बारिश में बह गई सड़क, विधायक ने 3 करोड़ से बनवाने की थी घोषणा, दो साल बाद भी नहीं बन पाई?, ग्रामीण श्रमदान से बोरियों में रेत भर बना रहे रास्ता

The road was washed away by rain; the MLA had announced its construction at a cost of ₹3 crore, yet it remains unbuilt even after two years. Villagers are now constructing a path themselves by filling sacks with sand through voluntary labor.

बारिश में बह गई सड़क, विधायक ने 3 करोड़ से बनवाने की थी घोषणा, दो साल बाद भी नहीं बन पाई?, ग्रामीण श्रमदान से बोरियों में रेत भर बना रहे रास्ता

गरियाबंद/फिंगेश्वर : गरियाबंद जिले के राजिम विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत फिंगेश्वर ब्लाक में सड़क निर्माण से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है. जहां सालों से सड़क बनने का इंतजार कर रहे ग्रामीण अब खुद ही रास्ता सुधारने के लिए आगे आ गए हैं. प्रशासन और विधायक, जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट ग्रामीण अब थक चुके हैं. हालात ऐसे हैं कि गांव के लोगों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एकजुट होकर श्रमदान करना पड़ रहा है.
चुनाव जीतने के बाद विधायक ने की थी घोषणा, अब भूले
मिली जानकारी के मूताबिक़ सोनासिल्ली-जामगांव मार्ग के निर्माण के लिए करीब तीन साल पहले क्षेत्र के विधायक रोहित साहू ने चुनाव जीतने के बाद तीन करोड़ रुपये से क्षेत्र में सड़क बनवाने की घोषणा की थी. इसके बावजूद सड़क निर्माण का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है.
ग्राम सरगोड़ व आसपास गांव के जंगल से बहकर आने वाली पानी के गुजरने पुलिया नहीं बनाया गया था. जिससे पानी ने सड़क को ही बहा दिया. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल हालत की वजह से रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को होती है. जिन्हें पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.
बारिश ने बढ़ाई परेशानी, सड़क का हिस्सा बहा
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान सड़क की हालत और भी खराब हो गई. मार्ग का करीब 100 मीटर हिस्सा बारिश में बह जाने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. जगह-जगह खराब रास्ते और कीचड़ की वजह से लोगों को आने-जाने में बेहद परेशानी हो रही है.
ग्रामीणों के लिए यह मार्ग सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण रास्ता है. सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है. उनका कहना है कि जब सड़क निर्माण के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है. तो फिर धरातल पर काम शुरु होने और पूरा होने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
ग्रामीण श्रमदान से बोरियों में रेत भर बना रहे रास्ता
प्रशासनिक व्यवस्था से उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीण अब अपने स्तर पर रास्ते को चलने लायक बनाने में जुट गए हैं. इसके लिए ग्रामीण आपस में चंदा इकठ्ठा कर रहे हैं और श्रमदान के जरिए सड़क सुधारने का प्रयास कर रहे हैं. ग्रामीणों की यह पहल बताती है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोगों को किस तरह खुद आगे आकर समस्याओं का समाधान तलाशना पड़ रहा है.
हालांकि ग्रामीणों के प्रयास से अस्थायी राहत मिल सकती है. लेकिन सड़क का स्थायी निर्माण जरूरी है. बारिश में बह चुके हिस्से की मरम्मत और पूरे मार्ग का निर्माण ही समस्या का असल समाधान हो सकता है.
बड़ा सवाल : आखिर कब पूरी होगी विधायक की घोषणा? कब मिलेगी ग्रामीणों को राहत?
अब सवाल यह है कि करीब तीन करोड़ रुपये की स्वीकृति के बावजूद सड़क निर्माण में देरी क्यों हुई और जिम्मेदार विभाग इस दिशा में कब तक ठोस कदम उठाएगा? ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी परेशानी सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी जल्द कार्रवाई करेंगे. ताकि बच्चों और आम नागरिकों को बेहतर सड़क सुविधा मिल सके.
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