राजिम कल्प कुंभ में आस्था के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप, 3 दिन में 6 करोड़ का टेंडर क्लोजिंग से मचा बवाल, सुखचंद ने प्रकिया पर उठाए सवाल
Allegations of corruption in the name of faith at the Rajim Kalpa Kumbh Mela, the closing of a tender worth 6 crore rupees in three days, caused uproar, Sukhchand questioned the process.
गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन राजिम कुंभ कल्प 2026 के लिए जिला प्रशासन गरियाबंद द्वारा जारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल और संदेह सामने आ रहे हैं. करोड़ों रुपये के इस आयोजन में बहुत ही कम समय में टेंडर आमंत्रित किए जाने से पारदर्शिता पर सवालिया निशान लग गया है.
राजिम कुंभ के दौरान होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च का हिसाब-किताब पहले धर्मस्व और पर्यटन मंत्रालय के पास होता था. भाजपा सरकार ने यह जिम्मेदारी जिला कलेक्ट्रेट को सौंप दी है. पहली ही बार में टेंडर प्रक्रिया विवादों में आ गई है. स्थानीय लोगों और ठेकेदारों के बीच भी इस बात को लेकर नाराजगी है कि उन्हें तैयारी का मौका ही नहीं दिया गया। करोड़ों के इस प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है.
सरकारी खरीदी और टेंडरिंग के नियमों के मुताबिक किसी भी बड़े आयोजन के लिए विज्ञापन प्रकाशन और क्लोजिंग के बीच पर्याप्त समय होना अनिवार्य है. इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है. राजिम कुंभ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में महज तीन दिन का समय देना तकनीकी और कानूनी रुप से गलत माना जा रहा है.
भगवान सिंह उईके कलेक्टर गरियाबंद द्वारा जारी टेंडर के मुताबिक राजिम कुंभ कल्प 2026 का आयोजन 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक किया जाना है. इसके लिए दो अलग-अलग पैकेज में कुल करीब 6 करोड़ 6 लाख रुपये के कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं.
टेंडर की प्रमुख जानकारियाँ:
NIT प्रकाशन तिथि: 05 जनवरी 2026
ऑनलाइन बिड जमा करने की अंतिम तिथि: 09 जनवरी 2026 (सिर्फ 4 दिन)
PPT प्रेज़ेंटेशन: 10 जनवरी 2026
बिड ओपनिंग: 10 जनवरी 2026, शाम 5:10 बजे
इतने बड़े और संवेदनशील धार्मिक आयोजन के लिए सिर्फ 4 दिन का समय देना, नियमों और सामान्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के खिलाफ माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जल्दबाज़ी पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का इशारा हो सकती है. आमतौर पर ऑनलाइन टेंडर के लिए कम से कम 21 दिन का समय दिया जाता है. लेकिन यहां महज 72 घंटों में सारा काम निपटाने की तैयारी है.
सूत्रों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में ऑनलाइन के साथ-साथ भौतिक (Physical) दस्तावेज़ जमा कराने की शर्त भी रखी गई है. जिससे प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है.
स्थानीय नागरिकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:
टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए
सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएँ
कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने इस पूरी प्रक्रिया को फर्जीवाड़ा करार दिया है. उनका कहना है कि किसी भी ठेकेदार को कोटेशन और पीपीटी तैयार करने में कम से कम पांच दिन का वक्त चाहिए होता है. ऐसे में तीन दिन की समय सीमा का मतलब साफ है कि प्रशासन ने पहले से ही अपनी पसंद की कंपनी तय कर ली है. और यह विज्ञापन सिर्फ एक औपचारिकता है.
बेसरा ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार करने के लिए जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई है. इस पूरे मामले पर मिडिया ने जब कलेक्टर भगवान सिंह उईके का पक्ष जानने की कोशिश की गई. तो उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. जिससे संदेह और गहरा गया है.
राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग माना जाता है और यहां देशभर से श्रद्धालु आते हैं. आस्था के इस बड़े केंद्र से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता न होना लोगों को अखर रहा है. ग्रामीण इलाकों में यह चर्चा आम है कि करोड़ों के बजट का बंदरबांट करने के लिए कागजी खानापूर्ति की जा रही है. अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई. तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा सरकार के लिए गले की हड्डी बन सकता है. विपक्षी दल अब इस मामले को लेकर सड़क पर उतरने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं.
शासन के वित्तीय नियमों (GFR) और CVC गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित हो
राजिम कुंभ कल्प जैसे धार्मिक और जनआस्था से जुड़े आयोजन में अगर पारदर्शिता नहीं बरती गई तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है.
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है या उच्च स्तर पर जांच के आदेश जारी होते हैं.
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