स्कूल के फर्श में बनी बड़ी सुरंग, जर्जर छत के नीचे 162 बच्चे पढ़ने को मजबूर, दो साल से अधूरा पड़ा स्कूल भवन निर्माण, विद्यार्थियों को अब भी पुराने जर्जर भवन का सहारा

A large tunnel has formed in the school floor, and 162 children are forced to study beneath a dilapidated roof; construction of the new school building has remained incomplete for two years, leaving students still reliant on the old, crumbling structure.

स्कूल के फर्श में बनी बड़ी सुरंग, जर्जर छत के नीचे 162 बच्चे पढ़ने को मजबूर, दो साल से अधूरा पड़ा स्कूल भवन निर्माण, विद्यार्थियों को अब भी पुराने जर्जर भवन का सहारा

स्कूल के फर्श में बनी बड़ी सुरंग, जर्जर छत के नीचे 162 बच्चे पढ़ने को मजबूर
गरियाबंद : गरियाबंद जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर आए दिन सवाल उठते रहे हैं. सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण देने के दावे करती है. लेकिन ग्रामीण अंचलों के कई स्कूलों की जमीनी तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है. ऐसा ही मामला गरियाबंद जिले के ग्राम पंचायत खरीपथरा से सामने आया है. जहां प्राथमिक शाला का भवन लंबे समय से बदहाली का शिकार है.
स्कूल की छत जर्जर हो चुकी है और कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है. वहीं स्कूल के फर्श की हालत भी बेहद खराब है. फर्श में बड़ी सुरंगनुमा जगह बन चुकी है. जबकि दीवारों में जगह-जगह दरारें नजर आने लगी हैं. ऐसे जर्जर भवन में छोटे-छोटे बच्चों की कक्षाएं संचालित होना उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.
फर्श में बड़ी सुरंग, नीचे से खोखला हो चुका हिस्सा
स्कूल भवन के फर्श को देखकर स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. फर्श का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर सुरंगनुमा रूप ले चुका है. ऐसे में बच्चों के पैर फिसलने या फर्श का कमजोर हिस्सा और धंसने का खतरा बना हुआ है.
एक तरफ जर्जर छत बच्चों के सिर पर खतरा बनी हुई है, तो दूसरी तरफ नीचे का फर्श भी सुरक्षित नहीं है. दीवारों में आई दरारें भवन की मजबूती पर अलग सवाल खड़े कर रही हैं.
162 बच्चों की पढ़ाई, लेकिन सुरक्षित स्कूल भवन नहीं
जानकारी के मुताबिक खरीपथरा में संचालित प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला को मिलाकर करीब 162 बच्चे अध्ययनरत हैं. यानी बड़ी तादाद में बच्चे रोज इसी परिसर में पढ़ाई करने पहुंचते हैं.
बच्चों के लिए स्कूल उनका दूसरा घर माना जाता है. लेकिन जब उसी स्कूल भवन की छत, फर्श और दीवारें सुरक्षित नहीं हों तो अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक है.
गरियाबंद जिले में इससे पहले भी जर्जर स्कूल भवनों के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के मामले सामने आ चुके हैं.
2005 में हुई थी स्कूल की स्थापना, 21 साल बाद भी नए भवन का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक खरीपथरा में स्कूल की स्थापना वर्ष 2005 में की गई थी. अब स्कूल को करीब 21 वर्ष पूरे होने को हैं. लेकिन इसके बावजूद नए स्कूल भवन की स्वीकृति नहीं मिलने की बात सामने आ रही है.
सवाल यह है कि जब पुराना भवन लगातार जर्जर होता जा रहा है और उसमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा दिखाई दे रहा है. तो नए भवन के लिए अब तक ठोस पहल क्यों नहीं हुई?
क्या कहते हैं अधिकारी?
इस संवेदनशील मामले को लेकर जब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजेश चंद्राकर से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी.
DEO राजेश चंद्राकर ने कहा- “मैं इस स्कूल को दिखवा लेता हूं”
अधिकारी के इस बयान के बाद अब उम्मीद है कि स्कूल भवन की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाएगा और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
हादसे का इंतजार या पहले होगी कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करेगा या उससे पहले ही बच्चों को सुरक्षित भवन उपलब्ध कराया जाएगा?
जर्जर छत, फर्श में बनी बड़ी सुरंग और दीवारों में दरारों के बीच 162 बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जरूरत है कि संबंधित विभाग स्कूल भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराए और अगर भवन असुरक्षित है तो बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के साथ नए भवन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए. क्योंकि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक है, जब बच्चों को पढ़ने के लिए सुरक्षित स्कूल भवन भी मिले.
अब देखना होगा कि DEO के “स्कूल को दिखवा लेता हूं” वाले आश्वासन के बाद खरीपथरा के स्कूल की तस्वीर बदलती है या फिर बच्चे इसी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर रहते हैं.
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दो साल से अधूरा पड़ा स्कूल भवन निर्माण, विद्यार्थियों को अब भी पुराने जर्जर भवन का सहारा
गरियाबंद/मैनपुर : क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए स्कूल भवनों के निर्माण को मंजूरी तो दी गई. लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति के चलते विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. विकासखंड मैनपुर अंतर्गत दुरस्थ क्षेत्र के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कुरलापारा का नया भवन निर्माण लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है.
मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2024-25 में शाला भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई थी. निर्माण स्थल पर दीवारें खड़ी कर दी गई हैं. कई स्थानों पर कॉलम के लिए लोहे की सरिया भी निकली हुई है. लेकिन इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया. वर्तमान में अधूरे भवन परिसर में झाड़ियां और घास उग आई हैं. जिससे निर्माण स्थल की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है.
वहीं दूसरी तरफ स्कूल का पुराना भवन जर्जर हो गई है. ऐसे में नए भवन का निर्माण अधूरा रहने से विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने परेशानी बनी हुई है.
ग्रामीणों का कहना है कि जब नए भवन के निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है और निर्माण कार्य शुरू भी हो गया था. तो उसे सालों तक अधूरा छोड़ देना गंभीर लापरवाही का विषय है. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि अधूरे पड़े भवन का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए. ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके.
अब सवाल यह है कि 2024-25 में स्वीकृत स्कूल भवन का निर्माण दो साल बाद भी पूरा क्यों नहीं हो पाया? निर्माण कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है और भवन को पूरा करने की समय-सीमा क्या है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग से अपेक्षित है.
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