पांडुका पंचायत में मनरेगा में गड़बड़ झाला, सरपंच ने परिवार सहित निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के नाम, मनरेगा भुगतान से लेकर राशन और अतिक्रमण पर उठे सवाल

Irregularities in MGNREGA work in Panduka Panchayat; questions raised regarding the Sarpanch and their family members (who are elected public representatives), covering issues ranging from MGNREGA payments to ration distribution and encroachment.

पांडुका पंचायत में मनरेगा में गड़बड़ झाला, सरपंच ने परिवार सहित निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के नाम, मनरेगा भुगतान से लेकर राशन और अतिक्रमण पर उठे सवाल

गरियाबंद : गरियाबंद जिले के ग्राम पंचायत पाण्डुका के सरपंच भानु ध्रुव के खिलाफ सरपंच पद का दरूपयोग कर वित्तीय अनिमितता कदाचरण कर्तब्य में लापरवाही और शासकीय राशि के गबन के मामले में जांच तेज हो गई है. सरपंच पर अपने पद का दुरूपयोग कर सरकारी भवन रहते हुए गरीबी रेखा के राशन का अवैध उपभोग और अपने परिवार रिश्तेदारों पंच और जनपद सदस्य के नाम फर्जी जॉब कार्ड बनाकर फर्जी हाजरी भरकर मनरेगा की मजदूरी राशि चढ़ाकर अवैध लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं. जनपद पंचायत छुरा द्वारा गठित तीन सदस्यों की टीम जांच के लिए पाण्डुका पंचायत पहुंच पूछताछ की जा रही है.
किसके नाम से कितनी राशि प्राप्त की
जांच पत्र के मुताबिक सरपंच भानु ध्रुव ने पांडुका मुरूम तालाब गहरीकरण एवं पचरी निर्माण तथा नया तालाब गहरीकरण कार्य में 10 दिन काम किया और ₹1,660 का भुगतान लिया. कन्हैया चक्रधारी, कम्प्यूटर ऑपरेटर ने पांडुका नाली निर्माण कार्य में 42 दिन काम किया और ₹10,146 का भुगतान लिया. सीताराम,भृत्य ग्राम पंचायत पांडुका ने बोरवेल रिचार्ज पीट निर्माण, पीएम आवास कार्य और सामुदायिक जल संचयन नवीनीकरण सहित कार्यों में 31 दिन काम किया और ₹7,659 का भुगतान लिया. भोज ध्रुव, सरपंच के भाभी ने सामुदायिक जल संचयन नवीनीकरण और पैठू तालाब के कार्य में 18 दिन काम किया और ₹4,200 का भुगतान लिया। कंचन देवांगन, जनपद सदस्य ने पीएमएवाई (जी) आवास निर्माण तथा मुरूम तालाब गहरीकरण-पचरी निर्माण में 12 दिन काम किया और ₹2,477 का भुगतान लिया. वहीं गौतम शर्मा, पंच ने सामुदायिक जल संचयन नवीनीकरण एवं पैठू तालाब के कार्य में 10 दिन काम किया और ₹2,340 का भुगतान लिया.
जांच पत्र में इन भुगतानों को लेकर शिकायतों का उल्लेख करते हुए संबंधित दस्तावेज और जवाब मांगा गया है. इन छह नामों पर कुल 123 कार्य दिवस और ₹28,482 के भुगतान का उल्लेख है. खास बात हैं की जब पहले टीम ने उपरोक्त लोगो से पूछताछ की थी तो उन्होंने इसे आरोप बताकर नकार दिया था. लेकिन प्रमाणिक दस्तावेज सामने आने के बाद आज जान्च्ग टीम के सामने स्वीकार की उनके द्वारा कार्य की राशि प्राप्त की गई है.
इसी तरह सरपंच भानु ध्रुव के खिलाफ अपने भाई के साथ सिंचाई विभाग के शासकीय भवन में रहते हुए राशन कार्ड क्रमांक 225458346212 के जरिए खुद को अकेले गरीबी रेखा का दर्शाकर अंत्योदय योजना का लाभ लेते हुए गरीबी रेखा का राशन अवैध तरीके से प्राप्त किया है. क्योंकि सरकारी क्वार्टर पर रहने वाला व्यक्ति बीपीएल की पात्रता नहीं रखना यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 एवं छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2016 का गंभीर उल्लंघन एवं धोखाधड़ी है. इसके बावजूद सरपंच पद में रहते हुए लगातार सरकारी राशन लिया गया. जून जुलाई में राशन दुकान से मिले सरकारी दस्तावेजों में इसकी पुष्टि भी हुई है. अब इस मामले में जांच टीम के खिलाफ सरपंच गोल-गोल जवाब दे रही है और लगातार जवाब देने के लिए समय मांग रही है.
इसी तरह सरपंच भानु ध्रुव द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर अपने भाई डिगेश ध्रुव जो कि सरकारी कर्मचारी है और भोज ध्रुव तथा खुद अतिक्रमण कर सरकारी जमीन पर काबिज थे. ग्राम पंचायत द्वारा अवैध अतिक्रमण हटाने के बारे में ग्राम पंचायत से भानु ध्रुव को नोटिस जारी किया गया लेकिन बाद में ग्राम पंचायत/ ग्राम सभा का प्रस्ताव में भानु ध्रुव का नाम हटा दिया गया. जबकि जब पंचायत और राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी तो सरपंच द्वारा खुद अपना और अपने भाई का मकान ग्रामवासियों के सामने ही तुड़वाया गया था. बाद में तात्कालिक नायब तहसीलदार से साठगांठ कर पंचनामा से अपना नाम हटवा दिया गया. इस मामले की भी जांच और पूछताछ जारी है.
जांच के दौरान भी विवाद, जवाब को लेकर उठ रहे सवाल
शिकायत से जुड़े लोगों के मुताबिक जांच दल द्वारा सरपंच से करीब दो बार पूछताछ की जा चुकी है और लिखित जवाब पेश करने के लिए कई बार समय दिया गया. लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया गया है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरपंच जांच में सहयोग करने के बजाय जांच टीम को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं. जांच के दौरान सरपंच की भाभी और परिवार के अन्य सदस्यों के जांच टीम के सामने पहुंचने और शिकायतकर्ताओं से विवाद की स्थिति बनने की बात भी सामने आई है.
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अपने बचाव में पंचायत से जुड़े सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ या उन्हें बदलने का प्रयास किया जा रहा है. उनका दावा है कि अतिक्रमण कार्रवाई से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज नायब तहसीलदार कार्यालय से गायब या उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं. हालांकि शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज अपने पास होने की बात कही है. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. जांच में दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
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