गरियाबंद शिक्षा विभाग में एरियर्स राशि घोटाले का आरोप, 1.35 करोड़ की शेष राशि से शुरू हुआ करोड़ों का खेल, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग

Allegations of an arrears fund scam have surfaced in the Gariaband Education Department; a multi-crore racket originated from a residual balance of ₹1.35 crore, and demands are being raised for action against the officials responsible.

गरियाबंद शिक्षा विभाग में एरियर्स राशि घोटाले का आरोप, 1.35 करोड़ की शेष राशि से शुरू हुआ करोड़ों का खेल, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग

गरियाबंद : गरियाबंद जिले में शिक्षा विभाग के संविलयन के बाद भी बंद नहीं हुआ सर्व शिक्षा अभियान का खाता, 2018 से 2025 के बीच 63 लाख रुपये आहरण का आरोप, सभी तत्कालीन बीईओ और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच की मांग जिले क़े विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) फिंगेश्वर कार्यालय में सर्व शिक्षा अभियान (SSA) की एरियर्स राशि के भुगतान में गंभीर वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के कथित गबन का मामला सामने आया है.
मिले दस्तावेजों और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 में सर्व शिक्षा अभियान अंतर्गत कार्यरत शिक्षा कर्मियों के एरियर्स भुगतान के लिए करीब 3 करोड़ रुपये का आबंटन जारी किया गया था.
एरियर्स भुगतान के बाद बड़ी राशि शेष रह गई. इसके बाद 1 जुलाई 2018 को शिक्षा कर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलयन हो गया. संविलयन के समय सर्व शिक्षा अभियान मद में करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये शेष थे. जिन्हें नियमानुसार शिक्षा विभाग या शासन को वापस किया जाना चाहिए था. लेकिन आरोप है कि न तो राशि वापस की गई और न ही इसकी जानकारी शासन को दी गई.
आरोपों के मुताबिक यहीं से पूरे खेल की शुरुआत हुई. संविलयन के बाद भी सर्व शिक्षा अभियान का बैंक खाता संचालित होता रहा और वर्ष 2018 से 2025 के बीच करीब 63 लाख रुपये चेक और बैंक खाते के जरिए आहरित कर लिए गए.
सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन आहरित राशियों का कोई उल्लेख कैशबुक, लेखा रजिस्टर अथवा अन्य वित्तीय अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया. सूत्रों के मुताबिक उपलब्ध बैंक दस्तावेजों में चेक और खातों के जरिए राशि निकाले जाने के सबूत हैं. लेकिन संबंधित कार्यालय के अभिलेखों में उसका रिकॉर्ड नहीं मिला. इससे पूरे मामले में सरकारी धन के कथित गबन की आशंका और गहरा गई है.
शिकायतकर्ताओं ने मांग किया कि वर्ष 2015 से 2025 के बीच फिंगेश्वर में पदस्थ रहे सभी तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO), खाता संचालन से जुड़े अधिकारियों, आहरण एवं संवितरण से जुड़े कर्मचारियों और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए. साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि किस अधिकारी के कार्यकाल में कितनी रकम निकाली गई और किसके प्रभारकाल में यह वित्तीय लेन-देन हुआ.
आरोप यह भी है कि सिर्फ सर्व शिक्षा अभियान ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग, मध्यान्ह भोजन योजना सहित अन्य योजनाओं के खातों में भी लाखों रुपये रखकर वित्तीय अनियमितताएं की गईं. इसलिए फिंगेश्वर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पूर्व में संचालित सभी बैंक खातों की स्वतंत्र वित्तीय जांच कराने की मांग उठाई गई है.
सूत्रों का दावा है कि इस मामले से जुड़े बैंक स्टेटमेंट, चेक, भुगतान संबंधी दस्तावेज एवं अन्य साक्ष्य जल्द सार्वजनिक किए जाएंगे. इसके साथ ही शिकायत जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री सहित अन्य सक्षम प्राधिकारियों से की जाएगी.
शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि जरुरत पड़ी तो इस मामले में सभी दस्तावेजों और सबूतोंके साथ मामला उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI?