ष और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.
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