धूमधाम से हुआ गरियाबंद में जवारा विसर्जन, कराया गया कन्या भोजन, निकली ज्योति कलश की विसर्जन यात्रा, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

Jawara immersion took place with great pomp in Gariaband Kanya Bhojan was organized Jyoti Kalash immersion procession took place thousands of devotees participated

धूमधाम से हुआ गरियाबंद में जवारा विसर्जन, कराया गया कन्या भोजन, निकली ज्योति कलश की विसर्जन यात्रा, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

धूमधाम से हुआ गरियाबंद में जवारा विसर्जन, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल, मां का हुआ विशेष श्रृंगार

गरियाबंद : नगर के शीतला मन्दिर में नौ दिन तक चले नवरात्र सेवा व उत्सव का समापन शुक्रवार को ज्योत जवारा विसर्जन के साथ सम्पन्न हुआ. शहर के अलग-अलग मोहल्लों से महिला और पुरुष सफेद कपड़े पहनकर ज्योत और जवारा विसर्जन करने के लिए निकले.
माता के भक्तों ने उन्हें भक्तिभाव के साथ विदा किया।माता के जसगीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते हुए,नवरात्र के अष्टमी पर गुरुवार को दुर्गा पंडालों में सुबह से ही हवन पूजन शुरु हो गया था. देर रात तक दुर्गा पंडालों में हवन पूजन चलता रहा. वहीं अष्टमी पर देवी मंदिर प्रसाद चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. वही शुक्रवार को स्थानीय शीतला मंदिर के प्रज्वलित 467 ज्योत दीपो के साथ ज्वारा विसर्जन को लेकर महिलाएं, युवतियां और बालिकाएं अपने सिर पर जवारे रखे निकलीं. शहर के देवालयो से जवारे शीतला मंदिर धूमधाम से पहुंचे. जहां पूजन अर्चन किया गया.
सुबह एक बजे से विसर्जन के लिए लंबी लाइन में छिंद तलाब तक श्रद्धालुओं द्वारा स्थापित किया गया हजारों मनोकामना ज्योति जवारे कलश का विसर्जन विशेष पूजा आरती के बाद 1 बजे मन्दिर प्रांगण से निकालकर समीप के छिंद तलाब में बड़े ही धार्मिक वातावरण के बीच किया जाएगा. वही इस साल नगरपालिका परिषद के द्वारा ज्योत कलश सिर में रखी माताओं बहनों के लिए विशेष ब्यवस्था कर ज्वारा विसर्जन के बाद नाश्ता और नीबू के मीठे पानी का इन्तेजाम किया गया था. जिसे अन्य भक्तों ने भी ग्रहण किया. इस इन्तेजाम के लिए पालिका परिषद से विशेष टीम बनाया गया था. ताकि शरबत नास्ता सभी तक पहुच सके.
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गरबा के आखिरी दिन बंधा समा,गुजराती समाज के गरबे में दिखी गुजरात के पारंपरिक संस्कृति की झलक, जमकर नाचे गुजराती

गरियाबंद : नगर में गुजराती समाज द्वारा आयोजित गरबा उत्सव में आखरी दिन गुजरातियों में गजब का उत्साह देखने को मिला. नवरात्र के आखरी दिन देर रात तक गरबा खेला गया. इस दौरान समाज के लोगों ने जमकर गरबा खेला. पारम्परिक परिधान, गुजराती संगीत और डांडिया की ताल ने जमकर थिरके. समाज के युवाओं और महिलाओं ने मिलकर आखिरी दिन जबरदस्त समा बांधा. समाज के युवा, बड़े बुजुर्ग और महिलाएं सभी एक साथ गरबे में झूमते नजर आए.
इस साल नवरात्रि में गुजराती समाज मैं जमकर गरबा का रंग चढ़ा. नवरात्रि के नौ दिनों तक रोज नए-नए परिधानों और आकर्षक वेशभूषा में समाज के लोग गरबा खेलने पहुंचे हैं. रोज नए-नए विधाओं में गरबा किया. इस दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. छोटे-छोटे बच्चे भी आकर्षक वेशभूषा में गरबा खेलते और मस्ती करते नज़र आए.
उल्लेखनीय हैं कि गरियाबंद में बीते 54 साल से गुजराती समाज द्वारा गरबा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है. यहां गरबा में गुजरात की संस्कृति की झलकिया साफ नजर आती है. भक्ति में माहौल में रास गरबा और डंडियों की ताल से पूरा माहौल आकर्षक और मनोरंजन नजर आता है. हर साल यहां गरबा का उत्साह बढ़ते जा रहे हैं. नए-नए फिल्मी गीतों और गुजराती संगीत में प्रचलन के साथ ही अब गरबा की विधाओं में भी बदलाव नजर आने लगा है. इस साल गरबे के दौरान समाज के लोग नए और अनूठे तरीके से गरबा खेलते नजर आए.
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धर्मनगरी मे चैतन्य दैवीयो की झांकी बनी आकर्षण का केन्द्र

चम्पारन/नवापारा राजिम : नवरात्रि के पावन अबसर पर धर्म नहरी चम्पारन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के राजयोग प्रशिक्षण केंद्र की शिव शक्ती भवन में चैतन्य देवियों की भव्य झांकी सजाई गई. विशेष आकर्षण का केंद्र बनी इस झांकी में पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को नवरात्रि पर्व का आध्यात्मिक रहस्य सरल-सहज तरीके से समझाते हुए उन्हें अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत कर नर से नारायण समान बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
चम्पारन नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचल के भाई-बहनें यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में चैतन्य देवियों के दर्शन करने और ब्रह्माकुमारी शकुन्तला दीदी जी से वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए पहुँच रहे हैं.
गत मंगलवार को चैतन्य झांकी के शुभारंभ अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय मुख्य संचालिका राजिम से पहुंची ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदीं ने नगर प्रमुख एवं समाज के वरिष्ठ जनो की उपस्थित मे जनसमुदाय को देवियों के आध्यात्मिक रहस्य से अवगत कराते हुए बताया कि मां दुर्गा से तात्पर्य दुर्गुणों को दूर करने वाली शक्ति से है. देवियों के व्रत के साथ हमें मन से दुर्गुणों को त्यागने का संकल्प लेना चाहिए. मां लक्ष्मी वह हैं, जिसमें महान लक्ष्य होते हैं. इसलिए यह कहा जाता है कि “नर ऐसी करनी करे जो नारायण बन जाए. और नारी ऐसी करनी करे जो लक्ष्मी के समान पूजी जाए.” हमें अपने जीवन में यह लक्ष्य रखना चाहिए कि संसार रुपी कीचड़ में रहते हुए भी कमल की तरह बुराइयों और गलत संस्कारों से मुक्त रहें.
दीदी जी ने बताया कि मां सरस्वती को हंस पर विराजमान, हाथ में वीणा लिए और धवल वस्त्रों में दिखाया गया है. इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि कलियुग के अंत में जो आत्मा सादगी और पवित्रता का धवल वस्त्र धारण करती है और जिसके मन एवं मुख से सदा ज्ञान रुपी वीणा झंकृत होती रहती है. वही हंस के समान नीर-क्षीर विवेक कर दुर्गुणों से दूर रह पाती है.
परमात्मा दे रहे आत्मा की शक्तियों को जागृत करने की शिक्षाब्रह्माकुमारी शकुन्तला दीदी ने नवरात्रि का अर्थ समझाते हए कहा कि रात्रि अर्थात् अज्ञान, अंधकार, बुराइयों और आसुरीयता का समय। नवरात्रि का उद्देश्य है. अपने भीतर घर कर चुकी बुराइयों को नव संकल्पों के साथ दूर कर जीवन में दिव्यता और पवित्रता का आह्वान करना। जागरण का अर्थ है. अपनी शक्तियों का जागरण करना। देवियों को आदिशक्ति और शिव शक्ति भी कहा जाता है. कालांतर में इन शक्तियों ने शिव से योग बल द्वारा शक्ति प्राप्त की थी. इसलिए इन्हें शिव शक्ति कहा जाता है. जब संसार में अज्ञानता की रात्रि छा जाती है. तब परमात्मा आत्मा की शक्तियों को जागृत कर अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं. वर्तमान समय में यही परिवर्तन का काल चल रहा है. परमात्मा धरती पर आकर आत्माओं की शक्तियों को पुनः जागृत करने की शिक्षा दे रहे हैं.
माताओं-बहनों का सम्मान करने पर मिलेगा देवी माँ का आशीर्वाद – बहनजी ने आगे कहा कि हमारे समाज में नारी को देवी का रूप माना जाता है. लेकिन आज समाज एक ओर नवरात्रि के रूप में देवियों की पूजा करता है और दूसरी ओर देवियों के वास्तविक स्वरुप– नारियों का अपमान करता है. भारत की परंपराओं में नारी का स्थान सर्वोच्च है. नवरात्रि का वास्तविक अर्थ है कि केवल नौ दिनों तक नहीं. बल्कि सदा नारी शक्ति का सम्मान करना चाहिए. हम जितना सम्मान नौ देवियों को देते हैं. उतना ही हमें अपनी माताओं-बहनों का भी सम्मान करना चाहिए. तभी देवी मां प्रसन्न होकर हमें अपने आशीर्वाद से मालामाल करेगी. झांकी दर्शन मे ब्रह्माकुमारी बहनो द्वारा कुम्भ्कर्णी निंद्रा मे सोए हुए मानव समाज को जगाने का अनोखा प्रयास किया जा रहा है.
वही झांकी के साथ साथ आध्यात्मिक प्रवचन के इस कार्यक्रम में चम्पारन पंचायत प्रमुख विजय यदु, नन्हूराम साहू, परस राम आदि ने भानू प्रताप साहू, राधे लाल साहू, सुधूराम, राधेश्याम सहित संस्थान के इस प्रयासों का मुक्त कंठ से प्रशंसा की कार्यक्रम मे अनेक गणमान्य नागरिक ग्रामीण समाज उपस्थित रहे.
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नवापारा राजिम : शहर सहित ग्रामीण अंचलों में शारदीय नवरात्रि पर अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में ग्राम नायकबांधा में नवदुर्गा उत्सव समिति  द्वारा छत्तीसगढ़ी लोककला मंच, मया के मड़वा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राजेश साहू जिला प्रवक्ता एवं जिला संयोजक भाजपा आईटी सेल रायपुर जिला ग्रामीण उपस्थित रहे.
समिति के पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों द्वारा राजेश साहू का बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया गया. इस अवसर पर साहू ने ग्राम वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह नवरात्रि का पर्व हम और आप सभी के लिए सुखद हो. सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लाएं यही माता से प्रार्थना एवं कामना है.
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मां शक्ति की आराधना के नौ दिवसीय पूजा के आखरी दिन कराया गया कन्या भोजन

दुर्ग : मां शक्ति की आराधना के नौ दिवसीय पर्व शुक्रवार को समापन हुआ. अवसर पर भिलाई के खुर्सीपार स्थित बोल बम सेवा समिति एवं कल्याण के द्वारा नवमी के अवसर पर माताजी का हवन-पूजन के साथ माता की आरती की गई और साथ ही नौकन्याओं को नौकन्या भोज कराया गया.
इस मौके पर दुर्गा पंडाल में बोल बम सेवा समिति एवं कल्याण के अध्यक्ष और भिलाई निगम के उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह ने सभी नौकन्याओं को पैर में आलता लगाकर माता की चुनरी ओढ़ाई गई. और सभी नौकन्याओं के सामने थाली सजाई गई.
वहीं दया सिंह ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया. 9 दिन माता रानी का आराधना के साथ-साथ पंडाल में डोंगरगढ़ जाने वाले पदयात्रियों के लिए नाश्ता, खाना पदयात्रियों आराम करने के लिए व्यवस्था के साथ मेडिकल कैंप भी लगाया गया था. आज हवन के साथ 109 कन्याओं को भोजन कराया गया. आज विसर्जन किया जाएगा.
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कुरुद में श्रीराम जानकी गरबा महोत्सव का हुआ भव्य समापन, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

कुरुद : चंद्राकर भवन कुरुद में श्रीराम जानकी गरबा महोत्सव परिवार द्वारा शारदीय नवरात्रि में प्रथम दिवस से जारी गरबा का भव्य समापन महाअष्टमी के पावन अवसर पर हुआ. समापन कार्यक्रम में अतिथि के रुप में वरिष्ठ शिक्षक मुकेश कश्यप थे.
विधिवत पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई और आयोजन प्रमुख नेहा चंद्राकर ने अतिथि का स्वागत सम्मान करते हुए उन्हें मंच तक आमंत्रित किया. इसके साथ ही ड्रेस कोड और थीम के आधार पर डीजे की मधुर ध्वनि में डूबकर माता सेवा के गीतों पर थिरकते हुए सभी ने गरबा की मनभावन प्रस्तुति प्रारंभ की. बेहतरीन हावभाव, स्टेप बाई स्टेप और पूरे लय के साथ सभी ने माता भक्ति गीतों पर श्रृंखला बद्ध होकर अपनी प्रतिभा की शानदार प्रस्तुति देते हुए सबका दिल जीत लिया.
अतिथि उद्बोधन में मुकेश कश्यप ने इस शानदार आयोजन की तारीफ करते हुए नेहा चंद्राकर और उनकी टीम को बधाई दी और कहा कि नवरात्रि शक्ति की उपासना का पर्व है. जिसके अवसर पर गरबा के माध्यम से घर की मातृशक्तियां , बहू और बेटियां रोज की दिनचर्चा से बाहर निकलकर आपस में एक दूसरे की सहभागी बनकर माता की आराधना करते हुए इस पावन उत्सव की खुशियां बांटती है. इस तरह के आयोजनों से समाज के कई वर्गो में सामाजिक समरसता और अपनत्व की भावना बढ़ती है. सभी आपस में सहयोग करते हुए एक ईकाई बनकर काम करते हैं. इससे हमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और देश की विविधता पर एकता की झलक भी मिलती है. आने वाले समय में आप सभी इसी तरह मिलजुलकर कार्य करें और आपसी सहयोग करते हुए एक परिवार बनकर आने वाली पीढ़ियों लिए मिसाल बने. 
इसके बाद श्रीमती नेहा ने अंतिम दिन और पूरे आठों दिन के अलग-अलग श्रेणी में विजयी प्रतिभाओं के नामों की घोषणा की. जिनमें बेस्ट गरबा परफार्मेंस का अवार्ड महिला वर्ग में माधुरी शर्मा, कन्या वर्ग से ऋतु चंद्राकर और कविता साहू, बालिका वर्ग से सुरुभि साहू को अतिथि और महिला आयोजन टीम के पदाधिकारियों के करकमलों से सम्मानित किया गया.
साथ ही अन्य दिनों के विजेताओं में रितु चंद्राकर, रीमा कुरई, दुर्गा साहू, रितु साहू, अंशु साहू, वशिका वर्मा, सुरभि ठाकुर, कृतिका सक्सेना, जय शर्मा, प्रियंका गुप्ता ,दुर्गा साहू, नंदिनी दीवान ,दीक्षांशी सेन, ज्योति ध्रुव, कुनिका यादव, वेदिका चंद्राकर, लक्ष्मी साहू, देवासी सोनी, सोनिया साहू, मोनिका पवार, सुरभि ठाकुर, रितु साहू, मनीष साहू आदि भी सम्मानित हुए.
इसके अलावा कार्यक्रम में शुरु से लगातार सहयोग करने वाले सभी लोगों का भी सम्मान किया गया. आभार प्रकट करते हुए श्रीमती नेहा ने मुकेश कश्यप के प्रेरणादायक संदेश और लगातार मिल रहे उनके सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया. साथ ही विजयी प्रतिभाओं को बधाई देते हुए आने वाले वर्षो में भी इसी तरह एकजुटता दिखाने की बात पर जोर दिया. अंतिम कड़ी में सभी ने भारत के दिग्गज उद्योगपति रहे रतन टाटा के निधन पर दो मिनट का धारण कर उनके योगदान को याद कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की.
कार्यक्रम के दौरान नमिता चंद्राकर, सुरेखा चंद्राकर, धानी चंद्राकर, अंजू चंद्राकर, भारती साहू, मीना साहू, रजनी साहू, दुर्गा चंद्राकर, कमलेश चंद्राकर, अमृता देवांगन, नमिता चंद्राकर, श्वेता अग्रवाल ,रुपेश्वरी साहू, सीमा साहू सहित कार्यक्रम से जुड़ी मातृशक्तियां, बहू-बेटियां बड़ी तादाद में मौजूद थी.
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राजपरिवार ने कुलदेवी मां महामाया के मंदिर में श्रृंगार पूजा और आरती की गई

सरगुजा : महाराजा टी एस सिंह देवजी और उनके उत्तराधिकारी युवराज आदित्येश्वर शरण सिंह देवजी ने कुलदेवी मां महामाया के मंदिर में विशेष आरती और श्रृंगार पूजा की. राजपुरोहित द्विपेश पांडेय, महामाया मंदिर पुजारी जयशंकर पांडेय ने पूजा सम्पन्न कराई. इस दौरान महाराजा टी एस सिंह देव एवं उनके उत्तराधिकारी युवराज आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने कुलदेवी मां महामाया के मंदिर में पहुंच कर विशेष श्रृंगार एवं आरती पूजा की.
विशेष श्रृंगार पूजा में राजपरिवार से जुड़े हुए शशिभाल सिंह,बालकृष्ण पाठक, डॉ एमपी अग्रवाल सहित काफी संख्या में लोग इस दौरान उपस्थित रहे. इस साल विशेष श्रृंगार पूजा आरती सुबह 6:52 में सम्पन्न हुई.
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चंडी मंदिर से निकली ज्योति कलश की विसर्जन यात्रा, छोटी बच्चियों ने भी सिर पर कलश रखकर किया शहर भ्रमण

तखतपुर : हर साल नवरात्र में तखतपुर के चंडी मंदिर में जलने वाली ज्योति कलश की विसर्जन यात्रा नवमी तिथि को निकलती है. इस साल भी शारदीय नवरात्रि में जलाए गए ज्योति कलश की विसर्जन यात्रा चंडी मंदिर से निकलकर देवांगन पारा और सदर बाजार होते हुए निकली और कालीबाड़ी के बम बम घाट में जाकर विसर्जित हुई. इस साल चंडी मंदिर में कुल 630 ज्योति कलश जलाए गए थे. जिसमें से 41 घृत ज्योति कलश थे.
इस कलश विसर्जन यात्रा में शक्ति और भक्ति का संगम देखने को मिला. नगरवासी जगह-जगह इस यात्रा की पूजा किए. लोग जैसी व्यवस्था बन पड़ती थी वैसी सेवा करते रहे. छोटी छोटी बच्चियों को सिर पर कलश उठाए देखना मन में मां के प्रति श्रद्धा और विश्वास को भर देता था.
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