भ्रष्टाचार की ‘बहती गंगा’ में बह गई विकास की नाली, हरदी में सरपंच-सचिव का ‘जादुई’ निर्माण, एक महीने में ही हो गया धराशायी, ग्रामीणों में नाराजगी

The drain of development has been swept away by the 'flowing Ganges' of corruption. The 'magical' construction of the Sarpanch and Secretary in Hardi has collapsed within a month, angering villagers.

भ्रष्टाचार की ‘बहती गंगा’ में बह गई विकास की नाली, हरदी में सरपंच-सचिव का ‘जादुई’ निर्माण, एक महीने में ही हो गया धराशायी, ग्रामीणों में नाराजगी

गरियाबंद : कहते हैं कि विकास की राह कांटों भरी होती है. लेकिन गरियाबंद के ग्राम पंचायत हरदी में तो विकास की राह ‘कीचड़’ भरी हो गई है. यहां सरकारी खजाने से लाखों रुपये की लागत से एक ऐसी ‘अमर’ नाली का निर्माण कराया गया. जिसकी उम्र किसी बुलबुले से भी कम निकली. निर्माण के महज 30 दिन बीतते-बीतते नाली ने दम तोड़ दिया. मानो वह खुद शर्मिंदा थी कि उसे बिना पानी (क्योरिंग) और घटिया सामग्री के सहारे खड़ा किया गया है...
शीतला पारा के ग्रामीण चित्रसेन साहू और चेतन लाल साहू की मानें, तो यह निर्माण कार्य किसी चमत्कार से कम नहीं था. यहां सीमेंट को पानी पिलाने की रस्म (क्योरिंग) शायद इसलिए नहीं निभाई गई. क्योंकि जिम्मेदारों को लगा होगा कि नाली तो खुद पानी बहाने के लिए है. इसे अलग से पानी की क्या जरुरत? परिणाम स्वरुप नाली अब टुकड़ों में बंटकर अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है.
लाखों की नाली टूटने का सबसे ज्यादा नुकसान मोहल्ले के गौरव पथ को हुआ है. नाली जाम होने से सारा गंदा पानी अब सड़क पर है. जिस सड़क को ‘गौरव’ का प्रतीक होना था. वह अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है. पैदल चलना तो दूर, यहां से गुजरना अब किसी चुनौती से कम नहीं है.
ग्रामीणों ने जब इस “टूटते विकास” पर पंचायत बुलाई तो उम्मीद थी कि सरपंच, सचिव और ठेकेदार अपनी जवाबदेही तय करेंगे. लेकिन सूत्रों के मुताबिक जिम्मेदारों के पास ग्रामीणों के बुनियादी सवालों के कोई संतोषजनक जवाब नहीं थे. जब तर्क खत्म हो जाते हैं. तो अक्सर चुप्पी या गोल-मोल जवाब ही सहारा बनते हैं. अब ग्रामीण इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं. ताकि कागजों पर चमकने वाला विकास जमीन पर भी टिक सके.
इस गंभीर मामले को लेकर जब मिडिया ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत गरियाबंद से जानकारी चाही तो उन्होंने साफ किया कि मामला उनके संज्ञान में आया है. उन्होंने निर्माण में गुणवत्ता की कमी की बात स्वीकारते हुए कहा कि “उक्त निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है और जो भी कमियां हैं, उन्हें समय रहते ठीक करा लिया जाएगा. हालांकि, ग्रामीणों का सवाल अब भी वही है कि निर्माण के शुरुआती दौर में ही ऐसी लापरवाही क्यों बरती गई?
ग्रामीणों ने कैमरे के सामने तो नाली का मुद्दा उठाया. लेकिन ‘ऑफ कैमरा’ चर्चाओं में भ्रष्टाचार की फेहरिस्त काफी लंबी नजर आई. शौचालय निर्माण से लेकर अन्य पंचायत कार्यों में जिस तरह की अव्यवस्था की चर्चा गलियों में है. वह इशारा करती है कि हरदी पंचायत में विकास कार्यों की सघन निगरानी की जरुरत है.
एक जिम्मेदार मीडिया इकाई के रुप में हमारा मकसद तथ्यों को उजागर करना और जनसमस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना है. नाली का टूटना और गौरव पथ का दलदल में तब्दील होना प्रत्यक्ष प्रमाण है. उम्मीद है कि उच्चाधिकारी सिर्फ आश्वासन न देकर, जमीनी स्तर पर दोषियों की जवाबदेही तय करेंगे ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके.
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