संचार साथी ऐप मामला, बैकफुट पर मोदी सरकार, देश भर में हो रहे विरोध के बाद प्री-इंस्टॉलेशन का आदेश लिया वापस, Apple बोला- प्राइवेसी को खतरा
The Modi government is on the back foot in the Sanchar Saathi app case, withdrawing the pre-installation order after nationwide protests, and Apple claims it threatens privacy.
नई दिल्ली : संचार साथी ऐप को लेकर चला विवाद आखिरकार उस मोड़ पर आ पहुंचा है जहां केंद्र सरकार को प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता हटानी पड़ी. एक ओर मोदी सरकार का दावा है कि यह कदम साइबर सुरक्षा और जन-सहभागिता बढ़ाने के लिए था. वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक विरोध और तकनीकी कंपनियों, खासकर Apple की असहमति ने पूरे मुद्दे को गोपनीयता और पारदर्शिता की बहस में बदल दिया.
सरकार का तर्क है कि ऐप पूरी तरह सुरक्षित है और नागरिकों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के मकसद से बनाया गया है. बढ़ते डाउनलोड इस बात का संकेत भी देते हैं कि लोगों में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरुकता बढ़ रही है. लेकिन सवाल यह भी है कि क्या सुरक्षा के नाम पर अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन सही तरीका था?
विपक्ष ने इसे सीधे-सीधे निगरानी और निजता पर हमले के रुप में पेश किया. प्रियंका गांधी, अरविंद केजरीवाल से लेकर अखिलेश यादव तक सभी ने केंद्र पर नागरिकों की जासूसी करने और लोकतांत्रिक आज़ादी को सीमित करने के आरोप लगाए. यह बहस सिर्फ राजनीतिक नहीं. बल्कि तकनीकी पारदर्शिता और डिजिटल अधिकारों की भी है.
Apple ने साफ-साफ कह दिया कि अनिवार्य ऐप इंस्टॉलेशन iPhone यूज़र्स की प्राइवेसी को ख़तरे में डाल सकता है. जब एक वैश्विक तकनीकी कंपनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाती है. तो स्वाभाविक है कि जनता की शंका भी गहरी होती है.
सरकार का अनिवार्यता हटाना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि तकनीकी फैसलों में पारदर्शिता, नागरिकों का विश्वास और निजता का संरक्षण सर्वोपरि होना चाहिए. डिजिटल इंडिया के दौर में यह मुद्दा सिर्फ एक ऐप का नहीं, बल्कि डिजिटल अधिकारों के भविष्य का है.
राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने इस आदेश को निजता और आजादी पर एक जबरदस्त हमला बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा है, "हर नए फोन में इसे पहले से इंस्टॉल करके, हमें ऐप अनइंस्टॉल करने की इजाज़त न देकर, 'सुरक्षा' की आड़ में, सरकार के पास हमारे कॉल, टेक्स्ट और लोकेशन की जासूसी करने की क्षमता हो जाएगी. यह निगरानी का सबसे बुरा रूप है."
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देश से लोगों के बीच निजता संबंधी चिंताएं और राज्य की निगरानी की आशंकाएं पैदा हो गई हैं. ऐसे में सरकार ने इसके इस्तेमाल को वैकल्पिक रखने का फैसला लिया है. केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य द्वारा विकसित इस साइबर सुरक्षा ऐप में किसी भी तरह की जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग शामिल नहीं है.
बता दें कि संचार साथी एप को लेकर पूरा विवाद 28 नवंबर को शुरु हुआ. जब दूरसंचार विभाग (DoT) ने सभी मोबाइल फोन निर्माताओं को एक आदेश जारी किया था. इसमें कंपनियों को भारत में बेचे जाने वाले सभी नए मोबाइल फोन के साथ-साथ मौजूदा हैंडसेटों में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए एप इंस्टॉल करना कंपलसरी कर दिया था. विपक्ष ने इसे नागरिकों की ‘जासूसी’ का प्रयास बताते हुए केंद्र सरकार पर ‘तानाशाही’ थोपने का आरोप लगाया. विरोध बढ़ता देख सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा.
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