सरपंच पर लाखों के सौदे का आरोप, आक्रोशित ग्रामीणों ने एसडीएम से लगे इंसाफ की गुहार, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही करने की मांग
Sarpanch accused of a deal worth lakhs; outraged villagers appeal to the SDM for justice and demand strict legal action against the guilty.
रायपुर : विकासखंड आरंग के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बोड़रा में सरकारी नियमों और पंचायती राज व्यवस्था को ताक पर रखकर शामलात चारागाह (सरकारी गोचर भूमि) पर अवैध निर्माण का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है. रसूखदार भू-माफियाओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के मकसद से बिना किसी सरकारी मंजूरी और बिना ग्रामसभा के प्रस्ताव के करीब 500 मीटर लंबी निजी सड़क और पुलिया का निर्माण धड़ल्ले से कराया जा रहा है.
इस मामले को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) आरंग को एक लिखित शिकायत सौंपकर चल रहे निर्माण कार्य पर तत्काल रोक (स्थगन) लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही करने की गुहार लगाई है.
ग्रामीणों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र के मुताबिक ग्राम पंचायत बोड़रा के पटवारी हल्का नंबर 27 के अंतर्गत आने वाली शामलात चारागाह भूमि (खसरा नंबर 527, कुल रकबा 9.020 हेक्टेयर) के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा किया जा रहा है.
यहां करीब 30 फीट चौड़ी और 500 मीटर लंबी सरकारी जमीन पर बाहरी मजदूरों और भारी मशीनों के जरिए एक निजी सड़क और पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है, जब सजग ग्रामीणों ने मौके पर काम कर रहे बाहरी लोगों से इस निर्माण की अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बारे में पूछताछ की, तो उनके द्वारा पंचायत का अनापत्ति प्रस्ताव होने की बात कही गई.
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस संवेदनशील विषय पर न तो गांव में कोई मुनादी कराई गई और न ही किसी आमसभा या ग्रामसभा में कोई प्रस्ताव पारित किया गया. आरोप है कि सरपंच ने अपने निजी स्वार्थ और पैसों के लेन-देन के चलते इस अवैध निर्माण को मूक सहमति दी है. शिकायत पत्र में सीधे तौर पर जमीन के कारोबारियों के नामों का उल्लेख करते हुए इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया गया है.
ग्रामीणों के मुताबिक इस अवैध सड़क और पुलिया का निर्माण सीधे ग्राम जरौद खार की ओर किया जा रहा है. जहां नाला पार पूर्व दिशा में जमीन कारोबारी साक्षी कुकरेजा और कांता तालरेखा की प्राइवेट जमीन (खसरा नंबर 669, 670/2) स्थित है. आशंका जताई जा रही है कि इन रसूखदार जमीन व्यापारियों की जमीन की कीमत चमकाने या फिर भविष्य में यहां किसी बड़े कारखाने (फैक्ट्री) के निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए इस सड़क को जबरन सरकारी चारागाह से होकर गुजारा जा रहा है. इस पूरे प्रोजेक्ट में ग्राम बोड़रा के निवासियों का दूर-दूर तक कोई वैधानिक हित नहीं है. ग्रामीणों ने इसे एक तरह से सरकारी चारागाह की जमीन को कौड़ियों के दाम बेचे जाने जैसा कृत्य बताया है.
उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी ग्राम पंचायत बोड़रा में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के प्रयास किए गए थे. जिस पर तत्परता दिखाते हुए अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार द्वारा बेदखली की प्रभावी कार्यवाही की जा चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की पिछली कार्यवाही को सार्थक बनाए रखने और शासकीय संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए इस नए अतिक्रमित निर्माण पर तुरंत 'स्टे' (स्थगन) लगाया जाना बेहद जरुरी है.
ग्रामीणों ने एसडीएम आरंग से पुरजोर मांग किया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता और पंचायती राज अधिनियम के नियमों का खुला उल्लंघन करने वाले अतिक्रमणकारियों और इसमें शामिल पंचायत प्रतिनिधियों पर आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए.
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