जनता के टैक्स पर डाका, जेम पोर्टल बना अफसरों का 'अलादीन का चिराग', ​अंधेर नगरी चौपट राजा, छत्तीसगढ़ वन विभाग में बिना जरूरत अरबों का माल डंप

Looting public tax money: GeM portal becomes 'Aladdin's lamp' for officials; a chaotic free-for-all—billions worth of goods dumped unnecessarily by the Chhattisgarh Forest Department.

जनता के टैक्स पर डाका, जेम पोर्टल बना अफसरों का 'अलादीन का चिराग', ​अंधेर नगरी चौपट राजा, छत्तीसगढ़ वन विभाग में बिना जरूरत अरबों का माल डंप

 धूप-बारिश में सड़ रही ‘कमीशनखोरी’
​ “अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता”
“माल-ए-मुफ़्त, दिल-ए-बेरहम”

​ “ट्रैक्टर का पता ही नहीं, चले हैं टैंकर चलाने;
बिना सर के “धड” को चलाने की तरकीब वन मंडल बालोद के पास
कागजों में बही विकास की नदियां, अब लगे हैं कबाड़ को छुपाने!”

​सरकारी खजाने की खुलेआम बंदरबांट
बालोद : ​छत्तीसगढ़ वन विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का एक ऐसा सनसनीखेज कारनामा उजागर हुआ है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की साख की धज्जियां उड़ा दी हैं. 
आम जनता के खून-पसीने की कमाई को विभागीय अधिकारियों और चहेते ठेकेदारों ने मिलकर ‘जेम पोर्टल’ (GeM Portal) के जरिए बेदर्दी से लुटाया है.
आलम यह है कि जिस सामग्री की विभाग को रत्ती भर भी जरूरत नहीं थी, उसकी करोडों रुपये में अंधाधुंध खरीदी कर बजट को ठिकाने लगा दिया गया.
​बालोद वन मंडल का ‘अजीबोगरीब’ कारनामा:
बिना ट्रैक्टर खरीद डाले 3000 लीटर के टैंकर!

​फ़िजूलख़र्च और गोलमाल का सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक उदाहरण बालोद वन मंडल में देखने को मिला है। विभाग के पास पानी खींचने या चलाने के लिए एक ट्रैक्टर तक मौजूद नहीं है, लेकिन कागजी खानापूर्ति और कमीशनखोरी के चक्कर में 3000-3000 लीटर क्षमता के 3 पानी टैंकर खरीद लिए गए!
​लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए ये टैंकर पिछले 6-
7 महीनों से लावारिस हालत में खुले आसमान के नीचे कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं.

सरकारी भवन,​ निस्तार डिपो और रेस्ट हाउस बने ‘कबाड़खाना’
​अधिकारियों ने अपनी कारस्तानी को छुपाने के लिए निस्तार डिपो, रेस्ट, रेंजर आवास और कार्यालय परिसरों के पिछे पेड़ों के नीचे कबाड़खाना बना दिया है.
खुले में फेंककर छुपाए गए सामानों की सूची लंबी है:

​पानी टंकी से लैस ड्रम रिक्शा व कचरा रिक्शा
​विभिन्न प्रकार के महंगे कूड़ादान (Dustbins)
​फायरवॉच उपकरण एवं अन्य सुरक्षा सामग्रियां
​ये सभी सामग्रियां अब धूप और बारिश की मार झेलते हुए कचरे के ढेर में बदल चुकी हैं। इन सभी अनियमितताओं के पुख्ता साक्ष्य और फोटोग्राफ्स उपलब्ध हैं, जो जांच एजेंसियों के लिए आंखें खोलने वाले हैं.

​रातों-रात भुगतानों का खेल vs मजदूरों का बुझता चूल्हा
​इस महाघोटाले का सबसे क्रूर पहलू यह है कि ठेकेदारों के साथ सांठगांठ करके गैर-जरूरी सामानों के बिल बनते ही रातों-रात भुगतान कर दिया जाता है।
दूसरी तरफ, विभाग के लिए दिन-रात पसीना बहाने वाले:
​कार्यालयीन कर्मचारी
​संविदाकर्मी ​जमीनी स्तर के दैनिक वेतनभोगी मजदूर
​इन्हें पिछले कई महीनों से वेतन और मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है.

बजट की कमी का बहाना बनाने वाले अफसरों के पास ठेकेदारों को लुटाने के लिए अरबों रुपये हैं, लेकिन गरीब मजदूरों के घरों में चूल्हा जलाने के लिए पैसे नहीं हैं.

बालोद से शुरू होगी उच्च स्तरीय जांच
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की आंच सबसे पहले बालोद वन मंडल तक पहुंचने वाली है, जहां से कई बड़े चेहरों के बेनकाब होने की पूरी संभावना है.

​जनहित में सीधी मांग:
​सूची हो सार्वजनिक: प्रदेश के सभी वन मंडलों में जेम पोर्टल से हुई खरीदी की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए.
​शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन:

एक स्वतंत्र जांच दल गठित कर धरातल पर जाकर सामानों की शत-प्रतिशत जांच कराई जाए.
​तत्काल FIR और वसूली:
जनता के पैसों की डकैती करने वाले दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो और नुकसान की भरपाई उनकी संपत्ति व अधिकारी के वेतन से की जाए.
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