गंगरेल के आसपास दिखे हिंसक जानवर के पैरों के निशान, इधर 25 हाथियों के दल ने मचाई तबाही, सेल्फी ले रहे युवक को मार डाला, फैली दहशत

Footprints of a predatory animal were seen near Gangrel, where a group of 25 elephants wreaked havoc, killing a young man taking a selfie, spreading panic.

गंगरेल के आसपास दिखे हिंसक जानवर के पैरों के निशान, इधर 25 हाथियों के दल ने मचाई तबाही, सेल्फी ले रहे युवक को मार डाला, फैली दहशत

गंगरेल के आसपास दिखे हिंसक जानवर के पैरों के निशान, फैली दहशत

धमतरी : गंगरेल क्षेत्र से एक बार फिर दहशत से जुड़ी बड़ी खबर निकल कर सामने आई है. जिसमे किसी हिंसक जंगली जानवर के पैरों के निशान क्षेत्र में दिखाई दिए हैं. हालांकि इसे बाघ के पैरों के निशान लोग मान रहे हैं. मगर इसकी वनविभाग ने फिलहाल पुष्टि नहीं की है. वन अफसरों का कहना है कि इसे ट्रेस करने के बाद ही पता चल पायेगा कि यह बाघ के पैरों के निशान है या फिर किसी अन्य जानवर के..
मिली जानकारी के मुताबिक गंगरेल क्षेत्र के ग्राम फुटहा मुड़ा क्षेत्र के जंगल में पैरो के निशान दिखाई दिए है. जिसे लेकर वनविभाग ने एहतियातन आसपास के गांव बरारी कोटा भरी मुड़पार समेत अन्य गांव में मुनादी कराई है.
पिछले दिनों इसी क्षेत्र में हाथी की मौजूदगी काफी चर्चा का विषय बनी थी. जिसे लेकर दहशत भी व्याप्त थी हाथी के जाने के बाद अब इन पैरों के निशान ने क्षेत्र में किसी हिंसक जानवर की मौजूदगी का अहसास दिला दिया है. इस बारे में वनविभाग के डिप्टी रेंजर श्री तिवारी ने बताया कि क्षेत्र में किसी हिंसक जानवर के पैरों के निशान मिले हैं. जिसकी पुष्टि की जा रही है कि वह किस जानवर के हैं. यह जांच के बाद ही पता चल पायेगा.
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25 हाथियों के दल ने मचाई तबाही, सेल्फी ले रहे युवक को मार डाला

सरगुजा : सोमवार की शाम को 25 हाथियों का दल अंबिकापुर के सरहदी इलाके में पहुंच गया. शहर से लगे गांव खैरबार में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया है. हाथियों का ये दल लुचकी घाट में नेशनल हाइवे पार कर लालमाटी गांव में पहुंच गया. हाथियों ने एक युवक को मौत के घाट उतार दिया.
हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइस देने के साथ ही हाथियों को ट्रैक करने का काम शुरु किया. शहर के नजदीक हाथी होने की वजह से पूरा प्रशासन भी वन विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है. पुलिस, सीएएफ के जवान, वन विभाग की टीम और प्रशासनिक अधिकारी हाथियों को यहां से जंगल की तरफ खदेड़ने का प्लान बना रहे हैं.
मौके पर वन विभाग की एसडीओ थीं, एसडीओ फारेस्ट जेनीबेस कुजूर ने बताया कि सूरजपुर वन मंडल से हाथियों का दल सरगुजा वन मंडल में प्रवेश कर गया है. आठ अक्टूबर को हाथियों का दल सरगुजा में प्रवेश किया था. सकालो के जंगल में ये हाथी थे, लेकिन कल रात हाथी खैरबार इलाके में आ गए और सुबह से लाल माटी क्षेत्र में बने हुए हैं. सुबह से ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की मदद से स्थिति पर नियंत्रण रखे हुए हैं.
जैसे ही हाथियों के दल ने नेशनल हाईवे को पार किया. सडक को बंद कर दिया गया और हाथियों को निकलने का रास्ता दिया गया. लोग हाथी के करीब ना जाए इसलिए बल की जरुरत है, लगातार लोगों को समझाइश दे रहे हैं लेकिन फिर भी आज एक युवक हाथी के करीब वीडियो बनाने चला गया और हाथी ने राजकुमार नायक पिता चंदू नायक, उम्र करीब 23 साल निवासी भोपाल (मध्य प्रदेश) को मार दिया. जो यहां गैस कुकर बनाने का काम करता था. न विभाग द्वारा शासन के निर्देशानुसार मृतक के परिजनों को तत्कालिक सहायता राशि 25,000 रुपए प्रदान की गई.
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देश में 18 फीसदी कम हो गए हाथी

भारत में हाथियों की आबादी में 17.81% की कमी दर्ज की गई है. 2021-25 के सिंक्रोनस ऑल इंडिया एलिफेंट एस्टिमेशन की रिपोर्ट में सामने आया है कि मौजूदा समय में भारत में एशियाई हाथियों की तादाद 22,446 रह गई है. यह 2017 के 27,312 के मुकाबले 4,065 कम है. लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि नई गणना पद्धति के कारण ये आंकड़े सीधे तुलनीय नहीं हैं और इसे नया आधार माना जाएगा.
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा हाथी पश्चिमी घाट में 11,934 हैं, इसके बाद उत्तर-पूर्वी पहाड़ियों और ब्रह्मपुत्र मैदानों में 6,559, शिवालिक पहाड़ियों और गंगा के मैदानों में 2,062 और मध्य भारत और पूर्वी घाट में 1,891 हैं. राज्यों में कर्नाटक 6,013 हाथियों के साथ पहले स्थान पर है, इसके बाद असम में 4,159, तमिलनाडु में 3,136, केरल में 2,785, उत्तराखंड में 1,792, और ओडिशा में 912 हैं.
पिछले साल अक्टूबर में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भारत में हाथियों की स्थिति 2022-23 की एक पुरानी रिपोर्ट को रद्द कर दिया था. क्योंकि पूर्वोत्तर में गणना में देरी हुई थी. अब जो नई रिपोर्ट सामने आई है उसमें हाथियों की तादाद में कमी दर्ज की गई है.
नई रिपोर्ट में हाथी के रहने के ठिकानों पर मंडरा रहे खतरों का जिक्र है. पश्चिमी घाट, जहां पहले हाथी की बड़ी आबादी थी. अब भूमि उपयोग में बदलाव, जैसे कॉफी और चाय के बागानों का विस्तार, खेतों की बाड़बंदी और तेजी से विकास परियोजनाओं के कारण हाथी समूह अलग-थलग हो रहे हैं.
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