ट्रांसफार्मर ठीक करते कर्मचारी की करंट लगने से मौत, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम, लगाया लापरवाही का आरोप, जांच के आदेश जारी

A worker died of electrocution while repairing a transformer; villagers staged a road blockade, alleging negligence, and ordered an investigation.

ट्रांसफार्मर ठीक करते कर्मचारी की करंट लगने से मौत, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम, लगाया लापरवाही का आरोप, जांच के आदेश जारी

दुर्ग : दुर्ग जिले के जेवरा-सिरसा पुलिस चौकी क्षेत्र के भटगांव में रविवार को करंट लगने से बिजली कर्मचारी की मौत हो गई. मृतक की पहचान संतोष ठाकुर उम्र 50 साल के रुप में हुई है. इस हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया. ग्रामीणों ने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया. बताया जा रहा है कि अचानक पावर ट्रांसफार्मर में लाइट प्रवाहित होने से यह घटना हुई.
मिली जानकारी के मुताबिक भटगांव के नजदीक लगे ट्रांसफार्मर में रविवार सुबह तकनीकी खराबी आ गई थी. शिकायत मिलने पर बिजली विभाग का एक नियमित कर्मचारी और निजी कर्मचारी संतोष ठाकुर मरम्मत के लिए मौके पर पहुंचे. ट्रांसफार्मर ठीक करते समय संतोष ठाकुर अचानक करंट की चपेट में आ गए.
करंट लगने से संतोष ठाकुर वहीं गिर गए. साथी कर्मचारी और आसपास मौजूद ग्रामीण उन्हें फौरन अस्पताल ले गए. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि विभाग कर्मचारियों को बिना सुरक्षा उपकरण, जैसे सेफ्टी किट और दस्ताने, के काम पर भेजता है. लोग इस बात पर सवाल भी उठा रहे हैं कि जब सप्लाई बाधित थी तो पोल में करंट कैसे आया.
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उचित सुरक्षा मापदंडों का पालन नहीं किया गया और बिना लाइन शटडाउन किए ही संतोष से काम करवाया जा रहा था. ग्रामीणों का मानना है कि अगर सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता तो संतोष की जान बच सकती थी.
हादसे की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और मामले की जांच की मांग को लेकर मुख्य मार्ग पर उतर आए. उन्होंने सड़क पर चक्का जाम कर दिया. जिससे आधे घंटे से ज्यादा समय तक यातायात बाधित रहा.
खबर मिलने पर प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिजनों-ग्रामीणों से बातचीत की. ग्रामीणों ने साफ किया कि जब तक विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं आते और लिखित आश्वासन नहीं देते. तब तक वे जाम नहीं हटाएंगे. शासन ने 25 हजार रुपए की सहायता राशि दी. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया. वहीं विभागीय अधिकारियों ने मामले की आंतरिक जांच कराने और कारणों का पता लगाने की बात कही है. जांच के बाद दोषी पर कार्रवाई की जाएगी.
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