ACB समूह की कोल वाशरियों एवं ताप विद्युत परियोजनाओं की 1999 से वर्तमान तक सीबीआई–एसआईटी जांच की मांग, धरना देकर सौंपा ज्ञापन

Demand raised for a CBI-SIT probe into the ACB Group's coal washeries and thermal power projects covering the period from 1999 to the present; memorandum submitted following a sit-in protest.

ACB समूह की कोल वाशरियों एवं ताप विद्युत परियोजनाओं की 1999 से वर्तमान तक सीबीआई–एसआईटी जांच की मांग, धरना देकर सौंपा ज्ञापन

कोरबा : भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ द्वारा ACB समूह की कोयला वाशरियों, संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े गंभीर तकनीकी, पर्यावरणीय, वित्तीय एवं नियामकीय प्रश्नों की वर्ष 1999 से वर्तमान दिनांक तक स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर आज दीपका में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया.
भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ के जिला संयोजक कोरबा दिनेश यादव और मुख्य संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे ने बताया कि धरना आंदोलन के उपरांत कार्यपालन दंडाधिकारी एवं तहसीलदार दीपका अभिजीत राज भानु के जरिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय कैबिनेट सचिव, केंद्रीय कोयला मंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में सीबीआई जांच, सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) तथा राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्र बहु-विभागीय जांच दल गठित करने की प्रमुख मांग रखी गई.
मामला सिर्फ वाशरी का नहीं, पूरी कोयला–ईंधन–पर्यावरण व्यवस्था की जांच का है. पार्टी ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों, परिवहन दस्तावेजों, कोयला आवक-जावक, वाशरी संचालन, पर्यावरणीय अभिलेखों, तौल कांटा, रेलवे साइडिंग, ताप विद्युत परियोजनाओं, जल उपयोग, ईंधन, कर एवं अन्य अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरुरी है.
जांच का दायरा केवल किसी एक इकाई तक सीमित न रखते हुए Dipka, Gevra, Kusmunda, Chakabura, Ratija, Renki, Binjhari और संबद्ध कोल वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, परिवहन व्यवस्था एवं अन्य संबद्ध इकाइयों तक रखा जाए. क्षमता विस्तार और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की जांच हो.
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने मांग की कि प्रत्येक वाशरी की स्थापना से वर्तमान तक स्वीकृत क्षमता, पर्यावरण स्वीकृति, संशोधित पर्यावरण स्वीकृति, सीटीई/सीटीओ, वास्तविक कोयला प्राप्ति एवं वास्तविक प्रसंस्करण क्षमता का वर्षवार मिलान कराया जाए.
यह भी जांच हो कि क्षमता विस्तार के प्रत्येक चरण में लागू पर्यावरणीय प्रावधानों, जनसुनवाई, ग्रामसभा एवं जहां लागू हो वहां पेसा संबंधी प्रावधानों का वास्तविक रूप से पालन किया गया या नहीं.
एक करोड़ टन से अधिक परिलक्षित कोयला परिवहन का एक-एक टन जांच के दायरे में हो.
पार्टी ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों में परिलक्षित बड़े पैमाने के कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले के आवागमन का खदान से वाशरी, वाशरी से रेलवे/सड़क तथा वहां से ताप विद्युत संयंत्र तक स्वतंत्र मिलान होना चाहिए.
यदि अभिलेखीय परीक्षण में एक करोड़ टन से अधिक कोयला आवागमन सामने आता है. तो प्रत्येक टन का स्रोत, वाशरी में प्राप्ति, प्रसंस्करण, रिजेक्ट/मध्यवर्ती उत्पाद, प्रेषण, प्राप्तकर्ता एवं वास्तविक उपयोग निर्धारित किया जाए.
किसी मात्रा को जांच से पहले अवैध घोषित करने की मांग नहीं है. मांग सिर्फ इतनी है कि अभिलेखों में परिलक्षित प्रत्येक टन कोयले का वैज्ञानिक एवं स्वतंत्र हिसाब सामने आए.
रिजेक्ट कोयले के नाम पर मूल्यवान कोयले के विचलन की आशंका की जांच
रिजेक्ट कोयले की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता, ऊष्मीय मान, नमूना परीक्षण, भंडारण, प्रेषण एवं अंतिम उपयोग का स्वतंत्र फोरेंसिक परीक्षण कराया जाए.
यह भी सत्यापित किया जाए कि कहीं उपयोगी अथवा व्यावसायिक गुणवत्ता वाले कोयले को रिजेक्ट श्रेणी में दर्शाकर उसका अन्यत्र उपयोग या विचलन तो नहीं हुआ.
ताप विद्युत परियोजनाओं में ईंधन और बिजली उत्पादन का मिलान
संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं में वास्तविक कोयला/रिजेक्ट कोयला प्राप्ति, ईंधन उपयोग, बिजली उत्पादन एवं राख उत्पादन का स्वतंत्र तकनीकी मिलान कराया जाए.
कोयला प्राप्ति और वास्तविक बिजली उत्पादन के बीच असामान्य अंतर पाए जाने पर उसके कारण एवं अभिलेखीय आधार की जांच की जाए.
तौल कांटा, जीपीएस और डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच
पार्टी ने मांग की कि सभी संबंधित इकाइयों में—
तौल कांटा सर्वर, कच्चे डिजिटल लॉग, जीपीएस, फास्टैग, आरएफआईडी, एएनपीआर, सीसीटीवी, वाहन अभिलेख, रेलवे रेक, प्रेषण पर्चियां एवं अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का स्वतंत्र डिजिटल फोरेंसिक परीक्षण कराया जाए.
फर्जी वाहन, दोहरी प्रविष्टि, काल्पनिक यात्रा, गलत तौल, असामान्य परिवहन हानि अथवा कोयला मात्रा में हेरफेर की संभावना का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाए.
नदी–नालों, भूजल एवं पर्यावरण की स्वतंत्र जांच
पार्टी ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि औद्योगिक गतिविधियों से प्रभावित नदी, नाले, भूजल, कृषि भूमि एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए.
जल दोहन की स्वीकृत एवं वास्तविक मात्रा, औद्योगिक उपयोग, गाद/अपशिष्ट निस्तारण तथा संभावित प्रदूषण की जांच हो। प्रभावित जल स्रोतों के ऊपरी एवं निचले हिस्सों से नमूने लेकर स्वतंत्र मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से परीक्षण कराया जाए.
दस किलोमीटर क्षेत्र में प्रदूषण एवं जनस्वास्थ्य सर्वेक्षण
कोयला वाशरी, ताप विद्युत परियोजनाओं, रेलवे साइडिंग एवं भारी कोयला परिवहन से प्रभावित करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में वायु, धूल, राख, शोर, जल, कृषि भूमि तथा जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए.
पार्टी ने कहा कि औद्योगिक विकास जनता के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं हो सकता.
डीजल-बायोडीजल और कर लाभ की भी जांच
वर्ष 2015 से वर्तमान तक संबंधित वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं एवं परिवहन व्यवस्था में प्रयुक्त औद्योगिक डीजल/एचएसडी एवं बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन एवं वास्तविक उपयोग का वर्षवार मिलान कराया जाए.
मिली शिकायतों के मुताबिक अन्य राज्यों से बायोडीजल मंगाकर उपयोग किए जाने के आरोपों की भी स्वतंत्र जांच हो तथा संबंधित विक्रेता, बिल, ई-वे बिल, परिवहन, मात्रा, गुणवत्ता परीक्षण एवं वास्तविक उपयोग का सत्यापन कराया जाए.
साथ ही संबंधित कंपनियों को प्राप्त कर छूट, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क संबंधी लाभ, निवेश/परिवहन प्रोत्साहन एवं अन्य सरकारी सुविधाओं की भी वर्षवार जांच की जाए.
श्रमिकों के अधिकारों की भी जांच हो कोल वाशरियों, परिवहन, रेलवे साइडिंग एवं ताप विद्युत परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों के वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, दुर्घटना अभिलेख एवं ठेका श्रम संबंधी अनुपालन की जांच की जाए.
एसीबी ग्रुप के संबंध कंपनी MCCPL के JSW Energy द्वारा किए गए करीब ₹1,410 करोड़ के अधिग्रहण/क्रय-विक्रय, कंपनी की भूमि एवं परिसंपत्तियों, कोयला लिंकज, विद्युत अनुबंधों, लंबित न्यायालयीन एवं नियामकीय मामलों, वित्तीय एवं कर दायित्वों और अधिग्रहण से पूर्व किए गए Due Diligence की स्वतंत्र उच्चस्तरीय फोरेंसिक जांच कराई जाए और किसी भी अनियमितता या तथ्य छिपाने की स्थिति में संबंधित पक्षों की वैधानिक जवाबदेही तय की जाए.
कंपनी के साथ नियामकीय निगरानी की भी जांच हो
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कहा कि अगर सालों से इतनी बड़ी औद्योगिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं, तो संबंधित एसईसीएल, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम, जल संसाधन एवं अन्य नियामक विभागों द्वारा किए गए निरीक्षण, स्वीकृतियों एवं कार्रवाई की भी स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए.
यदि कहीं सरकारी निगरानी में लापरवाही अथवा विफलता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए.
डिजिटल साक्ष्य तत्काल सुरक्षित किए जाएं
पार्टी ने मांग की कि जांच प्रारंभ होने से पहले सभी संबंधित तौल कांटा सर्वर, जीपीएस, फास्टैग, सीसीटीवी, आरएफआईडी, ओसीईएमएस/सीईएमएस, ईआरपी/एसएपी, ईंधन, कोयला स्टॉक, रेलवे एवं वित्तीय डिजिटल अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं, ताकि किसी प्रकार के साक्ष्य को मिटाने, बदलने अथवा छेड़छाड़ करने की संभावना न रहे.
11 सितंबर को SECL मुख्यालय बिलासपुर में अगला चरण में धरना प्रदर्शन आंदोलन एवं 2 अक्टूबर इंसानियत सभा दीपका गेवरा में की जायगी!
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने स्पष्ट किया कि आज सौंपे गए ज्ञापन पर केंद्र एवं राज्य सरकार तथा संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा है.
अगर कार्रवाई संतोषजनक नहीं होती है. तो पार्टी द्वारा 11 सितंबर 2026 को SECL मुख्यालय, बिलासपुर के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर जांच की मांग को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद प्राप्त कार्रवाई एवं सरकारी जवाब के आधार पर आगामी लोकतांत्रिक आंदोलन की रणनीति घोषित की जाएगी.
धरना प्रदर्शन में भारतीय जनाधिकार पार्टी के कमल किशोर साव, कृष्ण टंडन, हेमंत पैगवार, संजय रत्नाकर संतोष अनंत, अमर खांडे, बजरंग रत्नाकर, शिव चौरसिया, जय सेवायक, शैलेन्द्र गोपाल, राकेश कुर्रे, करण लहरे, देव प्रसाद, प्रमोद यादव, राजेंद्र , अनिल कश्यप, तरुण कश्यप, किशन, शुक्रिता कुर्रे, लाल चौहान, लकी दिवाकर, आशीष तिवारी, नीरज, रामचंद्र कवर, गणेश कश्यप, नकुल सूर्यवंशी, यशवंत सूर्यवंशी, शिवचरण, योगेश और सैकड़ो कार्यकर्ता भारी तादाद में प्रभावित ग्रामों के पार्टी के पदाधिकारी गिरते पानी में आंदोलन करते रहे.
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