फॉरेस्ट सेकरेट्री को DFO मनीष कश्यप ने दी गालियां, 15 दिन बाद सरकार ने अब किया सस्पेंड, 10 साल की नौकरी में दूसरी बार निलंबित
DFO Manish Kashyap abused the Forest Secretary, and after 15 days, the government suspended him, his second time in 10 years of service.
मनेंद्रगढ़ : वन सचिव से फोन पर अभद्र व्यवहार के आरोप में मनेंद्रगढ़ डीएफओ मनीष कश्यप को सस्पेंड कर दिया गया है. यह दूसरी बार है जब कश्यप के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है.
फॉरेस्ट सेकरेट्री के साथ बदतमीजी करने वाले DFO पर गाज गिर गयी है. राज्य सरकार ने डीएफओ मनीष कश्यप को सस्पेंड कर दिया है. ये दूसरा मौका है. जब मनीष कश्यप को राज्य सरकार ने सस्पेंड किया है. इस बारे में राज्य सरकार ने आदेश जारी कर दिया है. आदेश में भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि वन सचिव से फोन पर अभद्रतापूर्ण व्यवहार करने के मामले में मनेंद्रगढ़ वन मंडलाधिकारी (DFO) मनीष कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.
खास बात यह है कि मनीष कश्यप दूसरी बार निलंबन की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. जिससे उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारियों के सिलसिले में विभाग स्तर पर जानकारियां जुटाई जा रही थीं. इसी कड़ी में वन सचिव ने डीएफओ मनीष कश्यप से फोन पर आवश्यक विवरण मांगा था. आरोप है कि इस दौरान मनीष कश्यप ने न सिर्फ सहयोग करने से इंकार किया, बल्कि फोन पर अमर्यादित और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. वरिष्ठ अधिकारी के साथ इस तरह के व्यवहार को प्रशासन ने गंभीर अनुशासनहीनता माना.
मामले की शिकायत जल्द ही उच्च स्तर तक पहुंच गई. बताया जा रहा है कि शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद पूरे मामले की समीक्षा की गई और उसके बाद मनीष कश्यप को सस्पेंड करने का फैसला लिया गया. इस कार्रवाई को नौकरशाही में सख्त चेतावनी के रुप में देखा जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बदसलूकी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
यह पहला मौका नहीं है जब मनीष कश्यप विवादों में घिरे हों. इससे पहले, पिछली सरकार के कार्यकाल में जब वे सूरजपुर जिले में डीएफओ के पद पर पदस्थ थे. तब ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था. उस समय उन पर प्रशासनिक लापरवाही और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप लगे थे.
लगातार दूसरी बार निलंबन की कार्रवाई ने मनीष कश्यप की प्रशासनिक साख को कठघरे में खड़ा कर दिया है. विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ अभद्र व्यवहार तक सीमित नहीं है. बल्कि इससे सरकारी तंत्र में अनुशासन और कार्य संस्कृति पर भी असर पड़ता है. ऐसे में सरकार ने सख्त कदम उठाकर यह साफ कर दिया है कि पद और पावर के दुरुपयोग पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी.
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