राजिम कुंभ कल्प में संत समागम का उद्घाटन, शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कहा- संतों की उपस्थिति से राजिम कुंभ कल्प का महत्व बढ़ा
Inauguration of Sant Samagam in Rajim Kumbh Kalp, Assembly Speaker Dr. Raman Singh participated, said- The importance of Rajim Kumbh Kalp increased with the presence of saints.
राजिम : तीर्थ नगरी राजिम के त्रिवेणी संगम में 21 फरवरी शुक्रवार को विराट संत समागम का उद्घाटन किया गया. उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद थे। संत समागम में मुुख्य अतिथि डॉ. रमन सिंह सहित साधु संतों एवं महात्माओं ने मंच में स्थापित भगवान श्री राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्जवलित कर पूजा अर्चना की. सभी ने भगवान श्री राजीव लोचन से प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद गिरी, महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद महाराज, महामंडलेश्वर मनमोहनदास महाराज, ब्रह्मचारी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, दंडी स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ महाराज, संत द्वारकेश महाराज, संत गुरुशरण महाराज (पंडोखर सरकार), महंत नरेन्द्रदास महाराज, स्वामी राजीव लोचनदास महाराज, रामबालक दास महाराज, साध्वी महंत प्रज्ञा भारती सहित विशिष्ट साधु-संतों का सानिध्य एवं आशीर्वचन श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ.
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ये हमारा सौभाग्य है कि यहां पर हमें संतों के आशीर्वाद और उनका दर्शन लाभ मिल रहा है. डॉ. सिंह ने मंच पर ब्रह्मलीन संत कवि पवन दीवान की पुण्यतिथि पर नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि विराट संत समागम में संत छत्तीसगढ़ में मौजूद हैं। ये हमारा सौभाग्य है कि प्रयागराज महाकुंभ स्नान के बाद राजिम पहुंचे हैं. हम प्रयागराज को यहां नहीं ला सकते है, लेकिन संतों की उपस्थिति से राजिम कुंभ कल्प का महत्व बढ़ा है. चित्रोत्पला का उल्लेख पुराणों में है। श्रृंगी ऋषि द्वारा महानदी का उद्गम हुआ। मेरे मुख्यमंत्रीत्व काल में 2005-06 में साधु-संतों की उपस्थित में राजिम में कुंभ का आयोजन करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं धन्यवाद देना चाहूंगा समस्त संतों को जिनकी जागृति से सनातन धर्म आगे बढ़ रहा है. हमारा प्रयास होगा कि संतों को जो गौरवशाली स्थान रहा है उसे हम आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा। आप सभी संत राजिम आते रहें और आपकी गरिमामय उपस्थिति में राजिम की शोभा बढ़ती रहे.
आचार्य महामंडलेश्व्र विशोकानंद महाराज ने छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया का नारा दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में माता कौशल्या का जन्म हुआ है, यहां अनेक मंदिर है। छत्तीसगढ़ सबसे बढ़िया है क्योंकि भारत के अनेक राज्य जो नहीं कर सके वो कार्य इन्होंने किया है। छत्तीसगढ़ ने प्रयागराज को हाइजैक करके यहां ले आए। तीर्थ प्रयागराज छत्तीसगढ़ नहीं आ सकता पर छत्तीसगढ़ियों ने इन महात्माओं को जो तीर्थ प्रयागराज के प्रतिनिधि है उनको यहां पर विराजमान किया है।
महाराज जी ने कहा कि सरकार के प्रयास से यहां पर फिर से राजिम कुंभ प्रारंभ हुआ है। इसलिए हम यहां पर एक भावना करते हैं कि प्रयागराज में जो कुंभ स्नान करके पुण्य कमाया है उसका फल इस प्रदेश को भी प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि आपको एक निश्छल मन से कह रहा हूं 1974 में पहला कुंभ मैं हरिद्वार किया था। 1988 में मैं महामंडलेश्वर बनकर के प्रयाग में कुंभ किया, जो अब 2025 तक किया। मेरे को वहां के 2025 के कुंभ से इतनी खुशी नहीं हुई जितनी अपने राजिम के 2025 के कुंभ से मेरा मन जो गदगद है। हमारी भावना है हमारे संतो की कुछ अपील है की राजिम में व्यवस्था के साथ संतों की धार्मिक स्थलों की शिक्षण स्थलों की व्यापक व्यवस्था हो जिससे कि इस कुंभ का स्वरूप और भी विराट गति को प्राप्त करें।
कार्यक्रम में महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू, विधायक अभनपुर इंद्र कुमार साहू, पूर्व सांसद चंदूलाल साहू, नगर पंचायतों के नवनिर्वाचित अध्यक्षगण, रायपुर कमिश्नर महादेव कांवरे, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल विवेक आचार्य, गरियाबंद कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल, एसएसपी अजीत कुकरेजा, पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा सहित बड़ी संख्या में साधु-संतों विशिष्ट जनों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण की गरिमामय उपस्थिति रही.
जानकी जयंती पर राजिम में निकाली गई विशाल शोभायात्रा : सैकड़ों भक्तों ने किया अमृत स्नान
राजिम : जानकी जयंती के अवसर पर राजिम नगर साहू संघ एवं कबीर सेवा आश्रम राजिम के संयुक्त तत्वावधान में विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा राजिम के मां महामाया मंदिर से निकलकर पं. सुंदरलाल शर्मा चौक से गायत्री मंदिर, व्हीआईवी मार्ग, महोत्सव स्थल को पार करते हुए त्रिवेणी संगम में बने शाही कुंड पहुंचा। जहां पूजा अर्चना के बाद सैकड़ों भक्तों ने अमृत स्नान किया।
शोभायात्रा में राजिम भक्तिन माता समिति के अध्यक्ष लाला साहू, होरीलाल साहू, नगर साहू संघ राजिम के अध्यक्ष भवानी शंकर साहू, कबीर आश्रम के प्रमुख मेघनाथ साहू, टंकेश्वर सोनकर, अजय पटेल, नंदी शर्मा, घनश्याम साहू, रामकुमार साहू, राजू साहू, विष्णु साहू, तरुण साहू, झाडू राम, शिवराम साहू, हरिनाथ साहू, रूपलाल साहू, ईश्वरी साहू, प्रकाश साहू, रमेश साहू, ईश्वर साहू, देवलाल साहू शामिल थे।
सुबह श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान
जानकी जयंती के अवसर पर सुबह स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ अटल घाट, संगम घाट, स्वर्ण तीर्थ घाट, नेहरू घाट, स्नान कुंड में उमड़ी। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दीपदान भी किया। महिलाओं, पुरुषों सहित बच्चों ने स्नान उपरांत सूर्यदेव को अर्ध्य दिया तथा रेत से शिवलिंग बनाकर जलाभिषेक किया।
तीर्थ नगरी राजिम में जानकी जयंती पर स्नान का विशेष महत्व हैं। लोककथा के अनुसार त्रेता युग में वनवास के दौरान राम, लक्ष्मण सहित देवी सीता राजिम पहुंचकर लोमष ऋषि के दर्शन किए और आगे के मार्ग के लिए उन्होंने मार्ग दर्शन लिया। इस दौरान नदी में स्नान कर देवी सीता ने रेत से शिवलिंग बनाकर जलाभिषेक कर पूजन किया। तब से रेत से शिवलिंग बनाने की परम्परा चल पड़ी। माना जाता है कि इस तरह अनुष्ठान करने से हरि और हर सहित देवी सीता प्रसन्न होकर अबाध कृपा बरसाती है.
ब्रह्मलीन संत कवि पवन दीवान को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
राजिम। ब्रह्मलीन संत कवि पवन दीवान की आज नवमी पुण्यतिथि पर राजिम स्थित उनके ब्रह्मचर्य आश्रम में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम के तहत ब्रह्मचर्य आश्रम के ब्रह्मचारी बटुकों द्वारा उनकी आत्मा शांति हेतु यज्ञ हवन आदि अनुष्ठान किया गया। तत्पश्चात भजन गीत का आयोजन किया गया, जिसमें महंत रामसुंदर दास, समिति के अध्यक्ष संतोष उपाध्याय, अर्जुन नयन तिवारी, अरुण शर्मा, अरुण दीवान, अनिल तिवारी, कृष्ण कुमार शर्मा, केके पुराणिक, युवराज शर्मा सहित राजिम के अनेक नगरवासी एवं उनके शिष्य उपस्थित थे।
पुण्यतिथि कार्यक्रम में श्रद्धांजलि देने पहुंचे महंत रामसुंदर दास ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हमें राजिम जैसे तीर्थ और पवन दीवान के तपोभूमि में उपस्थित होने का अवसर प्राप्त हुआ। पवन दीवान ने संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए इस संस्था को स्थापित कर पूरे समर्पित भाव से छत्तीसगढ़ की सेवा की। वे विधायक, मंत्री और सांसद भी बने। तमाम पदों में रहने के बाद भी उनकी छत्तीसगढ़ी भावना से ओत-प्रोत निश्चल हंसी उनके परिचय का पर्याय थी। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। भागवताचार्य होने के साथ ही साथ वे एक अच्छे कवि भी थे। उनकी स्मृतियों को सहेज कर रखने का प्रयास किया जाएगा। उनके द्वारा बनाए गये इस संस्थान में बटुकों को निशुल्क भोजन, शिक्षा, कर्तव्य किया था, उसे समिति पूरी तन्मयता के साथ करते हुए आगे बढ़ाएगी। मेरी भावभरी श्रद्धांजलि उनके प्रति समर्पित है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे
उत्तर रामायण पर आधारित लाइट एंड साउंड शो कार्यक्रम ने दर्शकों को किया रोमांचित
महादेव हिरावानी के कार्यक्रम ने बांधा समा
राजिम। राजिम कुंभ कल्प के सांस्कृतिक मंच में 9वें दिन उत्तर रामायण पर आधारित लाइट एंड साउंड शो कार्यक्रम ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। मंच पर बहुत ही सुंदर ढंग से लाइट एवं साउंड के माध्यम से उत्तर रामायण को जीवंत रूप से दर्शाया गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक कलाकारों ने प्रस्तुति दी। जिसमें भगवान श्री राम एवं उनके सुपुत्र लव-कुश के बीच संवाद को शानदार तरीके से दर्शाया गया। अवध में आकर लव-कुश ने गीत के माध्यम से राम चरित्र की व्याख्या की। राम द्वारा सीता त्याग के पश्चात उस दुख से उबरने के लिए अश्वमेघ यज्ञ की शानदार प्रस्तुति दी गई। जिसे देखकर दर्शक भावुक हो गए।
लोक कला मंच के महादेव हिरावानी ने बांधा समा
सांस्कृतिक मंच में छत्तीसगढ के प्रसिद्ध कलाकार महादेव हिरवानी ने लोक कलामंच की शुरूवात गणेश वंदना से की। गजानंद गौरी के लाल..., भोले बाबा ला कइसे..., तोर कारण बइहा बने..., माटी होही तोर चोला रे संगी..., कर्मा गीत के साथ ही झमाझम प्रस्तुति से बस्तर की लोक संस्कृति का दर्शन कराया। जिसे देख दर्शक भी झुम उठे।
लेवेन्द्र चंद्राकर और नारायण पचपेड़िया ने लोक कलामंच के माध्यम से छत्तीसगढ की विभिन्न संस्कृतियों को बहुत ही सुंदर ढंग से समझाया। जिसे दर्शकों ने खूब सराहना की। रमेसर गंर्धव ने लुप्त हो रही नाचा की विधा को मंच पर पुनर्जीवित किया है। नाचा के माध्यम से सामाजिक संदेश भी दिया गया। शंभुराम टोंण्डरे की सतनाम भजन की शानदार प्रस्तुति से दर्शको की खूब तालियॉ बटोरी। श्री विश्वास ने गीत और गजल के माध्यम से दर्शकों को बांधे रखा। अरूण निर्मलकर ने जसगीत झांकी प्रस्तुत दी। जिसमें माता के सेवा गीतों से दर्शक भी भक्ति के रंग मे डूब गए। देवेन्द्र साहू की टीम ने मानस गायन मे सीता अपहरण के घटना की व्याख्या की। धामसिंग की टीम ने लोक कलामंच की शानदार प्रस्तुति दी। कौशल बाई साहू की टीम ने परम्परिक वेश-भूषा मे सुआ नृत्य हाथ और पैर की सुंदर ताल से प्रस्तुत किया। प्राची निगम ने मनमोहक कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी। महेश पाल ने सुमधुर भजनों, मनीषा साहू की टीम ने मानस गायन एवं दीलिप नवरत्न ने लोक कलामंच की जानदार प्रस्तुति दी। वेदकुमारी ने पंडवानी गायन कपालिक शैली में बहुत ही सुदंर हाव-भाव के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने महाभारत की कथा ला सुनले...., जनम-जनम के दुख मिट जाथे जैसे भजन से मंच को सुशोभित किया। इसी मंच पर शंकर भोला भंडारी..., सगुरी नहाए बर वो..., झन जा राधा होबे लाले-लाल वो..., नदिया के तीर मा पुन्नी के रात... जैसे सुमधुर गीतों को सुनकर दर्शक झूम उठे
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