अंकिता भंडारी हत्याकांड: पुलिस की हिरासत में बेटी की मौत का इंसाफ मांगने दिल्ली आए माता-पिता, राज्यपाल दुष्यंत गौतम का किया विरोध

Ankita Bhandari murder case: Parents arrive in Delhi seeking justice for their daughter’s death while in police custody; protest against Governor Dushyant Gautam.

अंकिता भंडारी हत्याकांड: पुलिस की हिरासत में बेटी की मौत का इंसाफ मांगने दिल्ली आए माता-पिता, राज्यपाल दुष्यंत गौतम का किया विरोध

दिल्ली : 2022 में उत्तराखंड में हत्या की शिकार हुई 19 साल की अंकिता भंडारी के माता-पिता को गुरुवार (15 अक्टूबर, 2026) की सुबह तड़के रिहा कर दिया गया. उन्हें सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के खिलाफ इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन करते समय हिरासत में लिया गया था.
अभिभावकों के अलावा, कांग्रेस के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया. जिनमें पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा, सोशल मीडिया विभाग के प्रमुख सुप्रित्या श्रीनाते और भारतीय युवा कांग्रेस के प्रमुख उदय भानु चिब शामिल थे.
हिरासत के दौरान उनके पिता ने केंद्र को गौतम की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया. अंकिता के पिता ने धमकी दी कि अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती है तो वे राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे. परिवार का आरोप है कि अंकिता की मौत में गौतम की अहम भूमिका थी.
अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा नेता गौतम का नाम इस मामले में बार-बार घसीटा गया है, क्योंकि उन पर इस मामले से जुड़े वीआईपी होने का आरोप है. उन्हें सोमवार (12 अक्टूबर) को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया. भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव गौतम उत्तराखंड के लिए पार्टी के प्रभारी के रूप में कार्य कर चुके हैं.
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दुष्यंत गौतम को गवर्नर बनाए जाने पर राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक पत्र लिखा है. उन्होंने कहा, “19 वर्षीय अंकिता भंडारी ने एक वीआईपी के लिए अपनी गरिमा से समझौता नहीं किया, इसलिए उसकी हत्या कर दी गई.”
राहुल गांधी ने दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वे इस नियुक्ति से हैरान हैं.
भाजपा नेता के बेटे ने डाला था अंकिता पर दबाव
उन्होंने लिखा, “अंकिता की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई. वह ऋषिकेश के पास वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं. उसके मालिक पुलकित आर्य ने उस पर ‘वीआईपी मेहमानों को खास सर्विस’ देने के लिए दबाव डाला. उसके मना करने पर भाजपा नेता के बेटे पुलकित और उसके दो कर्मचारियों ने उसे मार डाला. तीनों अब उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.”
‘वह वीआईपी कौन थे?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा, “लेकिन सवा चार साल से बिना जवाब के सवाल है कि वह वीआईपी कौन थे? इस साल जनवरी में पूरे उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने यह जांच सीबीआई को सौंप दी, जो अभी चल रही है.”
राहुल गांधी ने आगे लिखा, “इसी बीच सिक्किम के गवर्नर के तौर पर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के बारे में जानकर मुझे झटका लगा. अंकिता के परिवार समेत कई लोगों का आरोप है कि दुष्यंत गौतम इस मामले से जुड़े हुए हैं. वीआईपी कौन था. यह पता लगाने के लिए सीबीआई जांच चल रही है. लेकिन यह बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है.”
नियुक्ति से सीबीआई जांच के दायरे से बाहर हो जाएंगे
नेता प्रतिपक्ष ने लिखा, “गवर्नर राज्य सरकार का संवैधानिक प्रमुख होता है. ठीक वैसे ही जैसे आप भारत सरकार के संवैधानिक प्रमुख हैं. जब तक वह पद पर हैं, उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती या जारी नहीं रखी जा सकती. ऐसे में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति उन्हें सीबीआई की पहुंच से बाहर कर देती है.”
राहुल ने लिखा, “एक जांच जिसका नतीजा कभी मुकदमा नहीं हो सकता, वह सिर्फ नाम की जांच है. एक गवर्नर को अपने राज्य के लोगों का भरोसा जीतना चाहिए. और इस तथ्य को कोई झुठला नहीं सकता.”
‘पीएम ने पूरी तरह अनदेखी साबित की’
आगे लिखा, “मुझे पता है कि गवर्नर की नियुक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट की सलाह पर होती है. पीएम मोदी ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर महिलाओं की सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी साबित कर दी है. हालांकि, लंबे समय से चली आ रही परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति को सरकार को चेतावनी देने का अधिकार है और अनुच्छेद 74(1) आपको सलाह पर दोबारा विचार करने का अधिकार देता है. ऐसे में मैं आपको आखिरी उपाय के तौर पर लिख रहा हूं.”
कांग्रेस नेता ने राष्ट्रपति से मांग करते हुए कहा, “मैं आपसे निवेदन करता हूं कि आप सरकार से इस नियुक्ति पर दोबारा विचार करने के लिए कहें और जब तक सीबीआई अपनी जांच पूरी नहीं कर लेती, दुष्यंत गौतम पद न संभालें.”
राहुल गांधी ने लिखा, “अंकिता भंडारी ने उससे की गई घिनौनी मांग को मना कर दिया और अपनी जान दे दी। उसके माता-पिता जो अभी भी न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अब इस नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं और पुलिस उन्हें हिरासत में ले रही है. राष्ट्रपति महोदया, कृपया मामले में कार्रवाई करें और अंकिता के माता-पिता की न्याय की उम्मीद मत टूटने दीजिए.
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अंकिता भंडारी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ कांग्रेस का प्रदर्शन, VIP कनेक्शन को लेकर उठाए सवाल
रायपुर :  उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन कर न्याय की मांग उठाई. प्रदर्शन के केंद्र में कथित वीआईपी कनेक्शन, सीबीआई जांच की मांग की. कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो जांच पूरी होने तक संबंधित नियुक्ति पर रोक क्यों नहीं लगाई जानी चाहिए?
ऋषिकेश में काम करती थी अंकिता भंडारी
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र के एक रिजॉर्ट में काम करती थी. सितंबर 2022 में उसकी हत्या कर दी गई थी. इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है.
कांग्रेस का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है. पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति का नाम या भूमिका सामने आती है. तो उसके बारे में तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए. प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस नेताओं ने महिला सुरक्षा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग भी उठाई.
सीबीआई जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग
मामले ने उस समय फिर राजनीतिक तूल पकड़ा जब अंकिता के परिवार ने मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. हालांकि, बीजेपी नेता ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. किसी भी व्यक्ति की भूमिका या दोष का निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए.
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने और जांच के कथित वीआईपी पहलू पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. अब सवाल यह है कि सीबीआई जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अंकिता के परिवार को न्याय की मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है.
कांग्रेस बोलीं- राहुल गांधी लड़ रहे न्याय की लड़ाई
वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं ने केंद्र की सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि महिलाओं की सम्मान की बात करने वाले अं​किता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच हुए बिना ही अपने वीआईपी नेता को मनपसंद पद पर नियुक्ति दे रही है. यह वही पार्टी है जो सत्ता में रहते हुए भी बेटी के साथ हुए अत्याचार को लेकर न्याय नहीं दिला पा रहे हैं. उनके माता पिता और उनके लिए लड़ रहे उत्तराखंड के लोग इस बात से बहुत आक्रोशित और व्यथित है. राहुल गांधी और कांग्रेस उनके लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उस पीड़ित बच्ची के माता पिता को जिस बेहरमी से इंडिया गेट से उठाया गया। वह शर्मनाक और निंदनीय है.
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