शिक्षा रथ के नाम पर शिक्षकों से 200-200 रुपये की वसूली!, WhatsApp मैसेज ने खोली पूरी कहानी, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

Teachers charged ₹200 each for the 'Shiksha Rath'! WhatsApp message reveals the whole story; serious questions raised about the Education Department's functioning.

शिक्षा रथ के नाम पर शिक्षकों से 200-200 रुपये की वसूली!, WhatsApp मैसेज ने खोली पूरी कहानी, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा : कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में सेवा संकल्प अभियान के तहत चलाए जा रहे शिक्षा रथ अभियान के नाम पर शिक्षकों से 200-200 रुपये की राशि वसूले जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यह मामला कर्री संकुल का है, जहां प्राथमिक विद्यालय साडामार में पदस्थ शिक्षक रमेश कुमार प्रजापति संकुल प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. सामने आए WhatsApp संदेश में संकुल के शिक्षकों से शिक्षा रथ के संचालन के लिए 200 रुपये का आर्थिक योगदान देने की बात स्पष्ट रुप से कही गई है और जानकारी के मुताबिक अब यह रकम शिक्षकों से हकीकत में वसूली भी जा चुकी है.
WhatsApp संदेश में 200 रुपये की तय रकम
सामने आए मैसेज में कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशों के अनुपालन का उल्लेख करते हुए शिक्षा रथ अभियान के लिए संकुल के शिक्षकों और SMC सदस्यों को संबोधित किया गया है. इसी मैसेज में साफ लिखा गया है कि “संकुल के सभी शिक्षक साथियों से अनुरोध है कि वे शिक्षा रथ के संचालन के लिए 200/- रुपये का आर्थिक योगदान जरुर दें.” यानी यहां सामान्य सहयोग की बात भर नहीं है. बल्कि हर शिक्षक के लिए 200 रुपये की निश्चित राशि का उल्लेख किया गया है. अब जबकि जानकारी के मुताबिक शिक्षकों से यह राशि ली जा चुकी है. सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर इस रकम को लेने का प्रशासनिक आधार क्या था.
कलेक्टर-डीईओ के निर्देशों का हवाला, आदेश कहां है?
WhatsApp मैसेज में कलेक्टर और डीईओ के निर्देशों का हवाला दिए जाने से अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में उच्च अधिकारियों ने शिक्षकों से 200-200 रुपये लेने का कोई लिखित निर्देश जारी किया था? अगर आदेश जारी हुआ था तो उसकी प्रति सामने आनी चाहिए और अगर ऐसा कोई आदेश नहीं था तो फिर उनके निर्देशों का हवाला देकर संकुल स्तर पर 200 रुपये प्रति शिक्षक की रकम किस आधार पर तय की गई. सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े शिक्षकों से आर्थिक राशि इकठ्ठा करने के मामले में आदेश और प्रक्रिया की स्पष्टता बेहद जरुरी है.
राशि वसूली जा चुकी, अब हिसाब भी सामने आए
मामला सिर्फ WhatsApp मैसेज तक सीमित नहीं है. शिक्षकों से 200-200 रुपये की राशि वसूली जा चुकी है. तो अब पूरी रकम का हिसाब भी सामने आना चाहिए. कर्री संकुल में कितने शिक्षक हैं. कितने शिक्षकों से रकम ली गई. कुल कितनी रकम जमा हुई. रकम किसके पास इकठ्ठा हुई. क्या रसीद दी गई और रकम किस खाते या माध्यम से जमा हुई—इन सभी बिंदुओं की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है.
शिक्षा रथ के नाम पर खरीदी गई सामग्री का भी हो हिसाब
मैसेज में गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए कॉपी, पानी की बोतल, कंपास, टिफिन जैसी सामग्री उपलब्ध कराने की बात कही गई है. अगर इन्हीं सामग्रियों की खरीदी के लिए शिक्षकों से राशि ली गई है तो खरीदी के बिल, भुगतान का रिकॉर्ड और सामग्री वितरण का विवरण भी सामने आना चाहिए. कितनी सामग्री खरीदी गई और कितने बच्चों को वितरित की गई. इसका रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा होना चाहिए.
‘सहयोग’ या तय रकम? यही है सबसे बड़ा सवाल
अगर शिक्षक अपनी इच्छा से किसी सामाजिक अभियान में मदद करते हैं तो यह अलग विषय है, लेकिन जब हर शिक्षक से 200 रुपये की निश्चित रकम लेने की बात कही जाए और रकम वास्तव में इकठ्ठा भी कर ली जाए. तो यह साफ करना जरुरी हो जाता है कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक था या शिक्षकों के लिए निर्धारित किया गया था. “आर्थिक योगदान अवश्य दें” जैसे शब्द इस मामले को और गंभीर बनाते हैं और इसी वजह से विभागीय जांच की जरुरत महसूस होती है.
अब शिक्षा विभाग को देना होगा जवाब
पूरे मामले में शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कर्री संकुल में शिक्षकों से 200-200 रुपये की रकम किसके निर्देश पर और किस प्रक्रिया के तहत ली गई. साथ ही WhatsApp मैसेज में कलेक्टर और डीईओ के निर्देशों का उल्लेख किस आधार पर किया गया. इसकी भी पुष्टि होनी चाहिए. अगर रकम विभागीय आदेश के तहत ली गई है तो आदेश सामने आए और अगर ऐसा कोई आदेश नहीं था तो संकुल स्तर पर रकम निर्धारित कर इकठ्ठा करने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
शिक्षा रथ का मकसद बच्चों तक शिक्षा सामग्री पहुंचाना है. लेकिन अब सवाल यह है कि इस अभियान के नाम पर शिक्षकों से 200-200 रुपये की रकम किस आदेश और किस अधिकार के तहत वसूली गई? रकम वसूली जा चुकी है तो उसका एक-एक रुपये का हिसाब भी सामने आना चाहिए.
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